AI से बीमारियों का इलाज ढूंढना चाहते हैं मार्क जुकरबर्ग, अपनी पत्नी के साथ मिलकर खेला नया दांव
Mark Zuckerberg AI Initiative: मार्क जुकरबर्ग ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक बड़ा दांव खेला है. उन्होंने एआई के जरिए बीमारियों का इलाज ढूंढने के काम के लिए 500 मिलियन डॉलर निवेश किए हैं.

- मेटा के मार्क जुकरबर्ग ने एआई पर बड़ा दांव खेला है।
- बायोलॉजी इनीशिएटिव पर 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया है।
- एआई से इंसानी सेल्स के डिजिटल मॉडल बनाए जाएंगे।
- बीमारियों के इलाज और रोकथाम पर शोध तेज होगा।
Mark Zuckerberg AI Initiative: मेटा के सीईओ Mark Zuckerberg ने एक बार फिर एआई पर बड़ा दांव खेला है, लेकिन इस बार यह किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या मेटावर्स पर न होकर एक बायोलॉजी इनीशिएटिव पर है. जुकरबर्ग ने अपनी पत्नी Priscilla Chan के Biohub के एक प्रोजेक्ट पर भारी निवेश किया है. इस प्रोजेक्ट में एआई की मदद से यह समझने की कोशिश की जाएगी कि इंसानी सेल्स कैसे काम करती हैं. अगर इसमें कामयाबी मिलती है तो बीमारियों का इलाज ढूंढना आसान हो जाएगा. आइए जानते हैं कि यह प्रोजेक्ट कितने समय चलेगा और इससे क्या हासिल करने की कोशिश की जा रही है.
500 मिलियन डॉलर का निवेश
इस प्रोजेक्ट का नाम Virtual Biology Initiative रखा गया है और यह अगले पांच सालों तक चलेगा. मेटा ने इसके लिए 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया है. इस पैसे से ऐसे एआई सिस्टम बनाए जाएंगे, जो इंसानी सेल्स की तरह का करेंगे. बायोलॉजिकल डेटा को यूज कर सेल्स के डिजिटल मॉडल बनाए जाएंगे. इसका फायदा यह होगा कि वैज्ञानिक लैब की जगह इन पर वर्चुअल तरीके से काम कर सकेंगे. इससे उन्हें सेल्स के काम करने का तरीका समझने में मदद मिलेगी, जिससे बीमारियों की रोकथाम या इलाज पर काम शुरू हो पाएगा.
तेज होगी एक्सपेरिमेंट की स्पीड
अभी बायोलॉजी के काम की रफ्तार बहुत धीमी है. अब एआई की मदद से वैज्ञानिक पहले सिमुलेशन रन कर अपने आईडियाज को टेस्ट कर पाएंगे. फिर एआई से उस प्रोजेक्ट के रिजल्ट का अंदाजा लग सकता है. इसके बाद का बाकी काम लैब में हो सकता है. अगर यह तरीका सफल रहता है तो बीमारियों पर रिसर्च का काम रफ्तार पकड़ सकता है. Biohub का कहना है कि वह इस प्रयास में अपनी कंप्यूटिंग पावर, एडवांस इमेजिंग टेक्नोलॉजी और नए टूल्स को यूज करेगी. इस एक्सपेरिमेंट के दौरान जनरेट होने वाले डेटा को ओपन रखा जाएगा और इसे दुनियाभर के वैज्ञानिकों को फ्री में उपलब्ध करवाया जाएगा.
बीमारियों की रोकथाम में मिल सकती है मदद
Biohub के इस प्रोजेक्ट में वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि स्वस्थ और बीमार इंसान की सेल्स कैसे काम करती हैं. अगर इसमें कामयाबी मिलती है तो यह पता लगाना आसान हो जाएगा कि बीमारी की शुरुआत कैसे होती है, बीमारी बढ़ती कैसे है और इसे ठीक कैसे किया जा सकता है. हालांकि, इसमें कई चुनौतियां आएंगी और कंपनी ने भी यह बात स्वीकार की है. कंपनी का कहना है कि इसके लिए बहुत डेटा और नई टेक्नोलॉजी की जरूरत पड़ेगी.
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Source: IOCL


























