Explainer: देश का 'टॉप' एयरपोर्ट लेकिन उड़ान शून्य, खजुराहो की रैंकिंग पर क्यों उठे सवाल?
Khajuraho Airport News: AAI की ताजा रैंकिंग में मध्य प्रदेश का खजुराहो एयरपोर्ट टॉप पर है, लेकिन यहां से एक भी फ्लाइट संचालित नहीं हो रही है, इसलिए इस रैंकिंग पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

Khajuraho Airport Ranking Controversy: क्या आप जानते है देश का सबसे बेहतरीन एयरपोर्ट कौनसा है? अगर जवाब में दिल्ली, बेंगलुरु या हैदराबाद का नाम आए तो हैरानी नहीं होगी, लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया AAI की ताजा Airport Service Quality रैंकिंग कुछ और ही कहानी कहती है. इस रैंकिंग में मध्य प्रदेश का खजुराहो एयरपोर्ट 5 में से 4.98 अंक के साथ टॉप पर है.
पहली नजर में यह उपलब्धि शानदार लगती है, लेकिन जब इसी एयरपोर्ट की मौजूदा स्थिति देखी जाती है तो कई सवाल खड़े हो जाते हैं, क्योंकि आज की तारीख में नंबर एक पर आए खजुराहो से एक भी निर्धारित कमर्शियल उड़ान संचालित नहीं हो रही, यानी रनवे खाली है, टर्मिनल पर नियमित यात्री नहीं हैं और एयरलाइन सेवाएं पूरी तरह बंद हैं.
पहले समझिए यह सर्वे क्या है और कब हुआ?
AAI हर छह महीने में Airport Service Quality सर्वे कराता है. यह सर्वे स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से कराया जाता है जिसमें यात्रियों से एयरपोर्ट पर उनके अनुभव के बारे में पूछा जाता है. करीब 33 अलग-अलग मानकों पर फीडबैक लिया जाता है जैसे पार्किंग, वाई-फाई, सफाई, खानपान, सुरक्षा जांच, स्टाफ का व्यवहार, सामान मिलने में लगा समय और अन्य सुविधाएं. हर पैमाने पर पांच में से अंक दिए जाते हैं और उन्हीं का औसत अंतिम स्कोर बनता है.
यह सर्वे जनवरी से जून 2026 के बीच किया गया था. यानी सर्वे के दौरान खजुराहो में सीमित संख्या में उड़ानें चल रही थीं. इसलिए सर्वे होना नियमों के अनुसार था. लेकिन जब जुलाई के दूसरे पखवाड़े में यह रैंकिंग सार्वजनिक हुई तब तक 1 जुलाई से खजुराहो की सभी निर्धारित कमर्शियल उड़ानें बंद हो चुकी थीं. यहीं से बहस शुरू होती है कि क्या रैंकिंग जारी करते समय यह जानकारी भी साथ नहीं दी जानी चाहिए थी?
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4.98 का स्कोर... और लगभग हर पैमाने पर पूरे अंक
खजुराहो एयरपोर्ट को इस बार 5 में से 4.98 अंक मिले. रिपोर्ट के मुताबिक जमीनी परिवहन, पार्किंग, टर्मिनल की सफाई, वाई-फाई, स्टाफ का व्यवहार और वॉशरूम जैसी कई श्रेणियों में उसे पूरे पांच में से पांच अंक मिले.
यात्रियों ने अपने तनाव का स्तर भी केवल 5 में से 1.04 बताया यानी सर्वे में शामिल यात्रियों का अनुभव लगभग हर पैमाने पर उत्कृष्ट रहा तो अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर खजुराहो में किस आधार पर कनेक्टिंग फ्लाइट की सुविधा को परफेक्ट माना गया. लेकिन एक सवाल ऐसा है, जिस पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए था.
ASQ सर्वे में पैमाना नंबर 17 है अन्य उड़ानों से संपर्क बनाने की सुगमता" यानी इस एयरपोर्ट पर उतरने के बाद आगे की फ्लाइट पकड़ना कितना आसान था. खजुराहो को इस श्रेणी में पूरे 5 में से 5 अंक मिले. यहीं सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है. सर्वे के दौरान खजुराहो से नियमित रूप से केवल दिल्ली और वाराणसी की उड़ानें संचालित हो रही थीं यानी कनेक्टिंग नेटवर्क बेहद सीमित था.
AAI के अपने मासिक ट्रैफिक आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 में खजुराहो एयरपोर्ट पर 152 विमान मूवमेंट दर्ज हुए. जनवरी 2025 में यह संख्या 243 थी. यानी 37.4 प्रतिशत की गिरावट. फरवरी 2026 में 171 विमान मूवमेंट हुए, जबकि फरवरी 2025 में 264 थे. यानी 35.2 प्रतिशत की गिरावट.
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सबसे बड़ा आंकड़ा अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच का है. इस 11 महीने की अवधि में खजुराहो एयरपोर्ट पर कुल 1,023 विमान मूवमेंट हुए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 1,636 थी. यानी कुल मिलाकर करीब 37.5 प्रतिशत की गिरावट.
ध्यान देने वाली बात यह है कि AAI विमान मूवमेंट में लैंडिंग और टेकऑफ दोनों को जोड़कर गिनता है. यानी 152 मूवमेंट का मतलब पूरे महीने में लगभग 76 उड़ानें या औसतन दिन में ढाई उड़ानें.
AAI ने मार्च 2026 के बाद का आधिकारिक ट्रैफिक डेटा अभी तक सार्वजनिक नज़र नहीं आ रहा है. इस दौरान उपलब्ध फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइटों के आधार पर हमने खजुराहो की उड़ानों का आकलन किया. उसके मुताबिक, मई 2026 में करीब 22 विमान मूवमेंट और जून 2026 में करीब 17 विमान मूवमेंट दर्ज हुए.
