UGC वापस लेना कानून? बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने दिए संकेत, कहा- मुझे लगता है सरकार विचार करेगी
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता हरीश श्रीवास्तव ने एबीपी न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत में UGC की हालिया अधिसूचना और नियमों को लेकर बड़ा दावा किया है.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी- UGC) द्वारा बीते दिनों अधिसूचित किए गए कानून पर सरकार आगे विचार करेगी. यह दावा भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के नेता हरीश श्रीवास्तव ने किया है. एबीपी न्यूज़ से बातचीत में हरीश ने यूजीसी मुद्दे पर बीजेपी नेताओं के इस्तीफे के संदर्भ में बातचीत के दौरान यह बात कही.
उन्होंने कहा कि नेताओं ने किन कारणों से इस्तीफा दिया इसकी मुझे जानकारी नहीं है लेकिन, किसी निर्णय को लेकर के लोगों के मतभेद हो सकते हैं लेकिन सरकार किसी निर्णय पर पहुंचती है तो उसके भी कारण होते हैं. जब अलग-अलग विचार आते हैं तो सरकार उन निर्णय पर भी पुनर्विचार करती है और विभिन्न दृष्टिकोण पर सम्यक रूप से ध्यान देते हुए उसी हिसाब से आगे भी निर्णय कर देती है. मुझे लगता है सरकार आगे भी इस पर विचार करेगी.
हरीश ने न सिर्फ बीजेपी नेताओं के इस्तीफे पर बल्कि संभल से लोकसभा सांसद जियाउर्रहमान द्वारा यूजीसी मुद्दे पर दिए बयान को लेकर भी कहा कि किसी निर्णय को लेकर के अपना अपना मत हो सकता है. उसमें मतभेद भी हो सकते हैं. यह लोकतंत्र की स्वस्थ्य प्रक्रिया है, लेकिन सरकार के सामने कोई विषय आता है तो सरकार उसे पर स्वयं विचार करती है, और विचार के बाद निर्णय लेती है.
अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर क्या बोले यूपी बीजेपी के नेता?
पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा की अपनी एक नियमावली है, एक आचार संहिता है.बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा दिया है उन्होंने सरकारी सेवा की नियमावली का स्पष्ट उल्लंघन किया है. सरकार ने इसमें जांच के आदेश दिए हैं जांच के बाद सब स्पष्ट होगा. सबकी अपनी मर्यादा होती है, उस मर्यादा में रहकर सबको काम करना चाहिए. राजपत्रित अधिकारी और सिविल सर्वेंट की अपनी एक मर्यादा है ,फिलहाल अनुशासन तोड़ने पर सरकार ने जांच बैठाई है इसके बाद चीज साफ होगी
उन्होंने कहा कि एक नागरिक के नाते किसी विषय को लेकर के हमारा मत अभीमत अलग हो सकता है, भिन्न हो सकता है लेकिन अगर हम सरकार के पार्ट हैं. एक संवैधानिक पद पर बैठे हैं. किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी आचार संहिता का पालन करना चाहिए और अगर ऐसा कुछ करना है तो पहले त्यागपत्र देकर अपना मत, अभीमत अलग करें.
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