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शेख हमद बिन ने कैसे खड़ी की कतर की अर्थव्यवस्था? इन वजह से टॉप इकोनॉमी में शुमार हुआ उनका देश

शेख हमद साल 1995 में कतर की सत्ता पर काबिज हुए. उस समय कतर की इकोनॉमी बेहद ही संकुचित थी, या मानकर चलें, सिमटी हुई थी. मान लें, कि उस वक्त तेल के सहारे ही कतर अपनी इकॉनोमी चला रहा था.

कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी 74 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गए. भारत में उनके निधन पर एक दिन का राष्ट्रीय शोक रखा गया है. 13 जुलाई को पूरे देश में झंडा झुका हुआ है. लेकिन इससे इतर अल थानी की जो पहचान थी, वो एक है कि उन्होंने एनर्जी से भरपूर अपने देश को घरेलू और वैश्विक पहचान दी. 

शेख हमद साल 1995 में कतर की सत्ता पर काबिज हुए. उस समय कतर की इकोनॉमी बेहद ही संकुचित थी, या मानकर चलें, सिमटी हुई थी. मान लें, कि उस वक्त तेल के सहारे ही कतर अपनी इकॉनोमी चला रहा था. वहीं, नॉर्थ फील्ड साइट का विशाल गैस स्टोरेज शुरुआती दौर में ही था.

हमद के सत्ता संभालते ही उन्होंने दो दशक के अंदर एलएनजी के मामले में अपने देश कतर को सबसे बड़ा निर्यातक देश बना डाला. इस दौरान कतर ने कई उपलब्धि हासिल की. कतर दुनिया का सबसे बड़ा सॉवरेन वेल्थ फंड्स में से एक का मालिक और पर कैपिटा इनकम के मामले में सबसे अमीर देशों में शुमार हो गया. 

इसके पीछे एक्सपर्ट्स का मानना है कि शेख हमद ने इकोनॉमी में बड़े बदलाव किए. नया मॉडल लागू किया. तेल और गैस की कीमतों में इजाफा एक फैक्टर था, लेकिन वह पूरा फैक्टर नहीं था. इसमें हमद की भूमिका अहम थी. उन्होंने तेल और गैस से हुई दौलत को प्रोडक्शन एसेट, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, बुनियादी ढांचे और ह्यूमन कैपिटल को बनाने में लगाया. यह उनके इन्वेस्टमेंट करने की रणनीति थी. 

गैस ने बदला कतर की इकोनॉमी को
दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस नॉर्थ फील के डेवलपमेंट के साथ कतर में आर्थिक बदलाव की असल शुरुआत हुई. 1990 में तेल के गैस में बदलने के फैसले ने भी कतर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. 1996 में कतर ने अपनी पहली एलएनजी खेप भेजी. 15 साल के कम समय में कतर इस कमोडिटी का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया. 

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गैस में आई तेजी से कतर की इकोनॉमी रॉकेट की तरह बूस्ट कर गई. एक दशक के भीतर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में जाकर शुमार हो गई. शेख हमद के शासनकाल में कतर की इकोनॉमी बीस गुना से ज्यादा बढ़ी. इस दौरान जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद 1995 में 8 अरब डॉलर से बढ़कर 2013 में लगभग 199 अरब डॉलर का हो गया.

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की मानें तो इकोनॉमी ने दुनिया में सबसे ज्यादा विकास दर भी दर्ज की. यहां 2006 में 18 प्रतिशत वास्तविक विकास दर थी. जो बढ़कर 2011 में 26.2 हो गई. 

कैसे 11 अरब कतरी रियाल बढ़कर 403 अरब रियाल तक पहुंची कतर की इकॉनोमी?

2010 तक प्रोडक्शन बढ़कर 77 मिलियन टन सलाना हो गई. इससे रेवेन्यू तो बढ़ा, साथ ही ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी, एशिया और यूरोप की अर्थव्यवस्था के लिए कतर की एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर स्थिति को और मजबूत किया. शेख हमद के शासन काल में हाइड्रोकार्बन सेक्टर की वैल्यू 11 अरब कतरी रियाल लगभग 3 अरब डॉलर से बढ़कर 403 अरब रियाल यानी 110.4 अरब डॉलर हो गई. 

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नवंबर 2025 एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर कंसल्टेंट अपनी भूमिका निभा रहा हूं. मीडिया का अनुभव करीबन साढ़े 8 साल का है. देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं. पिछले कुछ सालों में बतौर मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर, कंटेंट एडिटर, सब एडिटर और रिजनल टीवी चैनल में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. लेखन, ग्राफिक्स और वीडियो प्रोडक्शन की बारीक समझ है. नेशनल-इंटरनेशनल डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुका हैं. मजा ग्राउंड या एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कवर करने में आता है. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा. साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना, कहानियां-कविताएं लिखना और घूमना विशेष रुचियों में दर्ज है.

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