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Explained: UP में 2.04 करोड़ मतदाताओं का सफाया! 13.21% वोटर्स कम होने से कितने बदलेंगे नतीजे; जानें SIR की अहम बातें

Uttar Pradesh SIR: बिहार में SIR सफल होने के बाद उत्तर प्रदेश में भी कामयाबी के झंडे गाड़े गए. करीब ढाई करोड़ वोटर्स के नाम काट दिए. यानी अब यूपी के चुनावी नतीजों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है.

उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेनसिव रिवीजन यानी SIR 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुआ था और 10 अप्रैल 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के साथ पूरा हो गया. कुल 166 दिन चली इस सफाई का मकसद था- फर्जी, मृत, डुप्लीकेट, शिफ्टेड और अनट्रेसेबल वोटर्स को हटाकर लिस्ट को साफ और सही बनाना. उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सफाई बहुत जरूरी थी क्योंकि पुरानी लिस्ट में लाखों नाम ऐसे थे जो वोटर लिस्ट में थे लेकिन असल में वे शिफ्ट हो चुके थे, मर चुके थे या एक से ज्यादा जगह नाम दर्ज थे. BLOs ने 1.77 लाख से ज्यादा कर्मचारियों के साथ मेहनत की और करोड़ों नाम छांट दिए. एक्सप्लेनर में जानते हैं SIR की अहम बातें...

सवाल 1: यूपी में SIR से पहले कितने वोटर थे, ड्राफ्ट लिस्ट में कितने बचे और कितने नाम कटे?
जवाब: SIR शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश में कुल 15.44 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर थे. 6 जनवरी 2026 को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सिर्फ 12.55 करोड़ नाम बचे. यानी शुरुआती चरण में ही 2.04 करोड़ (2,04,45,300) नाम कट गए. यह 18.7 प्रतिशत की बहुत बड़ी कटौती थी, जो देश के किसी भी बड़े राज्य में सबसे ज्यादा थी.

ब्रेकअप देखें तो 2.17 करोड़ वोटर स्थायी रूप से शिफ्ट हो चुके थे या माइग्रेट थे, 46.23 लाख वोटर मृत पाए गए, 25.47 लाख नाम डुप्लिकेट थे और बाकी कुछ लाख 'अनट्रेसेबल' या फॉर्म न भरने वाले थे. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि ये कटौतियां BLO की घर-घर जांच, फॉर्म न लौटाने और डेटा वेरिफिकेशन से हुईं. कोई मास डिलीशन नहीं था, बल्कि सफाई थी.

सवाल 2: क्लेम्स और ऑब्जेक्शन्स की प्रोसेस के बाद कितने नाम जोड़े गए, कितने और कटे?
जवाब: ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद 6 जनवरी से 6 मार्च 2026 तक क्लेम्स-ऑब्जेक्शन्स का समय दिया गया. इसमें 70.69 लाख Form-6 (नाम जोड़ने के लिए) आए. इनमें महिलाओं के 35.72 लाख और पुरुषों के 34.96 लाख नाम जुड़े. वहीं 2.68 लाख Form-7 (नाम कटवाने के लिए) आए. अंत में सिर्फ 44,952 नाम अतिरिक्त कटे, जिनमें ज्यादातर खुद वोटरों ने या मृत/डुप्लिकेट केस में थे.

थर्ड-पार्टी Form-7 से सिर्फ 4,336 नाम कटे. क्लेम्स-ऑब्जेक्शन्स के बाद 84 लाख से ज्यादा नए नाम जुड़े. नतीजतन 10 अप्रैल 2026 को जारी फाइनल वोटर लिस्ट में कुल 13.39 करोड़ वोटर रह गए. यानी शुरुआती 2.89 करोड़ डिलीशन के बाद नेट डिलीशन 2.05 करोड़ रह गया. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि 86 प्रतिशत आवेदनों की सुनवाई हो चुकी थी और पूरी प्रक्रिया ज्यूडिशियल निगरानी में हुई.

सवाल 3: फाइनल लिस्ट में क्या-क्या नई बातें आईं?
जवाब: 10 अप्रैल 2026 को जारी फाइनल लिस्ट में 17.63 लाख नए 18-19 साल के युवा वोटर जुड़े. जेंडर रेशियो पिछले ड्राफ्ट के 824 से बढ़कर 834 हो गया, जो अच्छा संकेत है. कुल 75 जिलों, 403 विधानसभा क्षेत्रों और हर पोलिंग स्टेशन की लिस्ट अपडेट हो गई. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'BLO सुपरवाइजर्स और BLOs की मेहनत से यह मुमकिन हुआ. कोई डिलीशन बिना ड्यू प्रोसेस के नहीं हुई.' फाइनल लिस्ट अब 2027 विधानसभा चुनाव के लिए बेस बनेगी.

सवाल 4: इस कटौती पर राजनीतिक पार्टियों का क्या रिएक्शन रहा?
जवाब: सपा और कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियों ने इसे 'गरीबों, दलितों, मुस्लिमों और माइग्रेंट वोटरों के खिलाफ धोखा' बताया. सपा प्रवक्ता घनश्याम तिवारी ने कहा, 'यह गरीबों के खिलाफ फ्रॉड है.' कांग्रेस ने भी बड़े पैमाने पर डिलीशन को 'वोटर दमन' करार दिया.

वहीं, बीजेपी और चुनाव आयोग का जवाब था कि यह संवैधानिक और जरूरी सफाई थी. सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी स्वीकार किया कि ज्यादातर कटौती भाजपा के अपने वोट बैंक से हुई. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बार-बार कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष थी और कोई राजनीतिक टारगेटिंग नहीं हुई. विवाद के बावजूद कोई बड़ा प्रदर्शन या कोर्ट स्टे नहीं हुआ.

सवाल 5: SIR का 2027 विधानसभा चुनाव पर क्या असर पड़ सकता है?
जवाब: 13.21% कम वोटर होने से कुल टर्नआउट प्रभावित हो सकता है, खासकर शहरी और माइग्रेंट बहुल इलाकों में असर दिख सकता है. 2022 में यूपी में औसत टर्नआउट 61.11% था. अब अगर माइग्रेंट वोटर लिस्ट से बाहर हैं तो उनके इलाकों में टर्नआउट 5-8% तक गिर सकता है, लेकिन 84 लाख नए नाम जुड़ने से युवा वोटरों की भागीदारी बढ़ सकती है. जेंडर रेशियो 824 से 834 हो गया, यानी महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से टर्नआउट पर पॉजिटिव असर.

कुल मिलाकर टर्नआउट कम लेकिन ज्यादा 'रियल' वोटरों का होगा. इस डिलीशन का सबसे ज्यादा असर शहरी और माइग्रेंट बहुल जिलों में होगा. उदाहरण देखों तो लखनऊ (22.89%, 9.14 लाख), गाजियाबाद (20.24%, 5.75 लाख), कानपुर नगर (19.42%), गौतमबुद्ध नगर (19.33%), मेरठ (18.75%), आगरा (17.71%) और प्रयागराज (17.62%).

विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा साहिबाबाद (3.16 लाख, 30.36%), नोएडा (1.83 लाख), लखनऊ नॉर्थ (1.54 लाख) और आगरा कैंट (1.47 लाख) पर असर पड़ेगा. आजमगढ़ (9.46%), अम्बेडकर नगर (9.90%), मैनपुरी (10.29%) जैसे सपा गढ़ों में डिलीशन कम रही. एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि शहरी इलाकों में माइग्रेशन और डुप्लिकेट नाम ज्यादा थे, इसलिए सफाई ज्यादा हुई.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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