'मुझे टिकट मिले या न मिले', BJP में शामिल होने से पहले बोले राकेश सिंह
उत्तर प्रदेश के गौरीगंज विधानसभा सीट से सपा के विधायक राकेश प्रताप सिंह के बीजेपी में 14 अक्टूबर को शामिल होंगे. ऐसे में उन्होंने बीजेपी से 2027 में टिकट मिलने पर अपनी प्रतीक्रिया दी है.

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले की गौरीगंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के तीन बार के विधायक राकेश प्रताप सिंह ने आने वाली 14 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा की है. उन्होंने बीजेपी शामिल होने पर कहा कि बीजेपी के प्रति मेरा समर्पण है और मैं उसकी सदस्यता लेने जा रहा हूं. मेरा समाजवादी पार्टी से अलग होने का फैसला विधानसभा चुनाव के बाद नहीं, बल्कि उससे एक साल पहले ही हो गया था.
2027 में टिकट मिलने के सवाल पर राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि, मैं विधायक रहूं या न रहूं, मुझे टिकट मिले या न मिले, लेकिन ऐसे लोगों से समझौता नहीं किया जा सकता, जो रामद्रोही और राष्ट्रविरोधी हों. जनसेवा करने और जनता के लिए काम करने के लिए विधायक रहना जरूरी नहीं है. पार्टी को लगता है कि मैं विधायक के रूप में अच्छा काम कर सकता हूं, तो वह टिकट देगी नहीं तो पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, उसका निर्वहन करूंगा. मुझे बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का पूरा आशीर्वाद प्राप्त है.
'राजनीति रहे या न रहे, लेकिन इनके साथ रहना संभव नहीं'
उन्होंने कहा कि कि राजनीति रहे या न रहे, लेकिन ऐसे लोगों के साथ राजनीति करना संभव नहीं है, जो तुलसीदास के लेखन पर सवाल उठाते हैं, देवी-देवताओं के अस्तित्व पर प्रश्न खड़े करते हैं, राम चरित मानस फड़वाते हैं और धर्म को कैंसर-मलेरिया कहते हैं.
करीब ढाई साल पहले यह प्रक्रिया शुरू हुई थी. इस दौरान मैंने अपने लोगों के बीच विचार-विमर्श किया, इसका निष्कर्ष यह निकला कि जो राष्ट्र और राम के हित में है, उसके साथ जाना चाहिए. इसमें मुझे भारतीय जनता पार्टी सबसे उपयुक्त लगी. मां देवी की कृपा हम सभी विधायकों पर बनी रहे. इसलिए हम 14 अक्टूबर को नवरात्रि के दौरान बीजेपी में शामिल हो रहे हैं.
राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार को मजबूत करने में गिलहरी जैसी भूमिका निभाएंगे. विनोद चतुर्वेदि, अभय सिंह भी बीजेपी की सदस्यता लेंगे. उन्होंने कहा कि मेरे क्षेत्र में भी एक बड़ा कार्यक्रम हो रहा है, जिसमें पहला कार्यक्रम गौरीगंज में होगा, जहां सभी लोग बीजेपी की सदस्यता लेंगे. इसके बाद जब दूसरे विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रम होंगे, वहां भी मैं जाऊंगा. स्मृति ईरानी, जो बीजेपी की राष्ट्रीय महामंत्री हैं और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा डॉ. भोला सिंह और करीब एक दर्जन राज्य मंत्रियों की मौजूदगी में मैं बीजेपी की सदस्यता लूंगा.
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जिन लोगों ने चंदा नहीं दिया, वे चिंता ना करें
अखिलेश यादव के राम मंदिर जाने और पवन पांडेय को जिम्मेदारी देने के बयान पर उन्होंने कहा कि , इस तरह की निंदनीय बातें कहीं से भी अच्छी नहीं लगतीं. अगर अभी मुहूर्त नहीं निकल पाया है, तो आगे क्या निकल जाएगा. पवन पांडेय जी को इतनी हल्की बातें नहीं करनी चाहिए. वह अयोध्या में पैदा हुए, वहीं से विधायक और मंत्री बने. किसी घटना को धार्मिक व्यवस्था या धर्म से जोड़ना और धार्मिक भावनाओं को आहत करना उचित नहीं है.
जिन लोगों ने एक रुपये का चंदा नहीं दिया, वे चंदे की इतनी चिंता कर रहे हैं. उन्हें यह भी नहीं पता कि चंदा क्या होता है और समर्पण क्या होता है? जब कोई भगवान के दर्शन करने जाता है, तो वहां समर्पण करता है. चंदे की रसीद मिलती है, समर्पण की कोई रसीद नहीं मिलती. ये लोग सनातनी नहीं, बल्कि सनातन विरोधी हैं. इन्हें चंदे और समर्पण का अंतर नहीं पता. राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि ये लोग राम मंदिर में दर्शन की बात कर रहे हैं, लेकिन याद करें कि जब राम मंदिर का आंदोलन चल रहा था, तब सरयू को लाल करने वाले और भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले लोग कौन थे?
'चार साल से राम मंदिर में दर्शन का समय नहीं मिला'
अखिलेश यादव को राम मंदिर जाना चाहिए. अगर वह हिंदू धर्म में पैदा हुए हैं और खुद को सनातनी मानते हैं, तो राम मंदिर बने चार साल से ज्यादा हो चुके हैं. इतने वर्षों में उन्हें दर्शन का समय नहीं मिला, यह दुर्भाग्यपूर्ण है. मुझे लगता है कि भगवान राम की कृपा उन पर नहीं है.
केदारेश्वर महादेव मंदिर के बाद दूसरे मंदिर बनाने की बात पर, यह राजनीति है. अगर हम केदारनाथ की जगह दूसरा मंदिर बनाने की बात करें, भगवान राम के मंदिर की जगह दूसरा मंदिर बनाने की बात करें या काशी विश्वनाथ, महाकाल और वैष्णो माता जैसे आस्था के केंद्रों की जगह दूसरा मंदिर बनाने की बात करें, तो यह मजाक होगा. मंदिर मजाक का विषय नहीं हैं, लेकिन इस तरह की बातें मजाक करने वाली हैं.
'आदमी को अपनी हद और हैसियत का अंदाजा होना चाहिए'
पवन पांडेय के चुनाव लड़ने और योगी आदित्यनाथ को चुनौती देने के बयान पर राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि यह बहुत हल्की और ओछी बात है. पवन पांडेय जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुयायियों से 50000 से एक लाख वोट से हार रहे हैं तो अगर योगी जी चुनाव लड़ेंगे, तो उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी हार पवन पांडेय की होगी. उन्होंने कहा कि आदमी को अपनी हद, सरहद और हैसियत का अंदाजा होना चाहिए. व्यक्ति को इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए.
राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव पवन पांडेय से नाराज हैं और उन्हें विधायक के रूप में नहीं देखना चाहते. अगर वह उनका कद बढ़ाना चाहते, तो उन्हें राज्यसभा या विधान परिषद भेज देते. अगर पवन पांडेय अखिलेश यादव के इतने करीबी हैं, तो उन्हें किसी सदन में भेजना चाहिए था. योगी जी से चुनाव लड़वाकर अखिलेश यादव उन्हें राजनीतिक रूप से खत्म करना चाहते हैं. उनकी भावनाएं और काम करने का तरीका ऐसा लगता है कि वह एक और ब्राह्मण परिवार के उभरते हुए नौजवान की राजनीतिक पहचान को पूरी तरह समाप्त करना चाहते हैं.





















