UP Politics: AIMIM के एक बयान ने NDA में डाल दी फूट! ओपी राजभर की प्रतिक्रिया ने किया BJP को परेशान?
UP की सियासत में एक ओर जहां NDA के दलों के बीच दावा है कि वह एक साथ हैं वहीं AIMIM नेता के एक बयान ने दरार डालने की कोशिश की है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट-

महाराजा सुहेलदेव की जातीय पहचान को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर लंबे समय से महाराजा सुहेलदेव को राजभर समाज का बताते रहे हैं.
वहीं हाल में ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली द्वारा महाराजा सुहेलदेव को पासी समाज से जोड़ने के बयान के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है. इसके बाद पासी समाज की राजनीति करने वाले नेताओं ने भी उन्हें अपने समाज का बताया .
AIMIM नेता के बयान पर अब एनडीए के दो नेता आपस में भिड़ते नजर आ रहे हैं. महाराजा सुहेलदेव के जाति को लेकर शुरू हुई राजनीति पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि किसी राजा या महापुरुष को केवल जाति तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जैसे भगवान राम क्षत्रिय कुल में जन्मे थे, लेकिन पूरे समाज के हैं, उसी तरह महाराजा सुहेलदेव भी सभी के लिए सम्मान के पात्र हैं. हालांकि उन्होंने दावा किया कि महाराजा सुहेलदेव का जन्म भर समाज में हुआ था और इसे इतिहास से अलग नहीं किया जा सकता.
राजभर ने महाराजा सुहेलदेव और सैयद सालार मसूद से जुड़ी प्रचलित ऐतिहासिक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि जब विदेशी आक्रमण के दौर में कई स्थानीय शासक पीछे हट गए थे, तब महाराजा सुहेलदेव ने आसपास के राजाओं को संगठित कर संघर्ष किया. उन्होंने दावा किया कि 10 जून 1034 को कोटला नदी के किनारे हुए युद्ध में सालार मसूद को पराजित किया गया. साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले करीब 25 वर्षों में उन्होंने और उनके सहयोगियों ने महाराजा सुहेलदेव को व्यापक पहचान दिलाने का काम किया है.
लोजपा (रामविलास) ने क्या कहा?
दूसरी ओर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता और लोकसभा सांसद अरुण भारती ने कहा कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में पासी–पासवान राजाओं की गौरवशाली परंपरा रही है और महाराजा सुहेलदेव को पासी समाज सदियों से अपना नायक मानता रहा है.
उन्होंने कहा कि महाराजा सुहेलदेव केवल किसी एक समाज के नहीं बल्कि पूरे देश के गौरव और स्वाभिमान के प्रतीक हैं. उनके अनुसार यदि दूसरे समाज भी उन्हें अपना मानते हैं तो यह उनकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है.
क्या मानते हैं राजनीतिक एक्सपर्ट?
इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा ने कहा कि महाराजा सुहेलदेव की जातीय पहचान को लेकर इतिहासकारों में भी लंबे समय से अलग-अलग मत रहे हैं. कुछ उन्हें राजभर, कुछ पासी और कुछ क्षत्रिय परंपरा से जोड़ते हैं.
उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा कोई व्यापक रूप से स्वीकार और निर्णायक ऐतिहासिक प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे उनकी जातीय पहचान पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सके. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक राजनीतिक और सामाजिक विमर्श में ओमप्रकाश राजभर उन नेताओं में रहे हैं जिन्होंने शुरुआती दौर से महाराजा सुहेलदेव के नाम और विरासत को प्रमुखता से उठाया.





















