UP: तीन जिलों में होगी पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था, योगी कैबिनेट की 17 प्रस्तावों पर मुहर, पढ़ें डिटेल
Lucknow: शुक्रवार को हुई योगी कैबिनेट की बैठक में गृह विभाग, परिवहन विभाग समेत विभिन्न विभागों के कुल 17 प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई. बैठक में जल परिवहन को बढ़ावा देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली.

UP News: प्रदेश के 3 और जिलों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था (Police Commissionerate System) लागू करने के लिए योगी कैबिनेट (Yogi Cabinet) ने मंजूरी दे दी है. अब आगरा (Agra), प्रयागराज (Prayagraj) और गाजियाबाद (Ghaziabad) भी पुलिस कमिश्नरेट होंगे. इससे पहले लखनऊ, कानपुर, नोएडा और वाराणसी में पुलिस कमिश्नरेट की व्यवस्था लागू है. शुक्रवार को हुई योगी कैबिनेट की बैठक में गृह विभाग, परिवहन विभाग समेत विभिन्न विभागों के कुल 17 प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई.
पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू करने से संबंधित गृह विभाग के प्रस्ताव में कहा गया कि लखनऊ, गौतम बुद्ध नगर, कानपुर नगर और वाराणसी में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है. साथ ही यह भी कहा गया कि अपराधियों के काम करने का तरीका लगातार जटिल और आधुनिक होता जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्र में अगर कोई नया व्यक्ति आता है तो सब पता चल जाता है, लेकिन नगरों में पहचान छुपा कर रहना आसान है. अपराधों की प्रकृति और अपराधियों के तौर तरीके हाईटेक होते जा रहे हैं. तेज वाहनों से लूट, वाहन चोरी, छिनैती जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं. संगठित अपराध में अब ड्रग्स, मानव तस्करी के अलावा साइबर अपराध, नकली कॉल सेंटर चलाकर देश-विदेश में ठगी, लॉटरी स्कैम चलाना भी शामिल हो गए हैं.
संगठित साइबर अपराध के रूप में ऑनलाइन ठगी भी हो रही है. ऐसे में इनसे निपटने के लिए पुलिस की वर्तमान तकनीक पर्याप्त नहीं. आज प्रस्ताव की इन्ही बातों को देखते हुए आगरा, गाजियाबाद, प्रयागराज में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था पर मुहर लगी है. बता दें कि आगरा की जनसंख्या 44 लाख, 18 हज़ार 797, गाजियाबाद की जनसंख्या 46 लाख, 61 हज़ार 452 और प्रयागराज की जनसंख्या 59 लाख, 54 हज़ार 390 है.
तीनों महानगर होंगे मेट्रोपोलिटन एरिया घोषित
कैबिनेट मंत्री एके शर्मा ने बताया कि इन तीनों महानगरों को सीआरपीसी के नियमों के अनुसार पहले मेट्रोपोलिटन एरिया के तौर पर घोषित किया जाएगा. फिर अन्य जनपदों की तरह संपूर्ण जनपद क्षेत्र में कमिश्नरेट प्रणाली लागू हो जाएगी. जनपद आगरा को जनसंख्या और क्षेत्रफल में वृद्धि, पर्यटन नगरी, औद्योगिक क्षेत्र और कानून व्यवस्था की दृष्टि से उपयुक्त पाया गया कि वहां कमिश्नरेट व्यवस्था लागू की जाए. गाजियाबाद में बदली हुई औद्योगिक परिस्थितियों, एनसीआर क्षेत्र, आपराधिक और कानून व्यवस्था के दृष्टिगत पुलिस कमिश्नरेट में तब्दील करने का निर्णय लिया गया. वहीं, प्रयागराज धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी है. 2025 में यहां महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है. इन सभी बातों के साथ ही वहां की कानून व्यवस्था, जनसंख्या, संगठित अपराध को देखते हुए पुलिस कमिश्नरेट की व्यवस्था लागू किए जाने का निर्णय लिया गया.
