साध्वी प्रज्ञा के समर्थन में आया संत समाज, दिग्विजय सिंह पर भड़के साधू-संत
भोपाल से भाजपा की प्रत्याशी बनने के बाद एकाएक फिर से सुर्खियों में आई मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा नामांकन से पहले ही अपने बयानों से विवादों में आ गयी।

हरिद्वार,एबीपी गंगा। भाजपा की भोपाल से प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा की हेमंत करकरे और बाबरी ढांचे को लेकर दिए गए बयान से ज्यादातर साधु संत भी सहमत नहीं हैं। राजनीति से लेकर संत समाज तक में साध्वी प्रज्ञा चर्चा का विषय बनी हुई हैं। संत समाज से जुड़े कुछ संत साध्वी के बयानों को लेकर उनसे सहमत नहीं है, वहीं कुछ संत खुलकर साध्वी के बचाव में आ गए हैं।
भोपाल से भाजपा की प्रत्याशी बनने के बाद एकाएक फिर से सुर्खियों में आई मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा नामांकन से पहले ही अपने बयानों से विवादों में आ गयी। आतंकियों के हाथों शहीद हुए तत्कालीन एटीएस चीफ हेमंत करकरे को अपने श्राप के कारण मारे जाने के बयान के बाद तो साध्वी प्रज्ञा का बहुत विरोध हुआ। अभी हेमंत करकरे पर दिए बयान पर विवाद चल ही रहा था कि अचानक ही बाबरी ढांचा ढहाने की बात कहकर साध्वी प्रज्ञा का नामांकन ही खतरे में पड़ सकता है। अपने बयानों के बाद विरोध झेल रही प्रज्ञा के बचाव में जूना अखाड़े के थानापति महंत रविंद्रानंद सरस्वती सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि सोची समझी साजिश के तहत कुछ लोग फूट डालो और राज करो की नीति पर चल रहे हैं।
साध्वी पर जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं वह सरासर गलत हैं। उन्होंने कहा कि कुछ विशेष संप्रदाय के लोगों को खुश करने के लिए साध्वी के खिलाफ बयानबाजी की जा रही है। इन लोगों में हिम्मत नहीं है कि वह देश में आतंक फैलाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकें। उन्होंने कहा कि अब यह हिंदू समाज की जिम्मेदारी है कि जिन लोगों ने हिंदू समाज को बदनाम करने की कोशिश की उनके खिलाफ साध्वी प्रज्ञा को वोट देकर भारी मतों से विजयी बनाये। उन्होंने कहा कि संत समाज का पूरा आशीर्वाद साध्वी प्रज्ञा के साथ है। यदि कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह संतो के चरणों में आकर माफी मांगते हैं तभी उन्हें माफ किया जाएगा।
अखाड़ा परिषद के पूर्व प्रवक्ता बाबा हठयोगी ने भी साध्वी का समर्थन किया है। उनका कहना है कि एक निर्दोष व्यक्ति को यदि सताया जाता है या उसे सजा मिलती है तो उसकी पीड़ा सामने आती है। उन्होंने कहा कि चुनाव ही एक ऐसा समय है जिस समय जनता किए गए अन्याय का बदला लेती है और जिस दिग्विजय सिंह के सामने साध्वी प्रज्ञा चुनाव लड़ रही हैं यह वही दिग्विजय सिंह है जिसके द्वारा साध्वी को बम ब्लास्ट की साजिश में फंसाया गया और हिन्दू आतंकवाद का शब्द गढ़ा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी सत्ता की चाटुकारिता करते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर कहती है कि करकरे ने ही सबसे ज्यादा उन्हें टॉर्चर किया था तो कभी-कभी मन से उनकी पीड़ा निकल आती है। उन्होंने कहा कि भगवान के यहां सभी का न्याय होता है। उन्होंने कहा कि जिस समय बाबरी मस्जिद ढहाई गयी उस समय साध्वी का भी उस में भाग लेने का काफी मन रहा होगा। प्रेमानंद सरस्वती का कहना है कि राजनीति कितनी गंदी हो गई है कि सिर्फ एक दूसरे के ऊपर कीचड़ उछाला जा रहा है। लेकिन यदि हिंदुत्व के लिए किसी ने काम किया है तो विजय अवश्य मिलेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शहीदों के लिए किसी तरह की कोई बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो समाज के लिए काम करेगा जनता उसे ही विजय बनाएगी बाकी जनता सब जानती है।
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Source: IOCL

























