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उत्तराखंड में मत्स्य पालन को डिजिटल बढ़ावा, CBDC से जुड़ी देश की पहली फिशरीज योजना लॉन्च
Dehradun News: उत्तराखंड के मत्स्य पालकों को केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने CBDC के माध्यम से फिशरीज योजना को लागू किया है.

सौरभ बहुगुणा, मत्स्य पालन मंत्री (फाइल फोटो)
Source : Facebook/Saurabh Bahuguna
मत्स्य पालकों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के सीधे तौर से जोड़े जाने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार ने CBDC के माध्यम से फिशरीज योजना को लागू किया है. इस योजना के लागू होने के साथ ही उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी के नाम से इस तरह की योजना को लागू किया है.
CBDC के माध्यम से फिशरीज योजना लागू करने का निर्णय न केवल राज्य की डिजिटल क्रांति को गति देगा, बल्कि सीधे लाभार्थियों तक सहायता पहुँचाने, पारदर्शिता बढ़ाने और दखलअंदाजी व सब्सिडी लीक रोकने के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण साबित होगा.
CBDC के माध्यम से फिशरीज योजना लागू करने का निर्णय न केवल राज्य की डिजिटल क्रांति को गति देगा, बल्कि सीधे लाभार्थियों तक सहायता पहुँचाने, पारदर्शिता बढ़ाने और दखलअंदाजी व सब्सिडी लीक रोकने के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण साबित होगा.
क्या है CBDC
सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) राष्ट्रीय मुद्रा का डिजिटल रूप है, जिसे रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) नियंत्रित करता है. यह पारंपरिक बैंक नोटों का वैकल्पिक डिजिटल माध्यम है यह m केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किया जाता है तथा वैधानिक भुगतान के रूप में मान्य होता है. CBDC का उपयोग सीधे लाभार्थियों के वॉलेट में भुगतान भेजने, सरकारी अनुदान और सब्सिडी की त्वरित डिलीवरी तथा लेन-देन रिकॉर्ड को सटीक रखने में सहायक हो सकता है.
मत्स्य पालन मंत्री ने योजना को बताया ऐतिहासिक
मत्स्य पालन मंत्री सौरव बहुगुणा ने इस दौरान जानकारी देते हुए बताया कि, राज्य सरकार पिछले चार वर्षों से प्रयास कर रही थी कि किस तरह मत्स्य पालकों को बिना किसी बिचौलिए की दखलंदाजी के बाद सीधे तौर पर राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं से जोड़ा जा सके.
उन्होंने कहा कि, इसके तहत यह योजना बेहद कारगर साबित होगी. इस योजना के तहत मत्स्य पालकों को दी जाने वाली भुगतान राशि सीधे रूप से उनके खातों में पहुंच जाएगी. इससे भुगतान में पारदर्शिता बनी रहेगी, जिससे बीमा भुगतान और राहत राशि को शीघ्रता से वितरित किया जा सकेगा.
उन्होंने कहा कि, इसके तहत यह योजना बेहद कारगर साबित होगी. इस योजना के तहत मत्स्य पालकों को दी जाने वाली भुगतान राशि सीधे रूप से उनके खातों में पहुंच जाएगी. इससे भुगतान में पारदर्शिता बनी रहेगी, जिससे बीमा भुगतान और राहत राशि को शीघ्रता से वितरित किया जा सकेगा.
उत्तराखंड देश के लिए पेश कर सकता है नजीर
उत्तराखंड सरकार की यह पहल कई मायनों में प्रगतिशीलता से भरी है. जहाँ डिजिटल भुगतान के माध्यम से लाभार्थियों तक सीधे भुगतान पहुंचेगा तो वहीं इस योजना से भ्रष्टाचार पर भी प्रहार देखने को मिल सकता है गौरतलब है कि यदि राज्य सरकार के अनुरूप यह योजना धराताल पर उतरती है, तो उत्तराखंड की यह पहल देशव्यापी डिजिटल वित्तीय समावेशन के मार्ग में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है.
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Source: IOCL


























