एक्सप्लोरर
Gyanvapi Case: ज्ञानवापी विवाद पर इलाहाबाद HC में हुई सुनवाई, अदालत ने तलब किया केस से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड
Gyanvapi Case: ज्ञानवापी परिसर में श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा-अर्चना के मामले पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत ने जिला जज की कोर्ट में हुई सुनवाई का पूरा रिकॉर्ड तलब कर लिया है.

(फाइल फोटो)
Gyanvapi Case: विवादित ज्ञानवापी परिसर (Gyanvapi) में श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना की इजाजत दिए जाने की मांग को लेकर वाराणसी कोर्ट (Varanasi Court) में राखी सिंह समेत पांच महिलाओं द्वारा दाखिल किए गए केस का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) पहुंच गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज इस मामले में जिला जज की कोर्ट में हुई सुनवाई का पूरा रिकॉर्ड तलब कर लिया है. वाराणसी के जिला जज को केस से जुड़े सभी रिकॉर्ड की फोटो कॉपी को प्रमाणित कर उसे दो दिनों में कोर्ट में दाखिल करना होगा. हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई अब 2 दिन बाद यानी 19 अक्टूबर को दोपहर 2:00 बजे से होगी.
ज्ञानवापी मामले पर वाराणसी हाईकोर्ट में सुनवाई
ज्ञानवापी मस्जिद की इंतजामिया मैनेजमेंट कमेटी ने जिला जज की कोर्ट से 12 सितंबर को आए फैसले को चुनौती दी है. जिला जज की कोर्ट ने 12 सितंबर को सुनाए गए अपने फैसले में मुस्लिम पक्ष की आपत्ति को खारिज कर दिया था और राखी सिंह के केस को चलते रहने की मंजूरी दी थी. आज की सुनवाई के दौरान मस्जिद कमेटी ने अपनी बहस पेश करने के लिए कुछ दिनों की मोहलत दिए जाने की अपील की थी. मस्जिद कमेटी की तरफ से कहा गया था कि उन्हें कुछ और डॉक्यूमेंट कोर्ट में पेश करने हैं, इसलिए सुनवाई को कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया जाए, लेकिन कोर्ट ने उन्हें सिर्फ 2 दिनों की मोहलत दी. हिंदू पक्ष की तरफ से आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु जैन मौजूद थे.
जानिए क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि दिल्ली की राखी सिंह और वाराणसी की 4 महिलाओं ने पिछले साल वाराणसी की जिला कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर ज्ञानवापी परिसर में विराजमान मां श्रृंगार गौरी व कुछ अन्य देवी-देवताओं की पूजा अर्चना नियमित तौर पर किए जाने की इजाजत दिए जाने की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की सुनवाई इसी साल मई महीने में सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट से डिस्ट्रिक्ट जज की कोर्ट में शुरू की गई थी. इस बीच मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति दाखिल करते हुए राखी सिंह का केस खारिज किए जाने की अपील की. मुस्लिम पक्ष की तरफ से कहा गया कि 1991 के प्लेसिस ऑफ वरशिप एक्ट के तहत इस मामले में सुनवाई नहीं की जा सकती, जबकि हिंदू पक्ष की तरफ से दलील दी गई कि ज्ञानवापी का यह मामला प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट के दायरे में नहीं आता है.
जिला अदालत में मुस्लिम पक्ष की दलील खारिज
महीनों चली सुनवाई पूरी होने के बाद वाराणसी के जिला जज ने अगस्त महीने में अपना जजमेंट रिजर्व कर लिया था. अदालत ने 12 सितंबर को मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया और राखी सिंह के केस को चलते रहने की मंजूरी दे दी. ज्ञानवापी मस्जिद कमेटी की इंतजामियां कमेटी ने जिला जज के की अदालत से 12 सितंबर को आए फैसले को पिछले हफ्ते इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
इस मामले में आज हाईकोर्ट में पहली सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई जस्टिस जेजे मुनीर की सिंगल बेंच में हुई. मस्जिद कमेटी की तरफ से फिर से वही तथ्य दोहराया गया कि राखी सिंह का केस भी 1991 के प्लेसिस ऑफ वरशिप एक्ट के दायरे में आता है, इसलिए इस मामले में सुनवाई नहीं की जा सकती.
ये भी पढ़ें- Watch: हरिद्वार में हुआ नेताजी का अस्थि विसर्जन, अखिलेश के साथ डिंपल, शिवपाल समेत ये लोग रहे मौजूद
और पढ़ें
टॉप हेडलाइंस
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड





















