कोविड 19 की तीसरी लहर के लिए तैयार हैं विदेश में डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले, क्या फैसला लेगा आईएमए - सुप्रीम कोर्ट? | Uncut
भारत से हर साल करीब 15 से 20 हजार बच्चे मेडिकल की पढ़ाई के लिए चीन, रूस, यूक्रेन, फिलिपिंस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, बेलारूस, जॉर्जिया, आर्मेनिया, बांगलादेश और नेपाल जाते हैं. जब पढ़ाई पूरी करके ये भारत लौटते हैं, तो उन्हें एक परीक्षा पास करनी होती है. उस परीक्षा का नाम है एफएमजीई. लेकिन सख्त नियमों की वजह से परीक्षा पास करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में जब कोरोना की तीसरी लहर का खतरा है, तो क्या उन नियमों में ढील देकर ऐसे डॉक्टरों को कोरोना के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. विदेश से पढ़े ऐसे डॉक्टर भी कोरोना से जंग के लिए तैयार हैं और मुफ्त में अपनी सेवाएं देने को राजी हैं. इनकी संख्या करीब 50 हजार है. देखिए अविनाश राय की रिपोर्ट.
























