2027 की राह राजकिशोर सिंह के लिए नहीं आसान! एक अनुमति से बिगड़ेंगे सारे समीकरण?
यूपी के पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.EOW जांच में उनकी भूमिका सामने आई है. अब शासन की स्वीकृति का इंतजार है.

उत्तर प्रदेश के पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में तत्कालीन पशुधन विकास मंत्री राजकिशोर सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. तत्कालीन प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा पूर्व मंत्री की तरफ से भी बढ़ रहा है. अगर जांच का दायरा बढ़ा तो फिलहाल बस्ती जिले की हर्रैया सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे राजकिशोर सिंह के लिए साल 2027 के चुनाव में राह मुश्किल हो सकती है.
आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) की जांच में उनकी भूमिका भी सामने आई है. मामले में उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के लिए करीब तीन साल पहले शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है. हालांकि अगर ये अनुमति मिली तो हर्रैया से दावेदारी कर रहे राजकिशोर सिंह के कई समीकरण बिगड़ सकते हैं.
समाजवादी पार्टी की 2012 से 2017 तक सरकार थी. इस दौरान वर्ष 2014 में पशुधन प्रसार अधिकारियों की भर्ती निकली थी. 17 मंडलों में 1198 पदों पर भर्ती होनी थी. भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों में बदलाव कर चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया. जांच में तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह और प्रमुख सचिव योगेश कुमार की भूमिका की भी पड़ताल की गई. भर्ती नियमों में संशोधन से जुड़े दस्तावेजों पर दोनों के हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है.
मुख्यालय स्तर पर तय हुई मेरिट
34 अभ्यर्थियों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में सामने आया कि भर्ती के नियमों में संशोधन के बाद मंडल स्तर पर होने वाली चयन प्रक्रिया के बजाय ओएमआर शीट का मूल्यांकन मुख्यालय स्तर पर कराया गया. इसके बाद केंद्रीयकृत मेरिट तैयार की गई. इस मामले में तत्कालीन प्रमुख सचिव और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को EOW पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. वही, इस मामले में 22 अधिकारियों के खिलाफ पहले अभियोजन की अनुमति दी जा चुकी थी.
कोर्ट में अपील के बाद मामले की एसआईटी गठित हुई थी. जिसकी विवेचना में 22 और आरोपियों के नाम सामने आए. अब तक 25 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं हुई है. जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाया गया था, लेकिन लंबे समय के कारण कार्रवाई का मामला जटिल हो गया है.
ये है मामला
भर्ती प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर की गई अनियमितताओं को लेकर 34 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी. इसके बाद 21 दिसंबर 2017 को हाईकोर्ट ने विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने का आदेश दिया. जांच के बाद जनवरी 2019 में छह लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया.
इसमें तत्कालीन निदेशक पशुधन डॉ. रुद्र प्रताप सिंह, तत्कालीन संयुक्त निदेशक पीके त्रिपाठी, तत्कालीन अपर निदेशक जीएन सिंह, अधिकारी चरण सिंह यादव और रायबरेली के फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के प्रशासनिक अधिकारी मोहम्मद इशरत समेत अन्य लोगों के नाम शामिल थे.
राजकिशोर का ये रहा सफर
पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह ने छात्र राजनीति से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था. वर्ष 1990-91 में वह बस्ती के एपीएन कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे. वर्ष 2002 में बसपा के टिकट पर हर्रैया सीट से पहली बार विधायक बने और मायावती सरकार में मंत्री रहे. 2003 में सपा में शामिल होने के बाद मुलायम सिंह यादव सरकार में भी मंत्री बने. 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में हर्रैया सीट से जीत दर्ज की.
अखिलेश यादव सरकार में उन्हें पशुधन विकास, उद्यान और पंचायती राज समेत कई विभागों की जिम्मेदारी मिली. वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद वह अप्रैल 2019 में कांग्रेस में शामिल हुए और बस्ती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और हार गए. तीन मई 2024 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए थे.
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