उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स के बयान पर भड़के जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, माफी की मांग
शादाब शम्स के इस बयान की समाज में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है. कई मुस्लिम संगठनों ने उनके बयान को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए उनकी आलोचना की है.

जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आजाद अली ने उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स के हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने शादाब शम्स से सार्वजनिक माफी की मांग की है और कहा कि वह भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं तथा अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते समुदाय की भावनाओं को आहत कर रहे हैं.
आजाद अली ने कहा कि शादाब शम्स का यह दावा कि वह भाजपा की कृपा से वक्फ बोर्ड अध्यक्ष बने हैं, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अपमानजनक है. उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड एक मुस्लिम धार्मिक संस्था है और इसका नेतृत्व कौन करेगा, यह तय करने का अधिकार केवल मुस्लिम समुदाय को है, न कि किसी राजनीतिक दल को.
आजाद अली ने शादाब शम्स पर आरोप लगाया कि वह भाजपा को खुश करने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं जो न सिर्फ गैरजिम्मेदाराना हैं, बल्कि मुस्लिम समाज की भावना के भी खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि अगर शादाब शम्स को वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष बने रहना है, तो उन्हें यह साबित करना होगा कि वह मुस्लिम समुदाय के हित में काम कर रहे हैं, न कि किसी पार्टी विशेष के लिए.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा मुस्लिम नेताओं को सिर्फ मोहरा बनाकर इस्तेमाल करती है और जब उनका काम खत्म हो जाता है तो उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है. आजाद अली ने कहा कि शादाब शम्स जैसे नेता भाजपा की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं और उनकी यह नीति समाज को बांटने वाली है.
पत्रकारों से बातचीत में आजाद अली ने कहा, “वक्फ की संपत्ति और प्रतिष्ठा पूरे मुस्लिम समाज की धरोहर है. भाजपा के इशारे पर चलकर शादाब शम्स इस धरोहर को राजनीति का माध्यम बना रहे हैं. उन्हें समझना चाहिए कि वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारी कोई राजनैतिक पद नहीं, बल्कि एक सामाजिक और धार्मिक दायित्व है.”
शादाब शम्स के इस बयान की समाज में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है. कई मुस्लिम संगठनों ने उनके बयान को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए उनकी आलोचना की है.
जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष आजाद अली ने अंत में स्पष्ट किया कि अगर शादाब शम्स ने जल्द ही सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी तो वे उनके खिलाफ कानूनी और सामाजिक स्तर पर विरोध दर्ज कराएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज को एकजुट होकर ऐसे लोगों का विरोध करना चाहिए जो उनकी भावनाओं और संस्थाओं का राजनीतिक उपयोग कर रहे हैं.
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