UP: मौत पर तकनीक का प्रहार! मिर्जापुर के 80 हॉटस्पॉट्स पर लगे 'लाइटनिंग अरेस्टर' बचा रहे हैं जान
योगी सरकार ने मिर्जापुर में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं. जागरूकता अभियान, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से 50% तक मौतों में कमी आई है.

योगी सरकार प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से जनहानि को न्यूनतम करने की दिशा में लगातार ठोस और वैज्ञानिक कदम उठा रही है. इसी के तहत मिर्जापुर में “लाइटनिंग रेज़िलिएंसी” यानी आकाशीय बिजली से सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया.
योगी सरकार के इस कदम से मिर्जापुर में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी, वहीं इसे न्यूनतम और शून्य करने की दिशा में काम किया जा रहा है. योगी सरकार का लाइटनिंग रेज़िलिएंसी माॅडल देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है. बता दें कि मिर्जापुर देश के सबसे अधिक बिजली प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है.
मिर्जापुर को जागरूकता अभियान से किया गया मजबूत
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मिर्जापुर (डीडीएमए) के अध्यक्ष/जिलाधिकारी मिर्जापुर पवन कुमार गंगवार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों को हर हाल में रोकने और न्यूनतम करने के निर्देश दिये थे. ऐसे में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूपीएसडीएमए) को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और जागरूकता अभियानों के साथ मजबूत किया गया.
मिर्जापुर में लाइटनिंग मिटिगेशन प्रोजेक्ट इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है. इसी का परिणाम है कि वर्ष 2024-25 और वर्ष 2025-26 में अब तक आकाशीय बिजली गिरने से मौतों की संख्या घटकर 14 रह गई, जबकि वर्ष 2019 में 30, वर्ष 2020 में 28, वर्ष 2021 में 23 और वर्ष 2022 में 30 लोगों की मौत बिजली गिरने से हुई थी.
वैज्ञानिक अध्ययन के बाद चिन्हित हुए ‘लाइटनिंग हॉटस्पॉट’
मिर्जापुर भौगोलिक संरचना, पथरीली जमीन और खनन कार्यों के चलते आकाशीय बिजली की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील जिला रहा है. ऐसे में बीते कुछ वर्षों में आकाशीय बिजली गिरने से कई लोगों की जान चली गयी. योगी सरकार ने मामले का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये. इस पर डीडीएमए मिर्जापुर द्वारा पिछले चार से पांच वर्षों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के परियोजना आंकलन, आईआईटीएम पुणे के वज्रपात गिरने के स्थलीय डाटा, आईआईटी रुड़की के पढ़े लोगों द्वारा किए गए शोध और सीआरओपीसी के द्वारा वज्रपात के परिप्रेक्ष में जनपद का किया गया संवेदनशीलता के परिप्रेक्ष्य में आंकलन के अनुसार पता लगाया गया कि अधिकांश मौतें खुले मैदान, पेड़ के नीचे, जल स्रोतों के पास और कच्चे मकानों में होती हैं. अध्ययन के बाद मिर्जापुर में लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप तैयार किया गया, जिसके आधार पर सुरक्षा उपाय तय किए गए.
80 स्थानों पर लगाए गए अर्ली स्ट्रीमर एमिशन के लाइटनिंग अरेस्टर
लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप के आधार पर पहले चरण में मिर्जापुर के चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों में 80 स्थानों पर अर्ली स्ट्रीमर एमिशन (ईoएसoई) आधारित लाइटनिंग अरेस्टर लगाए गए. बता दें कि ये उपकरण बिजली को सुरक्षित रूप से धरती में प्रवाहित कर देते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्र में जान-माल की हानि नहीं होती. कई अरेस्टर में लगे इंडिकेटर यह दर्शाते हैं कि उन्होंने कई बार बिजली को सफलतापूर्वक अवशोषित किया है.
पूरे जिले में चलाया गया वज्रपात सुरक्षा कार्यक्रम
योगी सरकार की रणनीति केवल तकनीक तक सीमित नहीं रही बल्कि ब्लॉक, जिला और ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए. ‘वज्रपात सुरक्षा कार्यक्रम’ के तहत अधिकारियों, ग्राम प्रधानों, लेखपालों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, युवाओं और आम नागरिकों को बिजली गिरने के दौरान क्या करें और क्या न करें, इसकी भी जानकारी दी गई. इसके साथ ही ‘दामिनी’ मोबाइल ऐप के माध्यम से समय से चेतावनी प्राप्त करने का प्रशिक्षण भी दिया गया.
इतना ही नहीं मिर्जापुर की सभी 809 ग्राम पंचायतों में माइकिंग, जागरूकता रथ, पोस्टर, वीडियो और पंचायत स्तरीय कार्यशालाओं के जरिए संदेश पहुंचाया गया. सिनेमा हॉलों में भी बिजली से बचाव पर आधारित वीडियो दिखाए गए. सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से आईएमडी द्वारा जारी चेतावनियों को तेजी से आमजन तक पहुंचाया गया. योगी सरकार के इन प्रयासों का ही नतीजा है कि मिर्जापुर में वर्तमान में आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौतों की संख्या में 50 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गयी, वहीं इसे शून्य करने की दिशा में काम किया जा रहा है.
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Source: IOCL


