यह सरकारी आंकड़े नहीं हैं और फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट हर उड़ान को रिकॉर्ड नहीं करतीं लेकिन इससे यह तस्वीर जरूर सामने आती है कि जनवरी के मुकाबले जून तक उड़ानों में तेज गिरावट आई और जुलाई में निर्धारित उड़ानें पूरी तरह बंद हो गईं. अगस्त के शेड्यूल में भी फिलहाल कोई नियमित उड़ान दिखाई नहीं देती.
AAI का अपना नियम भी खड़े करता है सवाल
ASQ रिपोर्ट के नीचे AAI ने खुद लिखा है कि जिन एयरपोर्ट पर निर्धारित उड़ानें उपलब्ध नहीं थीं वहां सर्वे नहीं किया जा सका. ऐसे एयरपोर्ट के सामने स्कोर की जगह केवल डैश दिया गया है यानी AAI खुद मानता है कि जहां नियमित उड़ानें नहीं हैं वहां यात्री संतुष्टि का सर्वे संभव नहीं.
खजुराहो में सर्वे के समय उड़ानें चल रही थीं इसलिए वहां सर्वे होना स्वाभाविक था लेकिन जब अंतिम रैंकिंग जारी हुई तब तक 1 जुलाई से सभी निर्धारित उड़ानें बंद हो चुकी थीं.
यही वजह है कि सवाल उठ रहे हैं कि क्या रैंकिंग जारी करते समय यह स्पष्ट नहीं किया जाना चाहिए था कि जिस एयरपोर्ट को शीर्ष स्थान दिया जा रहा है, वहां फिलहाल कोई नियमित कमर्शियल उड़ान नहीं है.
खजुराहो एयरपोर्ट के निदेशक संतोष सिंह ने एक अखबार को बताया कि 1 जुलाई से उड़ानें बंद हैं और अक्टूबर से दोबारा शुरू होने की उम्मीद है. हालांकि उनका कहना है कि इसकी वजह एयरपोर्ट की कोई कमी नहीं बल्कि एयरलाइन की नेटवर्क योजना, विमानों की उपलब्धता, क्रू प्रबंधन और स्लॉट आवंटन है.
दरअसल यह पहली बार नहीं है जब सीमित या बंद उड़ानों के बावजूद खजुराहो शीर्ष रैंकिंग में पहुंचा हो. अप्रैल 2025 शुरू होने से ठीक पहले इंडिगो ने दिल्ली और वाराणसी की उड़ानें बंद कर दी थीं. स्पाइसजेट पहले ही सब्सिडी न मिलने के कारण दिल्ली सेवा रोक चुका था और भोपाल-रीवा मार्ग की उड़ान भी डाइवर्ट हो गई थी. उस समय भी खजुराहो का रनवे लगभग खाली था.
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फिर भी पिछले ASQ सर्वे में खजुराहो को 4.99 अंक मिले थे और वह शीर्ष स्थान पर था यानी लगातार दूसरी बार खजुराहो शीर्ष रैंकिंग में पहुंचा है. तब एयरलाइंस ने वजह ऑफ-सीजन और कम पर्यटक बताए थे. इस बार कारण अलग बताए जा रहे हैं लेकिन नतीजा वही है.
15 लाख क्षमता... लेकिन सिर्फ 51 हजार यात्री
खजुराहो एयरपोर्ट पर 2,286 मीटर लंबा रनवे, दो एयरोब्रिज, दस विमान पार्किंग स्टैंड, CAT-I ILS, DVOR/DME जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. यहां रडार निगरानी सुविधा भी प्रस्तावित है. टर्मिनल की क्षमता हर साल 15 लाख यात्रियों की है. लेकिन 2025 में यहां से केवल 51,543 यात्री गुजरे यानी क्षमता का करीब 3.5 प्रतिशत.
पिछले वर्षों के आंकड़े भी यही तस्वीर दिखाते हैं...
- 2022: 15,701 यात्री
- 2023: 50,300 यात्री
- 2024: 49,715 यात्री
- 2025: 51,543 यात्री
- 2026 के पहले छह महीने: करीब 40 हजार यात्री (अनुमान )
इस पूरी कहानी में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सवाल खजुराहो एयरपोर्ट की साफ-सफाई, सुविधाओं या कर्मचारियों पर नहीं है. अगर यात्रियों को अच्छा अनुभव मिला तो अच्छे अंक मिलना स्वाभाविक है.
लेकिन यह सर्वे सिर्फ यह मापता है कि जो यात्री एयरपोर्ट तक पहुंचा उसका अनुभव कैसा रहा.यह नहीं मापता कि वहां कितनी उड़ानें उपलब्ध थीं, कितने यात्री यात्रा कर पाए या एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी कितनी मजबूत थी.
कम भीड़ वाले एयरपोर्ट पर लंबी लाइनें नहीं होतीं, सुरक्षा जांच जल्दी पूरी हो जाती है, सामान जल्दी मिल जाता है और बैठने की जगह भी आसानी से मिल जाती है. ऐसे में यात्री संतुष्टि का स्कोर स्वाभाविक रूप से बेहतर हो सकता है. यही वजह है कि सवाल खजुराहो पर नहीं बल्कि उस पैमाने पर उठ रहे हैं जिसके आधार पर "देश के सबसे बेहतरीन एयरपोर्ट" का दावा किया जाता है.
























