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UCC लागू होने के बाद उत्तराखंड में इन बच्चों को भी मिलेगा संपत्ति का अधिकार, बना ये नियम

UCC का सबसे बड़ा प्रावधान यह है कि अवैध विवाह से जन्म लेने वाली संतान को संपत्ति में अधिकार दिया जाएगा. यदि किसी विवाह को अमान्य या रद्द घोषित किया जाता है, तो भी उससे जन्मी संतान को वैध माना जाएगा.

UCC In Uttarakhand: समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने के साथ ही विवाह संबंधी नियम और अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए हैं. अब अवैध शादी से जन्मी संतानों को भी संपत्ति में अधिकार मिलेगा. हालांकि, यूसीसी में विवाह की वैधता सुनिश्चित करने के लिए कुछ मुख्य मानकों को लागू किया गया है. यदि ये मानक पूरे नहीं होते, तो विवाह को अमान्य या रद्द घोषित किया जा सकता है. इस व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करते हुए विवाह के कानूनी दायरे को स्पष्ट करना है.

शासन ने स्पष्ट किया है कि विवाह समारोहों में परंपरागत रस्मों और धार्मिक रीति-रिवाजों का पूरा सम्मान किया जाएगा. विवाह उसी प्रकार से संपन्न किए जा सकेंगे, जैसे अब तक होते आए हैं. इनमें सप्तपदी, निकाह, आशीर्वाद, होली यूनियन, और आनंद विवाह अधिनियम 1909 के तहत आनंद कारज शामिल हैं. इसके अलावा, विशेष विवाह अधिनियम 1954 और आर्य विवाह मान्यकरण अधिनियम 1937 के अंतर्गत होने वाले विवाह भी पूरी तरह मान्य होंगे.हालांकि, यह अनिवार्य होगा कि विवाह के लिए यूसीसी के बुनियादी कानूनी मानकों का पालन किया जाए. इनमें शादी के समय पति-पत्नी की न्यूनतम आयु, मानसिक और शारीरिक क्षमता, और पहले से जीवित जीवनसाथी का न होना शामिल है.

संतानों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना 
यूसीसी का सबसे बड़ा प्रावधान यह है कि अवैध विवाह से जन्म लेने वाली संतान को संपत्ति में अधिकार दिया जाएगा. यदि किसी विवाह को अमान्य या रद्द घोषित किया जाता है, तो भी उससे जन्मी संतान को वैध माना जाएगा. यह प्रावधान संतानों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और उन्हें किसी भी प्रकार के कानूनी भेदभाव से बचाता है.

यूसीसी के तहत कुछ कानूनी शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिनका उल्लंघन होने पर विवाह को अमान्य या रद्द किया जा सकता है. विवाह अमान्य होने के मुख्य आधार

  • पहले से जीवित जीवनसाथी:  यदि किसी पक्षकार का विवाह के समय पहले से कोई जीवनसाथी जीवित है.
  • मनोवैधानिक असमर्थता: यदि विवाह के समय किसी पक्षकार को वैध सहमति देने में मानसिक अक्षमता है.
  • निषिद्ध संबंध यदि विवाह निषिद्ध संबंधों के दायरे में आता है.
  • विवाह के किसी भी पक्षकार द्वारा अदालत में याचिका दायर की जा सकती है.
  • अदालत मामले की सुनवाई के बाद विवाह को शून्य घोषित कर सकती है.
  • विवाह रद्द होने पर भी उससे जन्मी संतानों को वैधता और संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा.

सभी धर्मों और संप्रदायों के लोगों को समान अधिकार 
यूसीसी का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड में सभी धर्मों और संप्रदायों के लोगों को समान अधिकार प्रदान करना है. शासन ने यह सुनिश्चित किया है कि विवाह से जुड़े सभी धार्मिक और प्रथागत रीति-रिवाजों का सम्मान किया जाएगा. साथ ही, विवाह के मूलभूत कानूनी मानकों का पालन भी सुनिश्चित होगा. यह प्रावधान राज्य की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए विवाह प्रक्रिया को कानून के दायरे में लाने का प्रयास है.

यूसीसी के अनुसार, विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा.

  • पंजीकरण की प्रक्रिया: विवाह की तिथि से 60 दिनों के भीतर पंजीकरण किया जाएगा.
  • तत्काल पंजीकरण: विदेश यात्रा जैसे मामलों में तीन दिनों के भीतर पंजीकरण की सुविधा मिलेगी.
  • पंजीकरण प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की जा सकेगी.

उत्तराखंड से बाहर रहने वाले निवासियों पर भी लागू यूसीसी
यूसीसी (Uniform Civil Code) पूरे उत्तराखंड में और उत्तराखंड के निवासियों पर लागू होगा, चाहे वे राज्य के बाहर ही क्यों न रहते हों. हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 342 और 366(25) के तहत अनुसूचित जनजातियों और संरक्षित प्रथागत अधिकारों वाले समूहों पर यह लागू नहीं होगा. प्रदेश में यूसीसी के लागू होने से कानूनी प्रक्रिया में आसानी आएगी.

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विवाह, तलाक और संपत्ति से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट और कानूनी दायरे में लाने का एक बड़ा कदम है. अवैध विवाह से जन्मी संतानों को संपत्ति में अधिकार देकर यह अधिनियम समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास करता है. साथ ही, यह धार्मिक परंपराओं और कानूनी प्रावधानों के बीच संतुलन बनाने का एक प्रयास है, जो राज्य के लोगों की सांस्कृतिक विविधता और अधिकारों की रक्षा करेगा.

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