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उम्र 28 साल और एक दम स्वस्थ, फिर भी ऑफिस छोड़ने आते हैं पिता- वजह जान हैरान रह जाएंगे

अहमदाबाद के उद्यमी प्रितेश लखानी ने X पर इस घटना को शेयर किया. उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात 28 साल के एक आईटी इंजीनियर से हुई, जो शादीशुदा है और एक छोटे बच्चे का पिता भी है.

क्या कोई इंसान सिर्फ अपनी कुंडली की वजह से पूरी जिंदगी साइकिल और गाड़ी चलाना न सीखे. सुनने में यह अजीब लगता है, लेकिन सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही कहानी तेजी से वायरल हो रही है. दावा है कि 28 साल का एक आईटी इंजीनियर आज तक कोई भी वाहन नहीं चला पाया, क्योंकि उसकी कुंडली में लिखा था कि अगर वह गाड़ी चलाएगा तो किसी की जान जा सकती है. यह कहानी सामने आने के बाद इंटरनेट पर बड़ी बहस छिड़ गई है. इतना ही नहीं, 28 साल का होने के बाद भी उसके पापा उसे ऑफिस छोड़ने जाते हैं.

कुंडली की वजह से नहीं सीख पाया गाड़ी चलाना

अहमदाबाद के उद्यमी प्रितेश लखानी ने X पर इस घटना को शेयर किया. उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात 28 साल के एक आईटी इंजीनियर से हुई, जो शादीशुदा है और एक छोटे बच्चे का पिता भी है. अच्छी नौकरी और आर्थिक रूप से मजबूत होने के बावजूद उसने आज तक न साइकिल चलाई और न ही कोई गाड़ी. पोस्ट के मुताबिक, उसके परिवार का मानना है कि उसकी कुंडली में लिखा है कि अगर वह वाहन चलाएगा तो किसी की मौत हो सकती है. इसी डर की वजह से उसे आज तक गाड़ी चलाने की इजाजत नहीं मिली.

आज भी पिता ही छोड़ते हैं ऑफिस

पोस्ट में बताया गया कि इंजीनियर के पिता आज भी हर रोज उसे ऑफिस छोड़ने जाते हैं. यह बात सुनकर प्रितेश लखानी ने मजाक में इंजीनियर के पिता से पूछा, "आपकी कुंडली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बारे में क्या लिखा है?" उनका यह सवाल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. हालांकि इस कहानी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इसने लोगों को सोचने पर जरूर मजबूर कर दिया है कि क्या किसी की कुंडली रोजमर्रा की जिंदगी के इतने बड़े फैसले तय कर सकती है.

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सोशल मीडिया पर बंट गए लोग

यह पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई. कुछ लोगों ने कहा कि ज्योतिष और कुंडली पर विश्वास करना हर परिवार का निजी फैसला है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए. वहीं कई यूजर्स का कहना था कि सिर्फ कुंडली के आधार पर किसी बड़े और समझदार इंसान को जरूरी जीवन कौशल सीखने से रोकना सही नहीं है. लोगों का मानना है कि विश्वास अपनी जगह है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी के फैसले समझदारी और जरूरत के हिसाब से भी लिए जाने चाहिए.

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शेख इंजमाम उल हक

हजरत शेख इंजमाम को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है. भारत की शाही संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के गवाह राजस्थान से उनका संबंध है. भारत की शिक्षा नगरी के तौर पर मशहूर कोटा उनकी कर्मभूमि है, जहां हर साल हजारों युवक बड़े-बड़े सपने लेकर, आईआईटी–जेईई और नीट की तैयारी के लिए इस शहर को अपना बसेरा बनाते हैं, लेकिन इंजमाम को इस शहर का ये माहौल रास नहीं आया और उन्होंने डॉक्टर, इंजीनियर बनने के बजाए पत्रकार बनने का फैसला किया. हालांकि, कोटा से 72 किमी दूर एक छोटे से गांव सीसवाली में जन्म लेने वाले इंजमाम ने इंटरमीडियट तक की पढ़ाई इसी शहर से की.

बचपन से हिंदी में रुचि और लगाव उन्हें पत्रकारिता के लिए दिल्ली खींच लाया. जहां उन्होंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री ली. उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी साहित्य में MA और एम.फिल. की डिग्री भी हासिल की.

इंडिया न्यूज़ और विकिपीडिया के लिए कार्य करने के बाद इंजमाम एबीपी लाइव से बतौर ट्रेनी जुड़े और अब प्रमोट होकर बतौर कॉपी एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

शेख इंजमाम का हिंदी और उर्दू से खासा लगाव है और दोनों भाषाओं में शौकिया शायरी भी करते हैं. उन्होंने कई कविताएं रची हैं और अनेक साहित्यिक लेखों का सृजन किया है. साहित्य की एक अन्य विधा व्यंग्य भी उनका पसंदीदा विषय है.

ट्रेंडिंग और राजनीति उनकी पसंदीदा बीट है. राजनीतिक खबरों पर पैनी नजर की वजह से वो रोजाना के ट्रेंड और सोशल मीडिया पर पनपने वाले विचारों की बखूबी समझ रखते हैं.

शेख इंजमाम को घूमना पसंद है और उन्होंने भारत के कई शहरों और देहात का सफर किया है और वहां के रीति रिवाज, रहन सहन और सामाजिक ताने बाने को खूब समझते हैं.

इंजमाम को फिल्में देखने और गाने सुनने का भी शौक है. अमरीश पुरी और सलमान खान को वह अपने पसंदीदा अभिनेताओं में शुमार करते हैं. सूफी और क्लासिकल म्यूजिक भी उन्हें रुहानी सुकून देता है. उन्हें फिल्मी अभिनेताओं, कलाकारों और नेताओं के इंटरव्यू देखने का भी शौक है.

भाषा पर मजबूत पकड़ और लेखन की विभिन्न शैली में गहरी समझ रखने की वजह से वो खूबसूरत अंदाज़ में बड़ी आसानी से खबरों को पेश करने में सफल रहते हैं.

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