प्रयागराज के बड़े राजनीतिक सवाल और कैसी राजनीति चाहता है ये शहर
2019 के चुनाव में प्रयागराज की दोनों सीटों इलाहाबाद और फूलपुर में स्थानीय स्तर के कोई बड़े मुद्दे नहीं हैं, पूरा चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों और जातीय समीकरणों पर ही होने की उम्मीद है।

प्रयागराज, एबीपी गंगा। उत्तर प्रदेश की वीवीआईपी सीट प्रयागराज में लोकसभा की दो सीटें हैं- फूलपुर और इलाहाबाद, जबकि यहां की दो विधानसभा सीटें भदोही संसदीय सीट में आती हैं। खास बात ये है कि इस चुनाव में प्रयागराज की दोनों सीटों पर स्थानीय स्तर के कोई बड़े मुद्दे नहीं हैं, पूरा चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों और जातीय समीकरणों पर ही होने की उम्मीद है।
रोजगार के नाम पर नाराज युवा, लेकिन...
रोजगार के सवाल पर युवाओं में मौजूदा मोदी सरकार से थोड़ी नाराजगी रूर है, लेकिन भ्रष्टाचार- महंगाई को काबू में रखने और पकिस्तान के खिलाफ हुई सर्जिकल व एयर स्ट्राइक से खुश होकर एक तबका मोदी को दोबारा सत्ता में देखना चाहता है। यहां बड़ी संख्या में वोटर जातीय आधार पर वोट डालने की तैयारी में हैं, ऐसे में गैर यादव ओबीसी वोटर निर्णायक भूमिका में होंगे।
...तो बीजेपी को फायदा होगा
अगर स्थानीय स्तर पर विकास को लेकर वोट पड़े तो बीजेपी को थोड़ा फायदा पहुंच सकता है, क्योंकि पिछले दो सालों में शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक में काफी काम हुए हैं। प्रियंका के मोर्चा संभालने के बावजूद कांग्रेस के लिए इस बार भी कोई उम्मीद की किरण फिलहाल नजर नहीं आ रही है। दोनों ही सीटों पर बीजेपी और सपा-बसपा गठबंधन में सीधी लड़ाई होने की उम्मीद है। उम्मीदवारों के चेहरे की बजाय इस बार पार्टियों के आधार पर ही ज़्यादा वोट पड़ने की संभावना है। इस चुनाव में फिलहाल किसी पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष में कोई लहर नहीं है, ऐसे में बाजी किसके हाथ लगेगी, दावे से कह पाना थोड़ा मुश्किल होगा।
मैदान में कौन?
बीजेपी ने इलाहाबाद की पूर्व मेयर रह चुकीं और योगी सरकार में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को यहां से अपना प्रत्याशी बनाया है। आम आदमी पार्टी ने किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर भवानी मां पर बड़ा दांव चलते हुए इलाहाबाद के चुनावी दंगल में उतारा है। फिलहाल कांग्रेस और गठबंधन ने इस सीट से अपने पत्ते नहीं खोले हैं।























