UCC का संजय निषाद ने किया समर्थन, कहा- महिलाओं को होगा सबसे ज्यादा फायदा
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने UCC के समर्थन में डॉ. भीमराव आंबेडकर का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने हिंदू कोड बिल के मुद्दे पर इस्तीफा दिया था

उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासत तेज होती दिख रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू किए जाने के बयान का यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि देश में समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए, क्योंकि इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे.
मंत्री संजय निषाद ने कहा कि UCC का सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं को मिलेगा. उनके मुताबिक, आज भी अलग-अलग पर्सनल लॉ में महिलाओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठते हैं. समान नागरिक संहिता लागू होने से महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान मिल सकेगा.
डॉ. आंबेडकर भी भेदभाव के खिलाफ थे- संजय निषाद
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने UCC के समर्थन में डॉ. भीमराव आंबेडकर का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने हिंदू कोड बिल के मुद्दे पर इस्तीफा दिया था और उनका उद्देश्य महिलाओं तथा वंचित वर्गों के अधिकारों को मजबूत करना था. मंत्री ने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव खत्म होना चाहिए. उनके मुताबिक UCC लागू होने से अलग-अलग जाति और धर्म के लोगों के लिए नागरिक मामलों में समान कानून की व्यवस्था हो सकेगी.
संजय निषाद ने UCC का विरोध करने वालों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इसका विरोध करने वालों को महिलाओं के समान अधिकार के सवाल पर विचार करना चाहिए. उनके मुताबिक समान कानून से हर धर्म और वर्ग की महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिल सकता है.
मुस्लिम पक्ष बोला- UCC की जरूरत नहीं
वहीं, इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के प्रवक्ता मौलाना सूफियान निजामी ने UCC की जरूरत से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि भारत अलग-अलग धर्मों और समुदायों को मानने वाला देश है और यहां अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं.
मौलाना सूफियान निजामी के मुताबिक, विभिन्न समुदाय देश के कानून के दायरे में रहते हुए अपने पर्सनल लॉ का पालन करते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को UCC जैसे मुद्दे के बजाय रोजगार, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा जैसी बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश में पहले से कई गंभीर समस्याएं हैं, जिनके समाधान पर सरकार को काम करना चाहिए. उनके मुताबिक UCC की चर्चा से अनावश्यक विवाद पैदा हो सकता है.
क्या है UCC?
वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला के मुताबिक, समान नागरिक संहिता का संवैधानिक आधार संविधान के अनुच्छेद 44 में मिलता है. यह नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है, जिसमें राज्य से नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है. UCC के दायरे में मुख्य रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और परिवार से जुड़े नागरिक कानून जैसे विषय आ सकते हैं. समर्थकों का तर्क है कि इससे अलग-अलग समुदायों के लिए अलग पर्सनल लॉ की जगह समान नागरिक नियम लागू होंगे. वहीं, विरोध करने वालों का कहना है कि अलग-अलग धार्मिक समुदायों के पर्सनल लॉ और धार्मिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखना जरूरी है. खासतौर पर मुस्लिम संगठनों की ओर से यह आशंका जताई जाती रही है कि UCC का असर उनके धार्मिक पर्सनल लॉ पर पड़ सकता है.
2011 की जनगणना में यूपी में किस वर्ग की कितनी आबादी?
वर्ग/समुदाय अनुमानित आबादी
OBC 40–50%
दलित (SC) 20.7%
सवर्ण करीब 18–20%
मुस्लिम 19.26%
ST 0.57%
अन्य करीब 1–2%





















