क्यों खत्म हो गई माइक्रोमैक्स? एक वक्त पर भारतीय बाजार पर करती थी राज
माइक्रोमैक्स भारतीय स्मार्टफोन बाजार का बड़ा नाम हुआ करता था. कम कीमत, दमदार फीचर्स और हॉलीवुड स्टार की ब्रांडिंग ने इसे Samsung तक को टक्कर देने वाला ब्रांड बना दिया था.

- 2020 में 'IN' सीरीज से वापसी का प्रयास असफल रहा.
एक दौर ऐसा था जब नया फोन खरीदने का मतलब सिर्फ Apple या Samsung चुनना नहीं था. भारतीय बाजार में एक ऐसा नाम भी था, जिसने कम कीमत में बड़े फीचर्स देकर लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना ली थी. दुकानों से लेकर घरों तक माइक्रोमैक्स के फोन नजर आते थे. कंपनी ने कभी Samsung को पीछे छोड़कर भारतीय स्मार्टफोन बाजार में नंबर-1 की जगह तक हासिल की थी. माइक्रोमैक्स ने Hugh Jackman जैसे बड़े हॉलीवुड स्टार को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया था, लेकिन आज माइक्रोमैक्स ऐसी जगह पहुंच गई, जहां उसका नाम आज स्मार्टफोन बाजार में लगभग सुनाई ही नहीं देता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर माइक्रोमैक्स क्यों खत्म हो गई.
माइक्रोमैक्स की शुरुआत कब और कहां से हुई?
माइक्रोमैक्स की शुरुआत 2000 के दशक की शुरुआत में राहुल शर्मा, राजेश अग्रवाल, विकास जैन और सुमीत कुमार ने की थी. कंपनी शुरुआत में मोबाइल फोन नहीं बनाती थी. यह Nokia और Airtel के लिए हार्डवेयर तैयार करती थी. मोबाइल कारोबार में कंपनी ने 2008 के आसपास कदम रखा. राहुल शर्मा को बिहार के एक गांव में ऐसा एक्सपीरियंस हुआ, जिसने फोन की जरूरत को समझने में मदद की. वहां एक व्यक्ति ट्रक की बड़ी बैटरी से मोबाइल चार्ज करने के लिए पैसे ले रहा था. यहीं से लंबे समय तक चलने वाली बैटरी वाले फोन का आइडिया सामने आया. इसके बाद माइक्रोमैक्स ने ऐसे फोन पेश किए, जिनमें कम कीमत में लंबी बैटरी और ड्युअल-सिम जैसे फीचर्स मिलते थे. Canvas सीरीज ने कंपनी को स्मार्टफोन बाजार में और मजबूत किया.
Samsung को पछाड़कर बनी नंबर-1
माइक्रोमैक्स की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि 2014 में उसने भारतीय स्मार्टफोन बाजार में Samsung को पीछे छोड़ दिया. कंपनी की वैल्यूएशन भी करीब 21,000 करोड़ तक पहुंच गई थी. Hugh Jackman को ब्रांड एंबेसडर बनाना और बड़े आयोजनों में मार्केटिंग करना कंपनी की बढ़ती ताकत दिखाता था. लेकिन इसके बाद बाजार तेजी से बदलने लगा.
आखिर माइक्रोमैक्स क्यों खत्म हो गई?
Xiaomi, Vivo, Oppo और OnePlus जैसे ब्रांड्स ने भारतीय बाजार में आक्रामक तरीके से कदम रखा. इन कंपनियों के पास बेहतर तकनीक, मजबूत सप्लाई चेन और कम लागत में ज्यादा फीचर्स वाले फोन देने की क्षमता थी. माइक्रोमैक्स दूसरी तरफ रिसर्च और डेवलपमेंट में उतना निवेश नहीं कर सकी. वह बड़े स्तर पर खुद का मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम भी तैयार नहीं कर पाई. इसी बीच सॉफ्टवेयर, फोन की परफॉर्मेंस और आफ्टर-सेल्स सर्विस को लेकर भी यूजर्स का एक्सपीरियंस कमजोर हुआ.
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4G की रफ्तार भी नहीं पकड़ पाई कंपनी
माइक्रोमैक्स के लिए एक और बड़ा झटका 4G के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल से आया. Reliance Jio के आने के बाद भारतीय बाजार में 4G स्मार्टफोन की मांग तेजी से बढ़ी. उस समय कंपनी के कई फोन 2G और 3G नेटवर्क पर आधारित थे. जब तक माइक्रोमैक्स ने इस बदलाव के हिसाब से खुद को तैयार किया, तब तक Xiaomi, Vivo और Oppo जैसे ब्रांड बाजार में अपनी मजबूत जगह बना चुके थे. नतीजा यह हुआ कि 2019 के लास्ट तक माइक्रोमैक्स की बाजार हिस्सेदारी और वैल्यू में भारी गिरावट आ चुकी थी.
माइक्रोमैक्स की वापसी कोशिश का क्या असर हुआ?
2020 में माइक्रोमैक्स ने IN सीरीज के साथ वापसी की कोशिश की. Vocal for Local और आत्मनिर्भर भारत के माहौल में कंपनी ने भारतीय पहचान को अपनी वापसी का आधार बनाया, लेकिन तब तक यूजर्स की पसंद काफी बदल चुकी थी और विदेशी ब्रांड मजबूत सॉफ्टवेयर, बेहतर हार्डवेयर और व्यापक सर्विस नेटवर्क के साथ अपनी जगह बना चुके थे.
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