अब तक 7 महानगरो में कमिश्नरेट प्रणाली लागू
योगी सरकार अब तक तीन चरणों में 7 महानगरों में कमिश्नरेट प्रणाली लागू कर चुकी है. सबसे पहले 13 जनवरी 2020 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लागू किया गया था. लखनऊ में सुजीत पांडे और नोएडा में आलोक सिंह को पहला पुलिस कमिश्नर बनाया गया था. इसके बाद 26 मार्च 2021 को दूसरे चरण में कानपुर और वाराणसी में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू हुई थी. कानपुर में असीम अरुण और वाराणसी में ए सतीश गणेश को पुलिस कमिश्नर बनाया गया था. अब योगी सरकार ने तीसरे चरण में 3 शहरों में आगरा, गाजियाबाद और प्रयागराज में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लागू किया है.
एडीजी रैंक के अधिकारियों की होगी तैनाती
कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद तीनों कमिश्नरेट में एडीजी रैंक के पुलिस अधिकारियों की तैनाती की जाएगी. आईजी रैंक के अधिकारी जॉइंट कमिश्नर बन पाएंगे. इससे जनपद की कानून व्यवस्था और विधि व्यवस्था की समीक्षा का काम तेजी से हो सकेगा. कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिलों को कई जोन में बांटा जाएगा. कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद पुलिसिंग के रैंक में भी बदलाव हो जाएगा. थानों को लेकर सीओ की तैनाती के स्थान पर एसीपी की तैनाती की जाएगी. उनके अधिकार अधिक होंगे. इससे किसी भी केस के अनुसंधान में वे अपने स्तर पर निर्णय ले पाएंगे.
वहीं, कमिश्नरेट में तैनात होने वाले पुलिस कमिश्नर के अधिकार क्षेत्र में वृद्धि हो जाएगी. कमिश्नरेट क्षेत्र में अब पुलिस कमिश्नर के पास मजिस्ट्रेट की शक्तियां भी होंगी. लॉ एंड ऑर्डर संबंधी अधिकार अब कमिश्नर के पास होंगे. शहरी थानों के साथ-साथ कमिश्नरेट में ग्रामीण थाने भी सम्मिलित होंगे. हाल ही में मंत्रिपरिषद ने लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली का पुनगर्ठन करते हुए तीनों जनपदों में ग्रामीण जिला व्यवस्था को समाप्त करके पूरे जनपद को पुलिस कमिश्नरेट में शामिल करने का निर्णय लिया था. नई व्यवस्था अधिसूचना जारी होने के बाद लागू हो जाएगी.
बैठक में इन महत्पूण प्रस्तावों पर भी लगी मुहर
कैबिनेट की बैठक में कई और अहम प्रस्ताव पर भी मुहर लगी. कैबिनेट ने परिवहन विभाग से जुड़े तीन अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी दी. परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि पीपीपी मॉडल पर प्रदेश के 23 बस अड्डों का हवाई अड्डों की तर्ज पर निर्माण किया जाएगा. पहले चरण में लखनऊ के 2 बस अड्डे, आगरा के 2, प्रयागराज के 2, वाराणसी के 1, गोरखपुर और कानपुर के 1 बस अड्डे शामिल हैं. इन बस अड्डों में यात्रियों के रुकने की व्यवस्था, रेस्टोरेंट, मॉल, शौंचालय, कॉमन रूम जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी. पहले चरण के बाद प्रदेश के सभी 75 जनपदों में बस अड्डों को इसी तर्ज पर संवारा जाएगा.
स्क्रैप पॉलिसी को मिली कैबिनेट की मंजूरी
इसके अलावा, परिवहन विभाग की स्क्रैप पॉलिसी को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी. इसके अंतर्गत अब सिर्फ लाइसेंसधारी संस्थाएं ही गाड़ियों के स्क्रैप का इस्तेमाल कर सकेंगी. इसके तहत पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप में देने वालों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा. कॉमर्शियल वाहनों को स्क्रैप में देने पर 15 प्रतिशत, जबकि प्राइवेट गाड़ियों को 10 प्रतिशत टैक्स में छूट मिलेगी. इससे पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा. अब तक महिंद्रा और मारुति समेत 6 कंपनियों को लाइसेंस जारी किया गया है. 5 अन्य कंपनियों पर भी विचार हो रहा है. सरकार की हर जिले में स्क्रैप सेंटर बनाने की योजना है.
