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Android में बड़ा बदलाव करने जा रहा Google! आपका स्मार्टफोन होगा पहले से तेज और चलेगा ज्यादा समय

Android Smartphone: स्मार्टफोन की स्पीड और बैटरी लाइफ को बेहतर बनाने के लिए Google अब Android सिस्टम में एक अहम बदलाव करने की तैयारी कर रहा है.

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  • Google Android कर्नेल को बेहतर बनाने के लिए AutoFDO पेश कर रहा है।
  • यह नई तकनीक असली इस्तेमाल डेटा से प्रदर्शन को ऑप्टिमाइज़ करती है।
  • स्मार्टफोन बूट समय और ऐप लॉन्च स्पीड में सुधार देखा गया है।
  • भविष्य के Android वर्ज़न में स्मूथ मल्टीटास्किंग और तेज परफॉरमेंस मिलेगी।

Android Smartphone: स्मार्टफोन की स्पीड और बैटरी लाइफ को बेहतर बनाने के लिए Google अब Android सिस्टम में एक अहम बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. कंपनी ने Android के कोर सिस्टम यानी कर्नेल को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए एक नई तकनीक पेश की है जिसे Automatic Feedback‑Directed Optimisation (AutoFDO) कहा जाता है. इस नई तकनीक का उद्देश्य Android फोन की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाना, ऐप्स को जल्दी खोलना और बैटरी की खपत को कम करना है.

Android Kernel में सुधार पर Google का फोकस

दरअसल Android का कर्नेल स्मार्टफोन के हार्डवेयर, प्रोसेसर और ऐप्स के बीच एक कड़ी की तरह काम करता है. यही सिस्टम यह तय करता है कि फोन का प्रोसेसर किस काम में कितना इस्तेमाल होगा. जानकारी के मुताबिक किसी भी Android फोन के कुल CPU समय का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कर्नेल मैनेज करता है. ऐसे में अगर इसमें थोड़ा भी सुधार किया जाए तो फोन की कुल स्पीड और स्मूदनेस पर बड़ा असर पड़ सकता है. इसी वजह से Google अब इस हिस्से को ज्यादा स्मार्ट तरीके से ऑप्टिमाइज़ करने पर काम कर रहा है.

असली इस्तेमाल के डेटा से होगा ऑप्टिमाइजेशन

नई AutoFDO तकनीक की खासियत यह है कि यह केवल अनुमान के आधार पर काम नहीं करती. इसके लिए लैब में ऐसे टेस्ट किए जाते हैं जिनमें लोकप्रिय Android ऐप्स का इस्तेमाल बिल्कुल उसी तरह किया जाता है जैसे लोग रोजमर्रा में करते हैं. इन टेस्ट के दौरान खास टूल्स यह रिकॉर्ड करते हैं कि सिस्टम के कौन-कौन से हिस्से सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं. टेक्निकल भाषा में इन्हें हॉट कोड पाथ कहा जाता है. बाद में यही जानकारी कर्नेल को दोबारा तैयार करते समय इस्तेमाल की जाती है ताकि सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले हिस्सों को पहले ऑप्टिमाइज किया जा सके.

पुराने तरीके से कैसे अलग है नई तकनीक

पारंपरिक तरीके से कर्नेल तैयार करते समय डेवलपर्स आमतौर पर यह मानकर चलते हैं कि सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किस तरह होगा. लेकिन AutoFDO इस अनुमान को खत्म कर देता है और असली उपयोग के आंकड़ों के आधार पर कोड को व्यवस्थित करता है. इससे कंपाइलर बेहतर फैसले ले पाता है और सिस्टम के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले हिस्से ज्यादा तेज और कुशल तरीके से काम करने लगते हैं.

शुरुआती टेस्ट में दिखा बेहतर प्रदर्शन

Google के शुरुआती परीक्षणों में इस तकनीक से सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं. कंपनी के मुताबिक स्मार्टफोन के बूट होने का समय करीब 2.1 प्रतिशत तक कम हुआ है. वहीं फोन में पहली बार ऐप खोलने की स्पीड यानी कोल्ड ऐप लॉन्च में लगभग 4.3 प्रतिशत तक सुधार देखा गया है. इसके अलावा सिस्टम की कुल परफॉर्मेंस से जुड़े कई अन्य पैमानों में भी बेहतर परिणाम मिले हैं.

आने वाले Android वर्ज़न में मिलेगा फायदा

Google इस नई तकनीक को Android के नए कर्नेल वर्ज़न में लागू कर रहा है, जिनमें android16-6.12 और android15-6.6 जैसी ब्रांच शामिल हैं. आगे चलकर इसे आने वाले वर्जन जैसे android17-6.18 में भी शामिल करने की योजना है. कर्नेल स्तर पर किए जा रहे इस बदलाव की वजह से आने वाले समय में Android स्मार्टफोन में ऐप्स पहले से ज्यादा तेजी से खुलेंगे, मल्टीटास्किंग स्मूद होगी और फोन की कुल परफॉर्मेंस ज्यादा रिस्पॉन्सिव महसूस होगी.

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