UP News: अयोध्या के थे नूंह एक्सीडेंट में जान गंवाने वाले कुलदीप सिंह, परिवार ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी
Rolls Royce Accident: नूंह में रॉल्स रॉयस कार और टैंकर की टक्कर में जान गंवाने वाले कुलदीप सिंह के भाई अमरदीप का कहना है कि पोस्टमार्टम से पहले फ्रीजर में रखी बॉडी उसी से निकलवाई गई.

Rolls Royce-Truck Accident: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) पर हरियाणा (Haryana) के नूंह (Nuh) में रॉल्स रॉयस (Rolls-Royce) कार ने टैंकर को टक्कर मारी थी. इस हादसे ड्राइवर और उसके साथ बैठे सुपरवाइजर की मौत हो गई थी. 22 अगस्त को उमरी गांव के पास हुए इस हादसे में मरने वाले सुपरवाइजर कुलदीप सिंह उत्तर प्रदेश (UP) के अयोध्या (Ayodhya) के महराजीपुर गांव के रहने वाले थे. दुर्घटना के बाद इस परिवार के साथ हरियाणा में क्या कुछ हुआ वह दिल दहला देने वाला है. 35 साल केकुलदीप सिंह पिछले 17 सालों से इफको इंफ्राटेक कंपनी में काम कर रहे थे और अब सुपरवाइजर थे.
घटना के बाद पहुंचने वाले उनके भाई जो कुछ कहते हैं उसे पर सहज विश्वास करना मुश्किल होता है. अगर विश्वास कर भी लें तो सिस्टम और मानवता दोनों पर बड़े सवाल खड़े हो जाते हैं. कुलदीप के भाई अमरदीप कहते हैं 22 अगस्त को लगभग 11:30 बजे यह घटना घटती है और अगले दिन 23 अगस्त को दोपहर में उन्हें पोस्टमार्टम के पेपर दिए जाते हैं. पोस्टमार्टम करने से पहले फ्रीजर में रखी उसके भाई की बॉडी उसी से निकलवाई जाती है. यही नहीं पोस्टमार्टम टेबल तक पर भी उसी से बॉडी रखवाई जाती है, उस समय उनके शरीर पर महज अंडरवियर था. पोस्टमार्टम के बाद वह एक कपड़ा कफन के लिए मांगते रहे लेकिन वह भी नहीं मिला लिहाजा खून से सना एक कपड़ा लपेट कर उन्होंने शव को बाहर निकाला.
बदतमीजी का भी लगाया आरोप
अमरदीप ने बताया, "पोस्टमार्टम के लिए हमें 11:00 के आसपास पेपर दिए गए. जब पोस्टमार्टम करवाने गए तो वहां की दशा इतनी खराब थी, इतनी बदतमीजी हम लोगों के साथ हो रही थी, अपने हाथ से अपने भाई की बॉडी निकलवाई गई. फ्रीजर से वह अंडरवियर में थे. हमने कहा कि कफन दे दीजिए, कफन तक नहीं दिए, तब जाकर एक कपड़ा लपेटा गया. वह खून से पूरा सना हुआ था. किसी तरह मैंने कपड़े को लगाया लेकिन जब हमको बदबू आने लगी तो हट गया. छोटे चाचा का लड़का था, फिर उन्होंने बॉडी को उठवाया और पोस्टमार्टम हाउस में ले गए."
अमरदीप ने आगे बताया कि उनसे जहां पर पोस्टमार्टम ऑपरेट होता है, वहां पर बॉडी रखवाई गई. फिर बॉडी उठवाई भी गई. एंबुलेंस का भी इंतजाम नहीं करने दिया गया और बोला गया कि आप हटाइए, अब हरियाणा सरकार से यही मांग करते हैं उचित न्याय करें क्योंकि कुछ हो नहीं रहा हैआज तक हरियाणा सरकार की तरफ से किसी ने, न ही प्रशासन न ही पुलिस ने संपर्क किया है.
'हमारा तो कोई सहारा नहीं है'
कुलदीप सिंह अपने पीछे सात लोगों का परिवार छोड़ गए हैं जो बहुत कुछ उन्हीं पर निर्भर था. उनकी तीन बेटियों में सबसे बड़ी बेटी 12 साल की है. बूढ़े माता-पिता बेटे की असमय मौत से सदमे में हैं तो पत्नी अनुपम के गले से जितने शब्द नहीं निकलते उससे अधिक दर्द आंखों से आंसू बनकर बहता है. बहते आंसुओ के बीच वह महज इतना कहती है कि उन्हें घटना के बाद भी कुछ पता नहीं चला न कंपनी से कोई फोन आया और न ही कोई जानकारी अब उनका और उनकी बच्चियों का क्या होगा?
कुलदीप की पत्नी अनुपम का कहना है कि कंपनी वालों ने कोई संपर्क नहीं किया, मेरे तीन-तीन बच्चे हैं और उनका जब एक्सीडेंट हुआ तब भी उन लोगों ने फोन नहीं किया, हम क्या मांग करें, मेरे तीन बच्चे हैं उनकी शादी और पढ़ाई लिखाई हम कहां से करेंगे, हमारा तो कोई सहारा नहीं है. अपनी सहारे को गवां चुका परिवार सबसे अधिक हरियाणा के सरकारी सिस्टम के व्यवहार से दुखी हैं, वह अब यूपी सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगा रहा है.
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Source: IOCL






















