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एक ही iPhone, लेकिन अलग-अलग देशों में अलग कीमत! आखिर क्या है इसकी असली वजह?

iPhone Prices: अमेरिका में जो मॉडल जितनी कीमत में मिलता है उससे ज्यादा कीमत में वही मॉडल अन्य देशों में बिकता है.

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  • दुनियाभर में iPhone की कीमतें काफी अलग-अलग हैं।
  • मुख्यतः अलग-अलग देशों के टैक्स सिस्टम प्रमुख कारण।
  • विनिमय दर, आयात शुल्क भी iPhone कीमत बदलते।

iPhone Prices: Apple iPhone आज दुनियाभर में अपने बेहतरीन फीचर्स और स्टाइलिश डिजाइन के लिए जाना जाता है. भारत में इस फोन को एक स्टेटस सिंबल के तौर पर भी देखा जाता है. बता दें कि आईफोन की कीमत नॉर्मल एंड्रॉयड स्मार्टफोन के मुकाबले काफी ज्यादा होती है. ऐसे में अक्सर लोग अपने स्टेटस मेंटेन करने के लिए भी महंगा आईफोन खरीद लेते हैं. लेकिन कई बार ऐसी बातें सामने आती हैं कि भारत में आईफोन महंगा है और अन्य देशों में सस्ता. आइए जानते हैं कि अलग-अलग देशों में आईफोन की कीमत अलग क्यों होती है.

बाकी देशों में क्यों महंगे हैं iPhone?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Apple हर देश में iPhone की कीमत एक जैसी नहीं रखता है. बता दें कि अमेरिका में मिलने वाला iPhone कई देशों की तुलना में काफी सस्ता होता है. वहीं, यूरोप के कई देशों में तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा है. दूसरी ओर, जापान और कनाडा जैसे देशों में आईफोन की कीमत अमेरिका की कीमत के काफी करीब हैं.

अमेरिका में सस्ता मिलता है iPhone

अब कई लोगों को लगता है कि अमेरिका में भी आईफोन की कीमत ज्यादा है तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है. दरअसल, अमेरिका में जो मॉडल जितनी कीमत में मिलता है उससे ज्यादा कीमत में वही मॉडल अन्य देशों में बिकता है. उदाहरण के तौर पर बता दें कि अमेरिका में 256GB वाले iPhone 17 Pro की कीमत 1,099 डॉलर है. वहीं, इसी मॉडल की तुर्किये और ब्राजील जैसे देशों में कीमत इसकी दोगुनी है.

क्या अमेरिका से खरीदना चाहिए iPhone

बता दें कि अमेरिका में आपको आईफोन सस्ता जरुर मिल सकता है. यहां पर डिवाइस के कई सारे वेरिएंट्स भी मौजूद होते हैं जिसमें ई-सिम वाला काफी पॉपुलर है. लेकिन ई-सिम वाला मॉडल लेने से पहले ये जरुर चेक कर लें कि आपके देश में ये सुविधा मौजूद है या नहीं.

इसके अलावा आपको अमेरिका में आईफोन सस्ता तो मिल सकता है लेकिन वापस अपने देश आने पर आपको आयात शुल्क देना पड़ सकता है जो अंत में इसकी कीमत में बढ़ोतरी कर सकता है.

ये है सबसे बड़ी वजह

आईफोन के महंगे होने की सबसे बड़ी वजह टैक्स सिस्टम है. जी हां, दरअसल, अमेरिका में Apple जो कीमत शो करता है उसमें लोकल Sales Tax शामिल नहीं होता है. इसका मतलब है कि यूजर को फोन खरीदते समय अलग से स्टेट टैक्स भी देना पड़ता है.

वहीं, यूरोप और अन्य देशों की बात करें तो यहां पर आईफोन की जो कीमत होती है उसमें पहले से ही VAT (Value Added Tax) या फिर और भी लोकल टैक्स शामिल होते हैं. इसलिए वहां की कीमत पहली नजर में काफी ज्यादा दिखाई देती है. इसके अलावा हर देश का टैक्स रेट अलग-अलग होता है. यही वजह है कि अलग-अलग देशों में आईफोन की कीमत अलग होती है.

ये भी होते हैं कारण

बता दें कि सिर्फ टैक्स सिस्टम ही नहीं बल्कि कई सारे और भी कारण होते हैं जो आईफोन की अलग-अलग कीमत की वजह हैं. इसमें Exchange Rate में उतार-चढ़ाव से भी डिवाइस की कीमत पर असर पड़ता है. इसके अलावा अलग-अलग देशों में Import Duty के चलते ही फोन की कीमत बढ़ या घट सकती है. इतना ही नहीं, Apple का Profit Margin भी डिवाइस की कीमतों के बढ़ोतरी और कम होने की वजह बन सकते हैं. बता दें कि अगर किसी देश की करेंसी डॉलर के मुकाबले कमजोर होती है तो Apple अक्सर वहां कीमत बढ़ा देता है ताकि उसका मुनाफा प्रभावित न हो.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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