POCSO केस: शंकराचार्य को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत, समर्थकों ने मनाई होली | 10 बड़ी बातें
Shankaracharya Controversy: कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया और 12 मार्च तक लिखित प्रस्तुति मांगी. कोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य के समर्थकों ने जश्न मनाया.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिगों के यौन शोषण मामले में अविमुक्तेश्वरानंद को राहत दी है. कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर आदेश सुरक्षित करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. यह आदेश जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने शुक्रवार (27 फरवरी) की शाम लगभग एक घंटे से ज्यादा समय तक चली सुनवाई के बाद दिया.
सुनवाई के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार, अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता ब सुधांशु कुमार, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, शासकीय अधिवक्ता पतंजलि मिश्र व एजीए प्रथम रूपक चौबे ने पक्ष रखा जबकि आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से रीना एन सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अपने तर्क प्रस्तुत किए.
अविमुक्तेश्वरानंद को जांच में सहयोग करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से आरोपों को गलत बताया गया और कहा गया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है. राज्य सरकार की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया गया. सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित कर लिया और अविमुक्तेश्वरानंद व मुकुंदानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी. साथ ही मामले की जांच जारी रखने और अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया.
12 मार्च तक लिखित प्रस्तुतियां देने के आदेश
कोर्ट ने यह भी कहा कि पक्षकारों के अधिवक्ता 12 मार्च तक लिखित प्रस्तुतियां और मामले के कानून दाखिल कर सकते हैं. कोर्ट ने आवेदकों के वकील को निर्देश दिया है कि वो सप्लीमेंट्री एफिडेविट की कॉपी शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के वकील को सौंप दें.
21 फरवरी को झूंसी में दर्ज हुआ था केस
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर स्पेशल जज (POCSO एक्ट) ने 21 फरवरी को झूंसी थाना पुलिस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू करने का आदेश दिया था. झूंसी पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले में तफ्तीश शुरू कर दी है. पुलिस ने पीड़ितों का बयान लिया है और मेडिकल भी कराया है.
सुनवाई से पहले खचाखच भर गया था कोर्ट
माघ मेला और महाकुंभ में नाबालिगों के साथ कुकर्म का आरोप स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगी स्वामी मुकुंदानंद और तीन अज्ञात के खिलाफ है. सुनवाई से पहले ही कोर्ट नंबर 72 खचाखच भर गई थी. बचाव पक्ष ने एक पीड़ित को नाबालिग बताया. पीड़ितों की तरफ से अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया गया.
अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने आशुतोष ब्रह्मचारी को बताया 'अपराधी'
याची अधिवक्ता का कहना था कि मध्य प्रदेश व प्रयागराज में कथित शोषण का आरोप लगाया गया है. पीड़ित हरदोई में नियमित छात्र हैं. मार्कशीट के अनुसार उनमें से एक बालिग है. वे आश्रम के छात्र भी नहीं है. शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी खुद कई अपराधों में लिप्त हैं. उसका आपराधिक इतिहास भी है.
मार्च के तीसरे हफ्ते में आएगा फैसला
सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने अर्जी की पोषणीयता पर भी आपत्ति जताई. राज्य सरकार व शिकायतकर्ता की तरफ से अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत अर्जी का पुरजोर विरोध किया. इस मामले में फैसला मार्च के तीसरे हफ्ते में आ सकता है.
अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों ने मनाया जश्न
जैसे ही यह आदेश की जानकारी मठ पर पहुंचे लोगों को मिली, वाराणसी के श्रीविद्या मठ पर पहुंची गुजराती महिलाओं ने गरबा नृत्य करके अपना उत्साह व्यक्त किया. इस दौरान वह भजन गाकर इस फैसले पर खुशी जताते हुए नजर आईं. बातचीत के दौरान भी उन्होंने कहा कि आज सत्य की जीत हुई है.
'अपने आपको अकेला न समझें अविमुक्तेश्वरानंद'
नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में आज ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद जी सरस्वती की तपोभूमि और समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा. शंकराचार्य आश्रम परिसर से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में स्थानीय लोगों ने मौन जुलूस निकाला. हाथों में तख्तियां और मन में आस्था लिए लोगों ने शांतिपूर्वक मार्च करते हुए एकजुटता का संदेश दिया. जुलूस में शामिल लोगों का कहना था कि शंकराचार्य अपने आप को अकेला न समझें, पूरा क्षेत्र उनके साथ खड़ा है.
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Source: IOCL























