अंग्रेजी नहीं जानने वाले अधिकारी पर हाई कोर्ट ने उठाए सवाल, राज्य चुनाव आयुक्त और मुख्य सचिव तलब
Uttarakhand: हाईकोर्ट ने सवाल किया कि क्या एडीएम स्तर का अधिकारी, जिसे अंग्रेजी बोलने का कोई ज्ञान नहीं है वो एक कार्यकारी पद को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने की स्थिति में हो सकता है?

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अंग्रेजी नहीं जानने वाले अधिकारियों पर प्रश्नचिन्ह लगाए हैं. कोर्ट ने बुधलाकोट ग्राम सभा में क्षेत्र से बाहरी लोगों का नाम पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट में शामिल करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये बात कही.
पंचायती चुनाव संबंधी याचिकाओं को सुनते हुए मुख्य न्यायधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खण्डपीठ राज्य चुनाव आयुक्त और मुख्य सचिव से पूछा कि क्या एडीएम स्तर का अधिकारी, जिसे अंग्रेजी बोलने का कोई ज्ञान नहीं है वो एक कार्यकारी पद को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने की स्थिति में हो सकता है?
हाईकोर्ट ने अंग्रेजी नहीं जानने पर किया सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जब ये सवाल किया तो उस समय मामले की सुनवाई के दौरान एडीएम विवेक राय और एसडीएम कैंचीं मोनिका व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहीं. कोर्ट ने ये बात तब कही जब पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट में बाहरी के नाम शामिल करने की याचिका पर सुनवाई हो रही थी.
हाईकोर्ट ने 28 जुलाई को राज्य चुनाव आयुक्त और मुख्य सचिव को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होने को कहा है. याचिकाकर्ता बुधलाकोट निवासी आकाश बोरा ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि उनके ग्राम की वोटर लिस्ट में 82 वोटर क्षेत्र से बाहरी लोगों के नाम शामिल किये गए है.
वोटर लिस्ट में बाहरी नाम शामिल करने का मामला
इन लोगों में अधिकतर लोग उड़ीसा राज्य व अन्य जगह के है. जब इसकी शिकायत उनके द्वारा एसडीएम महोदय से की गई तो उनके द्वारा इसमे एक जांच कमेटी गठित की गई. जांच कमेटी ने वोटर लिस्ट का अवलोकन करके पाया कि इसमें से 18 लोग बाहर के है लेकिन, अंतिम लिस्ट जारी होने के बाद भी चिन्हित 18 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाये गए.
जनहित याचिका दायर करने के बाद उनके द्वारा ऐसे ही 30 अन्य की लिस्ट भी कोर्ट में पेश की गई. शिकायत करने के बाद भी जिसपर कोई कार्यवाही नही की गई. हुई सुनवाई के बाद आयोग की तरफ से कहा गया कि कुछ लोगों को चिन्हित किया गया है. उसी के आधार पर वोटर लिस्ट बनाई.
कोर्ट ने आयोग से पूछे ये सवाल
कोर्ट ने आयोग से पूछा कि जब वोटर लिस्ट बनाई गई क्या वोटरों का उस वक्त आधार कार्ड वोटर आईडी या राशन कार्ड या स्थायी निवास से सम्बंधित दस्तावेजों की जांच की. अगर की है तो उसका रिकॉर्ड प्रस्तुत करें या ओरली तौर पर नाम बताए जाने के आधार पर उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर दिया.
इनपुट- कमल जगाती
कांवड़िये के पैर दबाते महिला पुलिस अधिकारी की अखिलेश यादव ने की तारीफ, कहा- 'सेवा का भाव अच्छा है..'



















