जितनी चलेगी कार, उतना ही लेना होगा इंश्योरेंस, क्या है Pay-As-You-Drive, जिससे होगी बंपर बचत?
Car Insurance News: अगर आप अपनी कार का कम इस्तेमाल करते हैं या आपका भी वर्क फ्रॉम होम है तो कार इंश्योरेंस के इस सीक्रेट तरीके से आप अपने हजारों रुपए बचा सकते हैं. जानें क्या है Pay-As-You-Drive.

Car Insurance: अगर आपकी कार ज्यादातर समय घर पर खड़ी रहती है और आप उसका इस्तेमाल केवल कभी-कभार करते हैं तो आपके लिए मोटर इंश्योरेंस पर बचत का एक नया विकल्प मौजूद है. इसे Pay-As-You-Drive यानी PAYD इंश्योरेंस कहा जाता है, जिसमें प्रीमियम का एक हिस्सा इस बात पर तय होता है कि आपने सालभर में अपनी कार कितनी चलाई.
भारत में बीमा नियामक की मंजूरी के बाद शुरू की गई इस योजना के तहत वाहन मालिक को पॉलिसी लेते या रिन्यू कराते समय सालाना चलने वाले किलोमीटर का एक स्लैब चुनना होता है. अलग-अलग बीमा कंपनियां अलग-अलग दूरी के विकल्प देती हैं. अगर वाहन तय सीमा के भीतर चलता है तो ग्राहक को सामान्य मोटर बीमा की तुलना में कम प्रीमियम देना पड़ सकता है.
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थर्ड पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम पर पड़ता है असर?
हालांकि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम पर इसका कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि यह सरकार और नियामक द्वारा तय किया जाता है. पीएवाईडी के तहत मिलने वाली बचत केवल वाहन के ओन डैमेज कवर पर लागू होती है.
अलग अलग तरीकों से होता है बीमा का आंकलन
बीमा कंपनियां वाहन के इस्तेमाल का आकलन अलग-अलग तरीकों से करती हैं. कुछ कंपनियां वाहन के ओडोमीटर की रीडिंग के आधार पर दूरी मापती हैं, जबकि कुछ टेलीमैटिक्स या मोबाइल तकनीक की मदद से कार के उपयोग पर नजर रखती हैं.
यह योजना उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद मानी जा रही है जो रोजाना कार का इस्तेमाल नहीं करते. घर से काम करने वाले कर्मचारी, रिटायर लोग, एक से ज्यादा कार रखने वाले परिवार या केवल वीकेंड पर गाड़ी चलाने वाले लोग इससे अच्छी बचत कर सकते हैं.
वहीं, अगर आप रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं या नियमित रूप से कार का इस्तेमाल करते हैं, तो पारंपरिक मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती है. कई कंपनियों में तय किलोमीटर सीमा पार करने पर अतिरिक्त प्रीमियम देना पड़ सकता है या ग्राहक को अधिक दूरी वाले स्लैब में शिफ्ट किया जा सकता है.
विशेषज्ञों का क्या कहना है?
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कम प्रीमियम देखकर पीएवाईडी प्लान नहीं चुनना चाहिए. पॉलिसी लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि कंपनी वाहन के उपयोग को कैसे मापती है और तय सीमा पार होने पर क्या नियम लागू होंगे. कुछ कंपनियां पॉलिसी अवधि के दौरान किलोमीटर सीमा बढ़ाने की सुविधा देती हैं, जबकि कुछ अतिरिक्त शुल्क वसूलती हैं.























