Ganga Expressway: यूपी में बिछ रहा एक्सप्रेस-वे का जाल, जल्द बनेगा गंगा एक्सप्रेस-वे, मेरठ से बिहार तक का सफर भी हो जाएगा आसान
Ganga Expressway: गंगा एक्सप्रेस-वे राज्य का छठा और सबसे लंबा हाईवे होगा. गंगा एक्सप्रेसवे का प्रारंभिक बिंदु मेरठ जिले में एनएच 334 से है और यह जिला प्रयागराज में (एनएच -2) के बाईपास पर समाप्त होगा.

Ganga Expressway: उत्तर प्रदेश लगातार एक्सप्रेसवे से लैस हो रहा है. हाल ही में पीएम मोदी द्वारा उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया गया था. जल्द ही गंगा एक्सप्रेस-वे भी बनकर तैयार हो जाएगा. बता दें कि गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ में मेरठ-बुलंदशहर रोड (एनएच -334) पर बिजौली गांव से शुरू होने और प्रयागराज में एनएच -19 पर बाईपास के पास जुदापुर डांडो गांव में समाप्त होने के लिए प्रस्तावित 594 किलोमीटर लंबा, पूरी तरह से एक्सेस-नियंत्रित एक्सप्रेसवे होगा. इसे 2025 तक पूरा करने की योजना है.
गंगा एक्सप्रेस-वे की खासियत
- इसे मेरठ से प्रयागराज तक बनाया जाएगा.
- इसकी कुल लंबाई 594 किलोमीटर होगी.
- इसे बनाने में कुल लागत 41,544 करोड़ रुपये आएगी.
- यह 6 लेन एक्सप्रेसवे होगा, लेकिन इसे बढ़ाकर 8 तक किया जा सकता है.
12 जिलों को जोड़े गंगा एक्सप्रेस-वे
गंगा एक्सप्रेस-वे राज्य का छठा और सबसे लंबा हाईवे होगा. गंगा एक्सप्रेसवे का प्रारंभिक बिंदु मेरठ जिले में एनएच 334 से है और यह जिला प्रयागराज में (एनएच -2) के बाईपास पर समाप्त होगा.गंगा एक्सप्रेस-वे बन जाने से 12 जिलों को फायदा पहुंचेगा. इस एक्सप्रेस-वे से मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जिलों को जोड़ा जाएगा. गंगा एक्सप्रेस- वे के लिए 94 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है. दिसंबर में इसका शिलान्यास हो सकता है.
गंगा एक्सप्रेस-वे बन जाने से होंगे ये फायदे
- एक्सप्रेस-वे के बनने से पूरे देश के चहुंमुखी विकास का मार्ग प्रशस्त होगा.
- एक्सप्रेसवे के प्रवेश को नियंत्रित करने से ईंधन की खपत और प्रदूषण नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण बचत होगी.
- यह परियोजना कवर किए गए क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ कृषि, वाणिज्य, पर्यटन और की आय को बढ़ावा देगी.
- यह राज्य की राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी के साथ एक्सप्रेसवे द्वारा कवर किए गए क्षेत्रों में स्थित विभिन्न उत्पादन इकाइयों, विकास केंद्रों और कृषि उत्पादन क्षेत्रों को जोड़ने के लिए एक औद्योगिक गलियारे के रूप में सहायक होगा.
- एक्सप्रेस-वे के पास औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, शैक्षिक एवं प्रशिक्षण संस्थान, चिकित्सा संस्थान की स्थापना के भी अवसर प्राप्त होंगे.
- एक्सप्रेसवे हथकरघा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, भंडारण संयंत्र, मंडी और दूध आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा.
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