जल परिवहन को बढ़ावा देने के प्रस्ताव पर मंजूरी
प्रदेश में जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव को मंजूरी मिली है. इसके तहत बनारस से बलिया तक 15 जेटी का निर्माण किया जाएगा. इससे न सिर्फ लोग सस्ते में यात्रा कर पाएंगे, बल्कि किसान अपने उत्पादों को भी अलग-अलग शहरों में भेज सकेंगे. चंदौली जनपद में एक जेटी बन रही है, जहां रेलवे, एयरपोर्ट और बस-ट्रांसपोर्ट समेत तीनों माल परिवहन की सुविधा मिलेगी.
बैठक में नैमिष धाम के समन्वित विकास के लिए श्री नैमिषारण्य तीर्थ विकास परिषद गठन का निर्णय लिया. सीतापुर और हरदोई जिलों के 36 गांव मिलाकर नैमिषारण्य तीर्थ विकास परिषद का गठन किया जाएगा. जल्द ही इसकी औपचारिक अधिसूचना भी जारी हो जाएगी. इसका क्षेत्रफल 8511.284 हेक्टेयर है और जिसमें ग्यारह गंतव्य स्थान सम्मिलित हैं. इसमें से सात गंतव्य स्थान जिला सीतापुर के अधीन आते हैं, यह नैमिषारण्य, देवगवां, मड़रुवा, जरिगवां, कोलुहा बरेठी और मिश्रिख हैं और चार अवस्थान जिला हरदोई के अधीन आते हैं जो हर्रैया, नगवा-कोथावां, गिरधरपुर-उमरारी और साखिन-गोपालपुर हैं. सम्पूर्ण परिपथ 209 मील अथवा 84 कोस का है.
ये 36 गांव होंगे शामिल
नैमिषारण्य तीर्थ विकास परिषद के गठन में अरबापुर, सहसामऊ, ठाकुरनगर, लकड़ियामऊ, भिठौली, नरसिंघौली, मधवापुर, नरायनपुर, परसौली, संजराबाद, धरवासपारा कलां, धवरपारा-खुर्द, मिश्रिख, सरायंबीबी, जसरथपुर, करमसेपुर, लेखनापुर, रूपपुर, उत्तरधौना, खरगपुर, कल्ली, लोकनापुर, करखिला, मरेली, तरसावां, लोहंगपुर, बिजानग्रंट, बिनौरा, भानपुर, अटवा, मनिकापुर, लेखनापुर, लक्ष्मणनगर, नैमिषारण्य बाहर नगर क्षेत्र, भैरमपुर और अजीजपुर गांवों को शामिल किया जाएगा.
मुख्यमंत्री होंगे परिषद के अध्यक्ष
श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद एक निगमित निकाय होगी जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे जबकि पर्यटन मंत्री उपाध्यक्ष होंगे. मुख्यमंत्री द्वारा कार्यपालक उपाध्यक्ष की नियुक्ति भी की जाएगी. प्रमुख सचिव पर्यटन, आवास एवं नगर नियोजन, वित्त, संस्कृति, धर्मार्थ कार्य, नगर विकास, परिवहन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, लोक निर्माण, मंडलायुक्त आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट, सीतापुर, मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, उत्तर प्रदेश और कार्यपालक अधिकारी, नैमिषारण्य नगर पालिका सदस्य/ सह-संयोजक की भूमिका में होंगे.
परिषद का एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी होगा जो राज्य सरकार के विशेष सचिव की श्रेणी या वरिष्ठ अधिकारियों में से राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा. नैमिषारण्य क्षेत्र के विरासत के संरक्षण का ज्ञान, अनुभव, अभिदर्शन तथा निमित्त कृत प्रयासों के ट्रैक अभिलेख वाले ऐसे पांच प्रख्यात व्यक्ति जो राज्य सरकार के परामर्श से अध्यक्ष द्वारा नामित किए जाएंगे. परिषद के गठन संबंधी अधिसूचना जारी होने के बाद एक नियोजन तथा विकास समिति का गठन भी होगा. नियोजन तथा विकास समिति के अध्यक्ष जिला मजिस्ट्रेट, सीतापुर होंगे जबकि मुख्य कार्यपालक अधिकारी, सदस्य सचिव होंगे और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सीतापुर, मुख्य विकास अधिकारी, हरदोई, अपर पुलिस अधीक्षक, हरदोई, और कार्यपालक अधिकारी, नैमिषारण्य नगर पालिका शामिल होंगे.
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