UP Politics: यूपी में बीजेपी और सपा की अग्नि परीक्षा! नए साल 2026 में 10 सीटों के लिए आर-पार की लड़ाई, कौन मारेगा बाजी?
UP के लिए 2026 काफी गहमागमी भरा होगा. सब समय पर रहा तो SIR के बाद पंचायत चुनाव हो चुके होंगे. दूसरी ओर विधानसभा चुनाव की तैयारी होगी. इस बीच 10 सीटों पर चुनाव भी सपा-BJP के बीच तकरार को बढ़ा सकता है.

उत्तर प्रदेश में साल 2026 में पंचायत चुनाव के बाद और वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की अग्नि परीक्षा होगी. यह अग्नि परीक्षा इतनी कठिन होगी कि दोनों ही पक्षों को एक ओर जहां अपने विधायकों को टूटने से बचाना होगा तो वहीं ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर उच्च सदन यानी राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ानी होगी.
संसद की वेबसाइट के आधार पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार साल 2026 के नवंबर में यूपी की 10 सीटें खाली होंगी. जो साल साल 2026 के नवंबर में रिटायर होंगे उसमें भारतीय जनता पार्टी के 9 और सपा के 1 सांसद शामिल हैं.
कौन-कौन होगा रिटायर?
भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो साल 2026 में रिटायर होने वाले सांसदों में बृजलाल, सीमा द्विवेदी, चंद्रप्रभा उर्फ गीता, हरदीप सिंह पुरी, रामजी, दिनेश शर्मा, नीरज शेखर, अरुण सिंह और बीएल वर्मा का नाम शामिल हैं. वहीं सपा से प्रोफेसर रामगोपाल यादव रिटायर होंगे.
इन सभी 10 सांसदों की रिटायरमेंट 25 नवंबर 2026 को होगी. साल 2024 में ही यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चनाव हुए थे, जिसमें सपा के कई विधायक बागी हो गए और बीजेपी को वोट किया था.
UP विधानसभा में किसकी कितनी संख्या?
यूपी विधानसभा की मौजूदा संख्याबल की बात करें तो बीजेपी के 258, सपा के 103, अपना दल के 13, रालोद के 9, निषाद पार्टी के 5, सुभासपा के 6, कांग्रेस के 2, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2 बसपा 1 और सपा के बागियों कुल 3 सदस्य हैं. यानी कुल 402 सदस्यों की संख्या पूरी है और 1 सीट रिक्त है.
यदि इसी आधार पर साल 2026 में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए निर्वाचन की स्थिति बनती है तो प्रत्येक राज्यसभा सीट के लिए 37 मतों की जरूरत होगी. दलों के विधायकों की संख्या को अगर गठबंधन वार देखें तो भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पाले में 294 मत हैं. सपा के पास अगर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 2 वोट जोड़े जाएं तो कुल 105 मत होंगे. वहीं बसपा और जनसत्तादल लोकतांत्रिक की स्थिति निर्वाचन की दशा में ही स्पष्ट होने के आसार हैं. हालांकि साल 2024 के चुनाव में जनसत्तादल लोकतांत्रिक ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया था.
4 बागियों पर टिका सपा का भविष्य?
इतना ही नहीं सपा के 3 बागियों के अलावा 4 अन्य की भी स्थिति यह फैसला करेगी वह किस ओर जाते हैं. वर्ष 2024 के चुनाव की तरह अगर बागियों ने फिर से बीजेपी या एनडीए प्रत्याशी का रुख किया तो सपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. सपा के लिए स्थितियां इस कदर बिगड़ गईं थीं कि सिराथू से उनकी विधायक और अपना दल कमेरावादी की नेता पल्लवी पटेल, पार्टी के प्रत्याशी चयन पर ही नाराज हो गईं थीं. हालांकि उन्होने अंत में पार्टी के पक्ष में ही मतदान करने का दावा किया था.
साल 2024 में 10 सीटों के लिए जब चुनाव हुए थे, तब बीजेपी ने 8 और सपा ने तीन प्रत्याशी मैदान में उतारे थे. जिसके बाद मतदान हुआ जिसमें बीजेपी के 8 और सपा के दो सदस्यों को जीत मिली थी.
यूपी में कैसे होगा राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन?
उत्तर प्रदेश के लिए, राज्यसभा की सीटें UP के विधायकों द्वारा प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट का इस्तेमाल करके भरी जाती हैं. कोटा फॉर्मूला दूसरे राज्यों जैसा ही है.
यूपी के सदंर्भ में मान लें सभी 403 MLA वोट देते हैं और एक चुनाव में UP से 10 राज्यसभा सीटें भरी जा रही हैं. घोसी से सपा विधायक रहे सुधाकर सिंह के निधन के बाद यह सीट रिक्त घोषित कर दी गई है. चूंकि 6 महीने के भीतर सीट पर उपचुनाव हो सकते हैं ऐसे में हम अभी 403 सीटों के आधार पर गणना कर रहे हैं-
- कुल वैध वोट = 403
- जिन सीटों पर होना है चुनाव = 10
( 403/10+1)+1 (403/11)+1
इस गणित से कोटा 37.6 हो जाता है. ऐसे में जबकि पूरे वोट गिने जाते हैं तो एक उम्मीदवार को असल में 37 पहली प्राथमिकता के मतों की जरूरत होती है. राजनीतिक दल इस फॉर्मूले का इस्तेमाल यह तय करने के लिए करते हैं कि कितने उम्मीदवार खड़े करने हैं.उदाहरण के लिए, प्रति उम्मीदवार लगभग 37 विधायक के साथ, एक पार्टी आसानी से एक सदस्य निर्वाचित करा सकती है. इस गणित के आधार पर सपा 2 और बीजेपी 8 प्रत्याशी उतार सकती है.
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Source: IOCL



























