'जिद नहीं करनी चाहिए', चारधाम में गैर-हिंदुओं पर रोक के समर्थन में आया वक्फ बोर्ड
Uttarakhand News: उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने जोर देकर कहा कि यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि आस्था और धार्मिक परंपराओं की रक्षा का विषय है.

उत्तराखंड के केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को लेकर चल रही बहस के बीच अब इस मुद्दे पर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स का बयान सामने आया है. उन्होंने बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) और चारधाम के पुरोहितों की मांग का समर्थन करते हुए इसे देवभूमि की आस्था और सुरक्षा से जुड़ा विषय बताया है.
शादाब शम्स ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और इसके देवत्व की रक्षा आवश्यक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों की आस्था मां गंगा, मां यमुना, बाबा केदार और बद्री विशाल में नहीं है, उन्हें धार्मिक स्थलों में आने की जिद नहीं करनी चाहिए. जिनकी आस्था है, वे किसी भी धर्म के हों, उनका स्वागत है. उन्होंने कहा कि “जो आस्था के साथ ‘हर हर महादेव’ और ‘हर हर गंगे’ का उद्घोष करते हुए आएं, उनका मोस्ट वेलकम हैं.”
उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों की आस्था नहीं है और जो धार्मिक स्थलों पर विघ्न फैलाने का प्रयास करते हैं, उनके लिए सख्ती जरूरी है. आज के समय में धार्मिक आयोजनों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को लगातार इनपुट मिलते रहते हैं, ऐसे में आस्था और व्यवस्था दोनों की सुरक्षा अहम है.
मक्का का उदाहरण देते हुए शादाब शम्स ने कहा कि जैसे सऊदी अरब में मक्का में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है और इससे आपसी सौहार्द प्रभावित नहीं होता, उसी तरह यदि चारधाम में आस्था के आधार पर नियम बनाए जाते हैं तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि “अगर किसी आयोजन या अनुष्ठान में मेरी मौजूदगी से किसी को असहजता होती है, तो मुझे वहां नहीं जाना चाहिए.”
शादाब शम्स ने जोर देकर कहा कि यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि आस्था और धार्मिक परंपराओं की रक्षा का विषय है. देवभूमि उत्तराखंड में आस्था रखने वालों का हमेशा दिल खोलकर स्वागत किया गया है और आगे भी किया जाता रहेगा. चारधाम में आस्था के अनुरूप नियम लागू करने के किसी भी निर्णय का उन्होंने दिल से स्वागत किया.
























