पश्चिमी यूपी की ये दो सीटें... जहां महिला प्रत्याशी नहीं खोल पाई अपना खाता
पश्चिमी यूपी की दो सीटें बागपत और सहारनपुर का इतिहास कुछ और ही कहता है। आजादी के लगभग सात दशक बाद भी इन दोनों सीटों पर कोई भी महिला प्रत्याशी संसद की दहलीज तक नहीं पहुंच पाई हैं।

मेरठ, एबीपी गंगा। वैसे तो देश की कई महिला नेताओं को जनता ने संसद पहुंचाया है, लेकिन पश्चिमी यूपी की दो सीटें बागपत और सहारनपुर का इतिहास कुछ और ही कहता है। आजादी के लगभग सात दशक बाद भी इन दोनों सीटों पर कोई भी महिला प्रत्याशी संसद की दहलीज तक नहीं पहुंच पाई हैं। हालांकि पश्चिमी यूपी की ही कैराना और बिजनौर सीट के मतदाताओं ने कई बार महिला प्रत्याशियों पर भरोसा जताकर उन्हें चुनाव में जीत दिलाई है।
कैराना से मौजूदा सांसद भी महिला तबस्सुम हसन हैं। कैराना की जनता ने पहली बार 2004 में महिला प्रत्याशी अनुराधा चौधरी को जीताकर संसद भेजा था। इसके बाद फिर 2009 में भी तबस्सुम हसन चुनाव जीती थीं। 2014 में भाजपा के हुकुम सिंह ने तबस्सुम को मात दे दी। हालांकि हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में तबस्सुम ने फिर अपना परचम लहराया। सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने इस बार फइर तबस्सुम हसन पर अपना दांव चला है।
बिजनौर में भी महिला प्रत्याशियों ने चखा जीत का स्वाद बिजनौर सीट पर पहली बार 1985 में किसी महिला प्रत्याशी ने अपनी जात का खाता खोला था। उस समय कांग्रेस की मीरा कुमार ने यहां से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1989 में बसपा प्रमुख मायावती और फिर 1998 में सपा की ओमवती ने जीत दर्ज की। वहीं मेरठ सीट पर 1980 और 1984 में कांगेस की मोहसिना किदवई यहां से जीतकर संसद पहुंची थीं।






















