Russia Ukraine War: यूक्रेन से लौटे कौशांबी के छात्र ने सुनाई आपबीती, कहा- हम जहां फंसे वहीं हुए सबसे ज्यादा हमले
Kaushambi News: यूपी के कौशांबी के सैनी कोतवाली अंतर्गत चक सैदराजे का रहने वाला प्रमोद यादव यूक्रेन और रूस की लड़ाई में फंस गया था. बीती रात को वह अपने घर शकुशल पहुंचा.

UP News: यूपी के कौशांबी (Kaushambi) के सैनी कोतवाली अंतर्गत चक सैदराजे का रहने वाला प्रमोद यादव यूक्रेन (Ukraine) और रूस (Russia) की लड़ाई में फंस गया था. बीती रात को वह अपने घर शकुशल पहुंचा तो परिजनों ने राहत की सांस ली. वह पूर्वी यूक्रेन के खारकिव (Kharkiv) सिटी में रहकर पढ़ाई करता था.
कहां फंसा था प्रमोद
यूक्रेन से वापस आए प्रमोद ने बताया कि 24 फरवरी को लगभग 5:30 बजे हॉस्टल में पहला धमाका सुना. जिसके बाद हॉस्टल मैनेजर ने मुझे एवं अन्य साथियों को एक बंकर में रखा. बंकर में हम लोगों ने पांच दिन बिताया. यहीं से हम लोगों ने वीडियो बनाकर भारत सरकार के पास भेजा और मदद की गुहार लगाई. खारकिव सिटी पूर्वी यूक्रेन के बीच बसा हुआ है. भारत सरकार जिन बच्चों को पहले युक्रेट किया था, वह पश्चिमी क्षेत्र में आता है. कीयू, शोमी और खारकिव में बच्चे फंसे थे. यह रूस बॉर्डर के नजदीक आता है. सबसे ज्यादा अटैक यहीं पर होता है.
कैसे जाने का किया प्रयास
सैदराजे के रहने वाले प्रमोद ने बताया कि पांच दिन बीत जाने के बाद जब सरकार से कोई सहायता नहीं मिली. तो फिर एक फरवरी की रात को सलाह किया कि अब हम लोगों को खुद से ही निकलना पड़ेगा. मार्शल एक्ट लगा था, उसके बाद कर्फ्यू हटा. वहां से लबीब के लिए ट्रेन निकली. लबीब से खारकिव लगभग एक हजार किलोमीटर पश्चिमी क्षेत्र में है. अपने 100 दोस्तों के साथ वहां से निकले. 10 किलोमीटर पैदल चलने के बाद हम लोग रोगजाल स्टेशन पहुंचे. इस दौरान पांच किलोमीटर का सफर तो आसानी से तय कर लिया. लेकिन जब 5 किलोमीटर का सफर बचा तो बंबिंग सेलिंग शुरू हो गई. हम डरे, सहमे एवं किसी तरह से बचते हुए रोगजाल स्टेशन पहुंच गए. वहां से हम लोगों ने ट्रेन में चढ़ने का प्रयास किया तो वहां के स्थानीय लोग भारतीयों को लात मारकर बाहर निकाल रहे थे क्योंकि वह खुद वहां से बाहर भागना चाह रहे थे.
कैसे आया वापस
उन्होंने बताया कि किसी तरह से हम लोगों ने थोड़े-थोड़े देर ट्रेन में बैठे. इसके बाद हम सभी लोग लदीव पहुंचे. वहां से बस बुक कर लिया और फिर चोभ गए. वहां से हम लोगों का इमीग्रेशन हुआ. इसके बाद फिर हंगरी देश पहुंचे. उसने बताया कि बीतीरात को वह अपने घर पहुंचा. परिजनों ने लाडले से मिलकर राहत की सांस ली. घर आने पर उसने खुशी भी जाहिर की लेकिन दुःख व्यक्त करते प्रमोद ने बताया कि अभी भी आठ सौ छात्र फंसे हुए हैं. भारत सरकार से उसने फंसे हुए छात्रों को वापस लाने के लिए मदद की गुहार लगाई.
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