मोदी के 12 साल: उत्तराखंड में सड़क, रेल और हवाई सेवाओं की कायापलट
PM Modi New Record: एक वक्त था जब उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में रहने वाले लोगों के लिए हवाई जहाज देखना भर एक अनुभव था. आज हालात बदले हैं. जॉलीग्रांट, पंतनगर और पिथौरागढ़ तीनों बड़े एयरपोर्ट का विस्तार हो चुका है.

जब 2014 में नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी, तब उत्तराखंड की तस्वीर कुछ और थी. चारधाम जाने वाली सड़कें संकरी और खतरनाक थीं, पहाड़ के दूरदराज के गांवों तक पहुंचना किसी मुश्किल सफर से कम नहीं था, और हवाई सेवा आम आदमी के लिए सपने जैसी चीज थी. 12 साल बाद आज जब पीछे मुड़कर देखें तो बदलाव साफ नजर आता है.
उत्तराखंड में सड़क संपर्क की बात करें तो सबसे बड़ा नाम है चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना. दिसंबर 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने इसका शिलान्यास किया था. करीब 12,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. अब बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री चारों धामों तक साल भर आवाजाही संभव हो रही है. पहले बरसात में रास्ते बंद होते थे, यात्री फँसते थे अब वह तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है.
इससे भी बड़ा बदलाव लाई है दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना. 11,963 करोड़ रुपये की लागत से बने 210 किलोमीटर लंबे इस हाईवे ने दो शहरों के बीच की दूरी को वक्त के लिहाज से सिकोड़ दिया है. जो सफर पहले पाँच से छह घंटे लेता था, वह अब ढाई घंटे में पूरा होता है. देहरादून और दिल्ली के बीच यह बदलाव सिर्फ यात्रा का नहीं व्यापार, पर्यटन और रोजगार का भी है.
इसके अलावा सितारगंज-टनकपुर, पौंटा साहिब-देहरादून, भानियावाला-ऋषिकेश, काठगोदाम-लालकुआँ-हल्द्वानी बाईपास और रुद्रपुर बाईपास जैसी परियोजनाओं पर भी काम जारी है.
आम आदमी ने भरी उड़ान हेलीपोर्ट से हवाई अड्डे तक
एक वक्त था जब उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में रहने वाले लोगों के लिए हवाई जहाज देखना भर एक अनुभव था. आज हालात बदले हैं. जॉलीग्रांट, पंतनगर और पिथौरागढ़ तीनों बड़े एयरपोर्ट का विस्तार हो चुका है. देहरादून से अब अहमदाबाद, मुंबई, कोलकाता, बैंगलोर, पुणे, जयपुर, लखनऊ और कुल्लू समेत एक दर्जन से ज्यादा शहरों के लिए सीधी उड़ानें हैं.
केंद्र सरकार की उड़ान योजना ने आम आदमी को भी हवाई यात्रा से जोड़ा है. इसके तहत प्रदेश में 18 हेलीपोर्ट विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 12 पर सेवाएँ शुरू हो चुकी हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री उड़न खटोला योजना के जरिए देहरादून और हल्द्वानी से पर्वतीय जिलों के लिए हेली सेवा भी शुरू कराई है ताकि वे लोग भी जुड़ सकें जहाँ सड़क अभी भी पहुंच नहीं पाई.
पहाड़ में गूंजेगी रेल की सीटी
उत्तराखंड में रेल की बात हमेशा से अधूरी रही है. हरिद्वार, देहरादून, काठगोदाम रेल इन्हीं तक सिमटी थी. लेकिन अब यह बदलने वाला है. ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन 125 किलोमीटर लंबी यह परियोजना उत्तराखंड के इतिहास में मील का पत्थर बनेगी. इसका 72 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है. पहाड़ों को चीरते हुए बनाई जा रही सुरंगें और पुल यह सब देखकर पुराने पहाड़ी लोगों को भी यकीन नहीं होता.
इसके अलावा टनकपुर-बागेश्वर और डोईवाला से गंगोत्री-यमुनोत्री तक रेल लाइन के सर्वे को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है. प्रदेश के 11 रेलवे स्टेशनों को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत नया रूप दिया जा रहा है.
धामी बोले स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा यह दौर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा — "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल उत्तराखंड के विकास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा. विगत 12 वर्षों में हर तरह की कनेक्टिविटी मजबूत हुई है. अब प्रदेश के किसी भी हिस्से से कुछ घंटों में बड़े शहरों तक पहुंच संभव है."
























