Fatehpur Controversy: फतेहपुर मकबरा विवाद को लेकर दो पक्ष आमने सामने, दोनों पक्षों के वकीलों ने क्या कहा?
Fatehpur Controversy: हिन्दू पक्ष के अनुसार अभिलेखों में ये मकबरा नहीं ठाकुर जी का मंदिर है. मकबरे की जमीन का जो नंबर 1159 है हिन्दू समुदाय के अनुसार गिरधारी लाल और राय ईश्वर सहाय की जमींदारी थी.

फतेहपुर में मकबरे को लेकर विवाद की तस्वीर सामने आई. कुछ लोग भगवा झंडा लेकर मकबरे में दाखिल हो गए तोड़ फोड़ की और बाद में पथराव की तस्वीर सामने आई और पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर काबू कर लिया. घटना के बाद मौके पर शांति बहाल है लेकिन कई सवाल भी हैं आखिर मामला क्या है.
इस मामले पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा है कि विवादित स्थल एक मकबरा है जिसका जिक्र 1981 की इंपीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया किताब में है. वहीं हिंदू पक्ष के वालीं की तरफ से कहा गया है कि यह मकबरा नहीं बल्कि ठाकुर जी का मंदिर है.
मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता ने क्या कहा?
फतेहपुर की फिजा में अचानक धार्मिक सौहार्द बिगड़ने की बात कहां से आ गई. आखिर विवाद क्या है इसे जानने के लिए पहले हम मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता मोहम्मद आसिफ के पास पहुंचे इनका दावा है कि जहां विवाद हुआ वो जगह मकबरा है. इसका जिक्र 1881 द इम्पीरियर गजेटियर आफ इंडिया में है.
इन्होंने बताया कि 1704 से औरंगजेब के शासन काल मे लगभग साढ़े तीन सौ साल पुराना इसका इतिहास है. इसे मंगी मकबरा के नाम जाना जाता है और संगी मकबरा भी कहा जाता है जिसका मतलब है पत्थर का मकबरा.
किताब में है मकरे का जिक्र
इसमे बनने वाली कब्र की अगर बात करें तो अब्दुल समद खान की मौत 1699 में और उनके बेटे अबु मोहम्मद की मौत 1704 में हुई और इन्ही दोनों की कब्र यहां मौजूद हैं बाकी इनके अन्य सेवादारों की हैं . इन्होंने बताया कि फतेहपुर गजेटियर में 1906 में लेखक एच आर नेविल ने पेज नंबर 199 और 200 में इसका जिक्र है.
इसके अलावा इम्पीरियल गजेटियन आफ इंडिया1881 में लिखी गई जिसके खण्ड 12 पृष्ठ 83 में जिक्र है. फतेहपुर के इतिहासकार डॉक्टर ओमप्रकाश अवस्थी ने अनुवाक पुस्तक में पेज 165 में इसका जिक्र किया . डॉक्टर इस्माइल आजाद ने तारिक ए फतेहपुर में पेज 53 54 55 में जिक्र किया गया. और कागजी अभिलेखों में भी इसे मकबरा ही दर्ज है.
हिन्दू पक्ष की ओर से दावा क्या है?
वहीं हिन्दू पक्ष अपना दावा लेकर सामने आया है और उनके अनुसार अभिलेखों में ये मकबरा नहीं बल्कि ठाकुर जी का मंदिर है. मकबरे की जमीन का जो नंबर 1159 है हिन्दू समुदाय के अनुसार गिरधारी लाल और राय ईश्वर सहाय की जमींदारी थी. 1927 को बंटवारा हुआ. 1928 में एसडीएम कोर्ट से बंटवारा हुआ. 1159 सतीशचंद्र के खाते में. 753 752 राय ईश्वर जी के खाते में आती है. यहां एक घना बाग था.
इनके अनुसार समय बीतने के साथ इनकी संपत्ति वक्क्फ की संपत्ति हो गई और वक्क्फ बोर्ड ने अनीश को मुतवल्ली बना दिया. और मुस्लिम वहां जाने लगे. पुश्तैनी जमीन का दावा करने वाले ने कहा कि यहां बीच मे शिव जी का मंदिर था.
इन्होंने बताया कि 752 नंबर रकबा है. मुस्लिम समाज की माने तो गाटा नम्बर 753 में मकबरा दर्ज है लेकिन हिन्दू समुदाय की माने तो ये राय ईश्वर की संपत्ति में आया था अब देखना ये होगा कि इस मामले को लेकर दोनों पक्षो का अगला कदम क्या होता है?
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