आगरा हेल्थ इमरजेंसी की ओर, आक्सीजन किल्लत से लेकर ICU और वेंटिलेटर ना मिलने से बढ़ रही दिक्कतें
आगरा में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं, अस्पतालों में बेड खाली नहीं है. इसके अलावा गंभीर मरीजों के लिये आक्सीजन की किल्लत बढ़ती जा रही है. हालात बेहद खराब हैं.

आगरा. कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों के इलाज पर संकट मंडराने लगा है. एसएन मेडिकल कॉलेज के कोविड हॉस्पिटल के सघन चिकित्सा कक्ष आइसीयू में बेड फुल हैं, मरीजों के लिए वेंटीलेटर नहीं हैं. वहीं, 40 मरीज आक्सीजन सपोर्ट पर हैं. इससे हर रोज लिक्विड आक्सीजन प्लांट भरवाना पड़ रहा है. कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या 796 पहुंच गई है. इसमें से एसएन के पुराने कोविड हॉस्पिटल के आइसीयू में 24 गंभीर मरीज सहित 100 मरीज भर्ती हैं. यहां वेंटीलेटर खाली नहीं हैं. नए कोविड हॉस्पिटल में 17 मरीज भर्ती हैं. एसएन इमरजेंसी में कोरोना के 15 गंभीर मरीज भर्ती हैं. इन मरीजों को कोविड हॉस्पिटल में शिफ्ट कराने के लिए कोविड हॉस्पिटल में बेड और आक्सीजन का इंतजाम किया जा रहा है. वहीं, कोविड के तीन निजी अस्पताल हैं.
इन तीन अस्पतालों में 100 से अधिक मरीज हैं. यहां मरीज भर्ती करने के बाद तबीयत बिगडने पर एसएन रेफर किए जा रहे हैं. प्राचार्य डॉ संजय काला ने बताया कि आइसीयू में 24 गंभीर मरीज वेंटीलेटर पर हैं. इसके साथ ही 40 मरीज आक्सीजन सपोर्ट पर हैं. इन्हें हाई फ्लो नैजल कैनुला एचएफएनसी से 40 लीटर प्रति मिनट आक्सीजन दी जा रही है. इससे आक्सीजन की भी कमी होने लगी है. इसे देखते हुए हर रोज लिक्विड आक्सीजन प्लांट भरवाया जा रहा है, पहले दो दिन में एक बार प्लांट भरवाया जाता था. लिक्विड आक्सीजन सप्लाई करने वाली नोएडा की एजेंसी से भी बात की गई है, प्लांट की क्षमता बढाई जा रही है, इसमें एक सप्ताह का समय लग सकता है. हमने 3 ऑक्सीजन जनरेटर के लिए शासन को लिखा है. एक ऑक्सीजन जनरेटर की कीमत डेढ़ करोड़ के करीब है.
एसएन में रखे हैं 34 वेंटीलेटर, नहीं आ रही कंपनी
एसएन में शासन से 34 वेंटीलेटर की आपूर्ति की गई है, ये नए 100 बेड के कोविड हॉस्पिटल में इंस्टॉल किए जाने हैं. इन वेंटीलेटर का एचएफएनसी की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है. वेंटीलेटर एक सप्ताह पहले आ चुके हैं. मगर, इन्हें इंस्टॉल करने के लिए कंपनी के कर्मचारी नहीं आए हैं. इससे भी वेंटीलेटर की कमी होने लगी है.
जिला अस्पताल में कोविड हॉस्पिटल शुरू होने में लगेगा समय
एल थ्री लेवल का एसएन मेडिकल कॉलेज में ही सरकारी कोविड हॉस्पिटल है. कोरोना के नए केस बढ़ने के बाद जिला अस्पताल में एल टू लेवल का 60 बेड का कोविड हॉस्पिटल तैयार कराया जा रहा है, मगर, इसमें अभी समय लगेगा.
इसके साथ ही आगरा के तीनों निजी अस्पतालों रामरघु अस्पताल, प्रभा और नयती हॉस्पिटल में भी ऑक्सीजन की कमी छन छन कर बाहर आने लगी हैं. हालांकि हॉस्पिटल प्रशासन खुलकर बोलने से अभी कतरा रहा हैं. रामरघु अस्पताल में बीते 5 सितंबर को अभी हाल ही में 86 साल के कोरोना पीड़ित रहे भजन शर्मा की मौत हो गई थी, जिस पर परिजनों ने जमकर हंगामा काटा था.
आगरा में ऑक्सीजन की बढ़ती किल्लत को लेकर रेनबो हॉस्पिटल के मुखिया डॉ नरेंद्र मलहोत्रा कहते हैं कि स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं है और इसकी किल्लत बढ़ने वाली है. बढ़े हॉस्पिटल फिर भी व्यवस्था कर ले रहे हैं, लेकिन छोटे हॉस्पिटल ऑक्सीजन की भारी किल्लत झेल रहे हैं. कुल मिलाकर कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ ही गैस सिलेंडर की सप्लाई कम हो रही है और आगरा में पर्याप्त वेंटिलेटर भी नहीं है.
एबीपी गंगा ने जब रेनबो हॉस्पिटल के गैस प्लांट का निरीक्षण किया तो पाया कि वहां ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट जरूर लगा है लेकिन सिलेंडर सप्लाई जो नोएडा और फरीदाबाद से आती है, वहां से शार्टेज हो रही है, यानी ऑक्सीजन की किल्लत वहां भी है.
10 गुना बढ़ी ऑक्सीजन की डिमांड
आगरा में एसएन मेडिकल कॉलेज के अलावा निजी हॉस्पिटल में कोविड-19 के संक्रमित मरीजों का उपचार चल रहा है. इसके चलते इन हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन की डिमांड दस गुना ज्यादा बढ़ गई है. ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होने से तमाम निजी हॉस्पिटल में गंभीर मरीजों को भर्ती करने पर रोक लगा दी है.
इसको लेकर सीएमओ डॉ आरसी पांडेय का कहना है कि बीते दिनों में ऑक्सीजन की किल्लत बढ़ी है. इस बारे में सभी प्रयास किए जा रहे हैं, और हमारी पूरी कोशिश है कि किसी भी स्तर पर ऑक्सीजन सप्लाई बाधित ना हो.
वहीं, निजी अस्पताल भी कोविड ट्रीटमेंट के नाम पर मनमानी पर उतर आए हैं. आगरा के नामी गिरामी अस्पताल नयति में मरीजों से शासनादेश के विपरीत कई गुना दाम वसूले जा रहे हैं. आज ऐसा ही मामला देखने को मिला जब रामजी लाल नाम के मरीज़ को नयती अस्पताल में भर्ती कराया गया, और 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए और परिजनों को 54 हजार का बिल थमा दिया गया. जबकि नियमानुसार पेशेंट एल टू कैटेगरी का था और उसका 10 हजार से ज्यादा बिल नहीं बनना चाहिए था.
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Source: IOCL
























