Paperless Airport Entry: एयरपोर्ट पर अब पासपोर्ट दिखाने की जरूरत नहीं, क्या है नई तकनीक, कैसे करेगी काम?
Paperless Airport Entry: अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए शुरू हुआ डिजी यात्रा का ट्रायल, फेशियल रिकग्निशन तकनीक से चेहरा ही बनेगा आपका बोर्डिंग पास, एयरपोर्ट एंट्री और सिक्योरिटी चेक पर मिलेगी बड़ी राहत

Paperless Airport Entry: हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है. अब देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर एंट्री करने से लेकर विमान में सवार होने तक आपको बार-बार जेब से पासपोर्ट या बोर्डिंग पास निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी. नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डिजी यात्रा फाउंडेशन मिलकर डोमेस्टिक यात्रियों के बाद अब इंटरनेशनल उड़ानों के लिए भी इस खास ई-गेट तकनीक का विस्तार कर रहे हैं. इस नई व्यवस्था के तहत आपका चेहरा ही आपका सबसे बड़ा पहचान पत्र और बोर्डिंग पास बन जाएगा.
क्या है यह नई तकनीक और कैसे करती है काम?
एयरपोर्ट पर बिना कागजात के सफर कराने वाली इस आधुनिक तकनीक को डिजी यात्रा कहा जाता है. यह पूरी व्यवस्था फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी यानी चेहरा पहचानने वाली तकनीक पर आधारित है. अब तक इस सुविधा का लाभ केवल घरेलू उड़ानों के लिए मिल रहा था, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए भी इसके ट्रायल शुरू किए जा रहे हैं.
इस तकनीक के काम करने का तरीका बेहद आसान है. एयरपोर्ट के एंट्री गेट, सिक्योरिटी चेकपॉइंट और बोर्डिंग गेट पर विशेष प्रकार के बायोमेट्रिक ई-गेट्स लगाए गए हैं. इन गेट्स पर हाई-टेक कैमरे लगे होते हैं. जैसे ही कोई यात्री इन गेट्स के पास पहुंचता है, कैमरा उसके चेहरे को स्कैन करता है. चेहरे का मिलान सिस्टम में मौजूद डेटा से होते ही ई-गेट अपने आप खुल जाता है और यात्री को आगे जाने की अनुमति मिल जाती है.
सफर के दौरान कैसे करें इस तकनीक का इस्तेमाल?
अंतरराष्ट्रीय हवाई सफर के दौरान इस पेपरलेस और कॉन्टैक्टलेस सेवा का लाभ उठाने के लिए यात्रियों को कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे. सबसे पहले अपने मोबाइल में डिजी यात्रा ऐप डाउनलोड करना होगा. इसके बाद ऐप पर अपना आधार कार्ड या पासपोर्ट नंबर दर्ज कर अकाउंट बनाना होगा.
अकाउंट बनने के बाद यात्री को ऐप के जरिए अपना एक साफ सेल्फी अपलोड करना होगा. इसके बाद जब भी आप कोई इंटरनेशनल फ्लाइट बुक करेंगे, तो यात्रा से कुछ घंटे पहले अपना बोर्डिंग पास और पासपोर्ट की डिजिटल कॉपी इस ऐप पर शेयर करनी होगी. एयरपोर्ट पर पहुंचते ही आपको सिर्फ ई-गेट के कैमरे के सामने देखना होगा और आपका वेरिफिकेशन पलक झपकते ही हो जाएगा.
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यात्रियों को क्या होगा बड़ा फायदा?
इस नई तकनीक के लागू होने से यात्रियों का सबसे कीमती समय बचेगा. आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यात्रियों को चेक-इन, इमिग्रेशन और सुरक्षा जांच के लिए लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था, जिसमें घंटों बर्बाद होते थे. इस डिजिटल सिस्टम के आने से गेट पर वेरिफिकेशन का काम महज कुछ सेकंड्स में पूरा हो जाएगा, जिससे एयरपोर्ट पर लगने वाली भीड़ से पूरी तरह निजात मिलेगी.
सुरक्षा के लिहाज से भी यह सिस्टम बेहद मजबूत है, क्योंकि फेशियल रिकग्निशन तकनीक में किसी भी तरह की धोखाधड़ी या फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल की गुंजाइश न के बराबर होती है. सबसे बड़ी बात यह है कि यात्रियों के डेटा की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है; यह डेटा पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड होता है और यात्रा पूरी होने के 24 घंटे के भीतर सिस्टम से अपने आप डिलीट हो जाता है.
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