Video: पत्नी के कहने पर 80 साल की मां को बस स्टैंड पर अकेला छोड़ चला गया बेटा, वीडियो देख फटेगा कलेजा!
Viral Video: 80 साल की बुजुर्ग महिला को उसके बेटे ने पत्नी के दबाव में मंदसौर बस स्टैंड पर अकेला छोड़ दिया. महिला रोती हुई अपनी बेटी के पास जाने के लिए बस के पास खड़ी थी.

Viral Video: सोशल मीडिया पर हाल ही में एक बेहद ही शर्मनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. जिसमें 80 साल की एक बुजुर्ग महिला को उसके बेटे ने पत्नी के दबाव में मंदसौर के बस स्टैंड पर छोड़ दिया. यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं बल्कि समाज में बढ़ते नैतिक संकट और भावनात्मक बंधनों की कमजोरी को उजागर करती है. सवाल यह उठता है कि क्या परिवार का अर्थ बदल रहा है? क्या वृद्ध माता-पिता अपने ही घरों में बोझ बन गए हैं?
वीडियो में दिखाया गया है कि बुजुर्ग महिला, जो एक टीचर की मां हैं, अपने बेटे और पत्नी के दुर्व्यवहार के कारण बस स्टैंड पर छोड़ अकेली खड़ी हैं. महिला बहुत रो रही हैं और अब वह अपनी बेटी के घर धमना जा रही हैं. वीडियो का यह दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या परिवार का अर्थ समाज में धीरे-धीरे खो रहा है.
Elderly Mother aged 80 Abandoned at Bus Stand in Mandsaur by son after pressure from his wife
— Woke Eminent (@WokePandemic) February 4, 2026
The idea of family losing its meaning?
Are aging parents become inconvenient liabilities in their own homes?
This incident is not an isolated case. It reflects a growing moral crisis… pic.twitter.com/Cjsemah4AE
वीडियो में क्या बताया गया?
वीडियो के मुताबिक, बुजुर्ग महिला सुरेश शर्मा की मां हैं. उनके बेटे और बहू के रवैये ने उन्हें मजबूर कर दिया कि वह अब अपनी बेटी के पास जाएं. वीडियो में महिला की पीड़ा और अकेलेपन को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. उनका रोना और हताशा यह बताती है कि बुजुर्ग माता-पिता को आज समाज में असुरक्षित महसूस करना पड़ रहा है. टीचर होने के बावजूद बेटे ने अपनी मां की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी पूरी नहीं की.
मां की पीड़ा और उसकी बलिदान
एक यूजर ने लिखा, "यह वीडियो देखना भी बहुत दर्दनाक है. मुझे उम्मीद है कि उसके बेटे के बच्चे भी इसे देख रहे होंगे और वे भी ऐसा ही करेंगे." एक दूसरे यूजर ने टिप्पणी की, "एक मां दर्द, आशा और अथाह बलिदान के साथ एक बच्चे को इस दुनिया में लाती है. जब वह खुद नहीं खा सकती, तो उसे खिलाती है. जब वह बीमार होता है, तो जागती रहती है. वह उसकी गलतियों को बिना पूछे ही माफ कर देती है. और फिर भी, आज हम एक मां को बस खड़ी देखते हैं."
एक अन्य यूजर ने लिखा, "जिस 'कलेजे के टुकड़े' को पाला वही बुढ़ापे में कसाई बन गया. सिस्टम की नींद कब खुलेगी? उस बेटे की नौकरी और समाज में स्थिति पर सवाल उठना चाहिए. सिर्फ रेस्क्यू काफी नहीं है, उस परिवार पर एफईआर दर्ज होनी चाहिए ताकि यह एक नजीर बन सके.
Source: IOCL
























