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UP Election 2022: उन्नाव सदर सीट पर 53 वर्षों से कांग्रेस नहीं खोल पाई खाता, कौन-कौन है चुनावी मैदान में, क्या है समीकरण?

उन्नाव सदर सीट को सपा का गढ़ माना जाता है. यह लोधी और निषाद बाहुल्य सीट है. सपा ने डॉ अभिनव कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है. बीजेपी ने पंकज गुप्ता को मैदान में उतारा है.

UP Assembly Election 2022: सभी दलों को मौका देने वाली उन्नाव की सदर विधानसभा सीट पर काफी अरसे तक समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है. बात की जाए पिछले दो इलेक्शन की तो यह सीट बीजेपी के खाते में जा रही है. कांग्रेस की बात की जाए तो 53 वर्षों से कांग्रेस इस सीट पर अपना खाता नहीं खोल पाई है. 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए सभी प्रमुख दलों ने सदर सीट पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं. बीजेपी ने मौजूदा विधायक पंकज गुप्ता पर एकबार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें सदर सीट का प्रत्याशी बनाया है.

बीजेपी से पंकज मैदान में
पंकज गुप्ता उन्नाव नगर पालिका के अध्यक्ष रह चुके हैं. 2014 में सदर विधायक दीपक कुमार की मौत के बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी ने पंकज गुप्ता को प्रत्याशी बनाया था और उन्होंने विजय हासिल की. 2017 के चुनाव में भी पंकज गुप्ता पर बीजेपी ने भरोसा जताकर उन्हें सदर सीट से प्रत्याशी बनाया. पंकज गुप्ता ने समाजवादी पार्टी की मनीषा दीपक को 73,597 वोटों से हराकर सदर सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. एक बार फिर 2022 के इलेक्शन में भारतीय जनता पार्टी ने पंकज गुप्ता को मैदान में उतारा है.

सपा से लड़ेंगे अभिनव कुमार
समाजवादी पार्टी ने डॉ अभिनव कुमार को उन्नाव सदर सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है. डॉ अभिनव का पूरा परिवार पिछले कई दशकों से समाजवादी पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है. डाक्टर अभिनव के बाबा समाजवादी पार्टी से उत्तर प्रदेश सरकार में पशुधन मंत्री रहे. उनके पिता दीपक कुमार उन्नाव से विधायक और सांसद रहे. लगातार कई वर्षों तक उन्नाव की सीट पर डॉ अभिनव के परिवार का कब्जा रहा.

बसपा और कांग्रेस से कौन
बहुजन बहुजन समाज पार्टी ने एक युवा चेहरा देवेंद्र सिंह पर इसबार दांव लगाया है. देवेंद्र सिंह का यह पहला चुनाव है. इससे पहले हाल ही में हुए ब्लॉक प्रमुख चुनाव में देवेंद्र के भाई धर्मेंद्र सिंह ने मियागंज ब्लाक प्रमुख का चुनाव जीता है. देवेंद्र सिंह की छत्रिय समाज और अनुसूचित जाति के वोटरों पर अच्छी पकड़ है. कांग्रेस ने लड़की हूं लड़ सकती हूं के तहत उन्नाव की सदर सीट से बहुचर्चित रेप कांड की पीड़िता की मां आशा सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है.

उन्नाव सदर सीट का इतिहास
उन्नाव के सदर विधानसभा सीट को सपा का गढ़ माना जाता है. यह सीट लोधी और निषाद बाहुल्य सीट है. इस सीट पर मनोहर लाल के परिवार का अच्छा दबदबा रहा है. इस सीट पर पहली बार कांग्रेस के लीलाधर विधायक बने थे. 1957 के चुनाव में पीएससी पार्टी से चौधरी खजान सिंह यहां से विधायक हुए. 1962 और 1967 में कांग्रेस के जियाउर रहमान अंसारी यहां से विधायक हुए. 1969 में भारतीय क्रांति दल से अनवर अहमद विधायक बने. इसके बाद 1974 में बीकेडी पार्टी से सहदेव पाल विधायक हुए.

1977 में जनता पार्टी से चंद्रपाल सिंह विधायक बने. 1980 में जनता पार्टी से सहदेव पाल एक बार फिर विधायक बने. 1985 में लोकदल से मनोहर लाल विधायक बने. 1989 में मनोहर लाल ने पार्टी चेंज कर जनता दल का दामन थामा और वह विधायक बने. 1991 में सदर विधानसभा सीट पर बीजेपी ने पहली बार अपना कब्जा जमाया और शिवपाल सिंह यादव विधायक बने. 1993 के चुनाव में सपा से एक बार फिर मनोहर लाल विधायक चुने गए. 1996 के चुनाव में मनोहर लाल के बड़े बेटे दीपक कुमार ने सपा की सीट से चुनाव लड़ा और वह विजई हुए.

1999 दीपक कुमार ने संसदीय चुनाव लड़ा और वह सांसद बन गए. जिसके बाद 2000 में सदर सीट पर उपचुनाव हुआ जिसमें दीपक कुमार के भाई राम कुमार सपा के सीट से विजई हुए. 2002 में पहली बार बीएसपी के कुलदीप सिंह सेंगर विधायक बने. 2007 में एक बार फिर दीपक कुमार सपा की सीट से विजई हुए. 2012 के चुनाव में भी दीपक कुमार को सपा से विजय हासिल हुई. दीपक कुमार की मृत्यु के बाद सदर विधान सभा सीट पर उपचुनाव हुआ जिसमें बीजेपी से पंकज गुप्ता को विजय हासिल हुई. 2017 के चुनाव में पंकज कुमार एक बार फिर बीजेपी से चुनाव लड़े और विजय हासिल की.


उन्नाव सदर विधानसभा


कुल मतदाता- 3,81,370
महिला मतदाता- 1,70,920
पुरुष मतदाता - 2,09,832
थर्ड जेंडर - 21

जातिगत समीकरण

अनुमानित ब्राह्मण- 65 हजार
मुस्लिम -42 हजार
लोधी -52 हजार
छत्रिय- 32 हजार
केवट- 25 हजार
पासी- 33 हजार
वेस्ट- 24 हजार
अन्य जातियां- 50 हजार

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