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फोन से लेकर लैपटॉप तक कुछ भी सेफ नहीं, 100 से ज्यादा देशों के पास हैं खतरनाक स्पाईवेयर

Spyware: इस समय दुनिया के 100 से अधिक देशों की सरकारों के पास स्पाईवेयर है. कुछ साल पहले तक 80 देशों के पास कमर्शियल स्पाईवेयर की एक्सेस थी. इससे सर्विलांस का खतरा बढ़ गया है.

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  • 100 से अधिक देशों के पास अब स्पाईवेयर, डेटा चोरी का खतरा बढ़ा.
  • अपराधियों से पत्रकारों, नेताओं तक, निशाना बनने वालों का दायरा फैला.
  • स्पाईवेयर डिवाइस में घुसकर डेटा चुराते, कैमरा-माइक्रोफोन भी कर सकते हैं ऑन.
  • सॉफ्टवेयर अपडेट, अनजान लिंक से दूरी, ऐप्स सोच-समझकर डाउनलोड करें.

Spyware: पिछले कुछ सालों से सरकारों में स्पाईवेयर खरीदने का ट्रेंड बढ़ा है. यूके नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर की एक रिपोर्ट बताती है कि इस समय दुनिया के 100 से अधिक देशों के पास ऐसे स्पाईवेयर टूल्स मौजूद हैं, जो स्मार्टफोन और लैपटॉप आदि में घुसकर सेंसेटिव डेटा और इंफोर्मेशन चुरा सकते हैं. कुछ साल पहले तक ऐसे देशों की संख्या करीब 80 थी, जो पिछले कुछ सालों में बढ़कर 100 हो गई है. यह दिखाता है कि किसी भी डिवाइस की एक्सेस लेने का सरकारों की तकनीकी बाध्यता अब दूर होते जा रही है.

लगातार बढ़ता जा रहा है स्पाईवेयर का यूज

एक समय तक केवल कुछ इंटेलीजेंस एजेंसियों के पास स्पाईवेयर की एक्सेस होती थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ गया है. आमतौर पर अपराधियों और आतंकवादियों को ट्रैक करने के लिए इस तरह के स्पाईवेयर का यूज होता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से स्पाईवेयर के जरिए पत्रकारों, एक्टिविस्ट्स और विपक्षी नेताओं आदि को भी इससे निशाना बनाया जाेन लगा है. कुछ समय पहले तक पेगासस स्पाईवेयर का मामला गर्माया हुआ था. भारत समेत दुनिया के कई देशों के लोगों के फोन में इसे गैरकानूनी तरीके से इंस्टॉल करने का आरोप लगा था. 

क्या होते हैं स्पाईवेयर?

स्पाईवेयर एक तरह का मालवेयर होता है, जो किसी डिवाइस में घुसकर डेटा और इंफोर्मेशन को चुरा सकता है. साथ ही यह यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटीज को भी ट्रैक कर सकता है. कई स्पाईवेयर आपके डिवाइस के कैमरा और माइक्रोफोन को सीक्रेटली ऑन कर यूजर को देख और रिकॉर्ड कर सकते हैं. स्पाईवेयर एक तरह के वर्चुअल स्टॉकर होते हैं, जो आपकी हर डिजिटल एक्टिविटी पर नजर रखते हैं. इन्हें मिस्कॉल से लेकर किसी फर्जी ऐप के जरिए तक फोन में इंस्टॉल किया जा सकता है. कई स्पाईवेयर इतने एडवांस होते हैं कि डिवाइस में इंस्टॉल होने के बावजूद यूजर को पता नहीं लगने देते. 

डिवाइस में मालवेयर होने का कैसे पता चलता है?

  • डिवाइस की स्पीड स्लो हो जाती है और यह बार-बार क्रैश होने लगता है. 
  • डिवाइस पर बार-बार पॉप-अप आने लगते हैं.
  • वेब सर्च करने पर यूजर को किसी और ही सर्च इंजन पर रिडायरेक्ट कर दिया जाता है. 
  • ऐप्स को यूज करने पर रैंडम एरर मैसेज आने लगते हैं.

क्या हैं मालवेयर से बचाव के तरीके?

  • फोन के सॉफ्टवेयर और ऐप्स को अपडेटेड रखें.
  • अनजान नंबर से मैसेज या ईमेल में आए लिंक को ओपन न करें.
  • सोशल मीडिया पर दिखने वाले लुभावने विज्ञापनों पर क्लिक न करें.
  • इंटरनेट पर अनजान लोगों के साथ बातचीत करने से बचें.
  • हमेशा ऐप स्टोर और प्ले स्टोर जैसे भरोसेमंद सोर्स से ऐप्स डाउनलोड करें.

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