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Bullet Train News: यूपी, बिहार-बंगाल के लिए बुलेट ट्रेन का ऐलान, सिर्फ 6 घंटे में दिल्ली से पहुंचेंगे सिलीगुड़ी, ये है रेलवे का प्लान

Train News: दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी होने पर 20 घंटे का सफर केवल 6 घंटे में पूरा होगा, जबकि 300-320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेनें उत्तर भारत की कनेक्टिविटी बढ़ाएंगी.

Delhi Siliguri Bullet Train: रेल मंत्रालय ने नई बुलेट ट्रेन परियोजना का ऐलान कर दिया है. अब दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए आने वाले वर्षों में सफर का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा. केंद्र सरकार ने राजधानी दिल्ली को उत्तर बंगाल के प्रमुख शहर सिलीगुड़ी से हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं.

प्रस्तावित दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन परियोजना के पूरा होने के बाद वर्तमान में करीब 20 घंटे में तय होने वाली दूरी महज 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी. इस महत्वाकांक्षी योजना से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के कई शहरों में आर्थिक गतिविधियों को भी नया बल मिलने की उम्मीद है.

320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

प्रस्तावित कॉरिडोर को मौजूदा रेलवे लाइनों के उन्नयन के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा. इसके लिए पूरी तरह अलग और समर्पित हाई-स्पीड रेल नेटवर्क तैयार किया जाएगा. बुलेट ट्रेनें 300 से 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा का समय कम हो जाएगा.

इन ट्रेनों में आधुनिक एयरोडायनामिक डिजाइन का उपयोग किया जाएगा, जिससे हवा का दबाव कम होगा और यात्रियों को अधिक आरामदायक सफर मिलेगा. सुरक्षा के लिए उन्नत टक्कर-रोधी तकनीक लगाई जाएगी, जबकि यात्रियों को अतिरिक्त लेगरूम और घूमने वाली सीटों जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी.

चार राज्यों को जोड़ेगा हाई-स्पीड कॉरिडोर

दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन मार्ग 1000 किलोमीटर से अधिक लंबा होगा और दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल से होकर गुजरेगा. इस रूट की खासियत यह होगी कि इसे केवल दूरी कम करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अधिकतम लोगों को कनेक्टिविटी देने के लिए डिजाइन किया जाएगा.

योजना के अनुसार ट्रेन नई दिल्ली से चलकर लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहरों से होते हुए सिलीगुड़ी पहुंचेगी. इससे उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच तेज और सुविधाजनक संपर्क स्थापित होगा.

इन शहरों को मिलेगा सीधा फायदा

नई दिल्ली इस कॉरिडोर का शुरुआती केंद्र होगी. लखनऊ के जरिए उत्तर प्रदेश के मध्य हिस्से को हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र को भी इस परियोजना से लाभ मिलेगा. बिहार की राजधानी पटना को बड़े यात्री केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जबकि सिलीगुड़ी उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार के रूप में अंतिम स्टेशन होगा.

अभी शुरुआती चरण में है परियोजना

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की घोषणा के बाद यह परियोजना फिलहाल प्रारंभिक योजना और अध्ययन के चरण में है. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का कार्य नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) को सौंपा जाएगा.

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डीपीआर के तहत ड्रोन सर्वे, संभावित रूट का निर्धारण, भूमि की स्थिति का अध्ययन और पर्यावरणीय प्रभावों का आंकलन किया जाएगा. प्रारंभिक स्तर पर केंद्र सरकार की सहमति मिल चुकी है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए संबंधित राज्यों से भी आवश्यक मंजूरियां लेनी होंगी.

1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है लागत

इतनी लंबी दूरी के एलिवेटेड हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के निर्माण में भारी निवेश की आवश्यकता होगी. शुरुआती अनुमान बताते हैं कि परियोजना पर 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च आ सकता है. हालांकि वास्तविक लागत का आंकड़ा विस्तृत सर्वेक्षण और तकनीकी अध्ययन के बाद ही सामने आएगा.

परियोजना के वित्तपोषण के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और अंतरराष्ट्रीय विकास संस्थानों से मिलने वाले कम ब्याज वाले ऋणों का सहारा लिया जा सकता है.

चार चरणों में पूरा होगा निर्माण

परियोजना के निर्माण कार्य को कई चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई है. पहले चरण में भूमि सर्वेक्षण और आवश्यक जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा. इसके बाद एलिवेटेड पिलर और पुलों का निर्माण होगा ताकि ट्रेन का सड़क या पारंपरिक रेलवे लाइनों से सीधा संपर्क न हो. तीसरे चरण में विशेष हाई-स्पीड ट्रैक और विद्युत प्रणाली स्थापित की जाएगी. अंतिम चरण में ट्रेनों का व्यापक परीक्षण किया जाएगा, ताकि सुरक्षा मानकों की पूरी तरह पुष्टि की जा सके.

कब शुरू हो सकती है सेवा

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना से मिले अनुभवों को देखते हुए इस परियोजना में कई प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से लागू करने की तैयारी है. हालांकि निर्माण कार्य डीपीआर की मंजूरी के बाद ही शुरू होगा. मौजूदा अनुमान के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा होने में कई वर्ष लग सकते हैं और इसका संचालन 2030 के दशक के मध्य तक शुरू होने की संभावना जताई जा रही है.

रियल एस्टेट सेक्टर में दिख सकता है बड़ा बदलाव

विशेषज्ञों का मानना है कि बुलेट ट्रेन जैसी बड़ी आधारभूत परियोजनाएं आसपास के क्षेत्रों में संपत्ति बाजार को नई दिशा देती हैं. दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी जैसे प्रमुख स्टेशनों के आसपास भूमि और आवासीय परियोजनाओं की मांग बढ़ सकती है.

बेहतर कनेक्टिविटी के कारण इन शहरों में निवेश, रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है. इससे स्टेशन क्षेत्रों के आसपास नए आवासीय और वाणिज्यिक विकास को गति मिल सकती है.

सिलीगुड़ी के लिए खुल सकते हैं नए अवसर

सिलीगुड़ी पहले से ही उत्तर बंगाल, सिक्किम और भूटान के लिए एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता है. दिल्ली से तेज रेल संपर्क स्थापित होने के बाद यहां होटल, लॉजिस्टिक्स, कॉरपोरेट निवेश और अन्य सेवा क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो सकते हैं. इससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है.

पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी में आ सकता है बड़ा बदलाव

यदि यह परियोजना तय समयसीमा के भीतर पूरी होती है तो दिल्ली और पूर्वी भारत के बीच यात्रा का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है. कम समय में लंबी दूरी तय करने की सुविधा व्यापार, पर्यटन और सामाजिक संपर्कों को मजबूत बनाएगी. हालांकि अभी परियोजना को जमीन पर उतरने में समय लगेगा, लेकिन इसकी घोषणा ने भविष्य की हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी को लेकर नई उम्मीदें जरूर जगा दी हैं.

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अभिषेक नयन का पत्रकारिता में लंबा अनुभव है. साल 2011 से ABP News से जुड़े हैं. दिल्ली-NCR की राजनीतिक, सामाजिक और नागरिक समस्याओं की जमीनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग करते हैं.

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