नेपाल बाढ़ के बाद यूपी और बिहार में हाई अलर्ट, उफान पर नदियां, गंडक बैराज से छोड़ा गया पानी
नेपाल में आई बाढ़ के बाद बिहार, यूपी और उत्तराखंड सरकारों ने आवश्यक कदम उठाये हैं. इन सरकारों ने सभी संबंधित टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है. जानें बाढ़ के संभावित खतरों को लेकर क्या-क्या है तैयारी.

नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को अचानक आई बाढ़ में कम से कम 162 लोगों की मौत हो गई, जबकि भारतीयों सहित कई अन्य लोगों के लापता होने की खबरें हैं. बाढ़ के बाद नेपाल द्वारा भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने की संभावना को देखते हुए यूपी और बिहार अलर्ट मोड पर हैं. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्च स्तरीय बैठकें की. दोनों प्रदेशों की सरकार एहतियाती और संभावित निकासी उपायों का जायजा लेने के बाद क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं उसपर काम कर रही हैं.
चूंकि नेपाल से कई नदियां यूपी और बिहार में आती हैं और वहां के हालातों को देखते हुए दोनों सरकारें एहतियातन कदम उठा रही हैं. इसके अलावा उत्तराखंड के सीमावर्ती जिले चंपावत में सतर्कता बढ़ा दी गई गई है और लोगों को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है.
सीतापुर में भारी बारिश के चलते स्कूल बंद, यूपी के 33 जिलों में अलर्ट
बिहार सरकार ने जारी किए दिशा-निर्देश
दरअसल, नेपाल से बिहार में बहने वाली प्रमुख नदियों में गंडक, कोसी, बागमती, कमला बलान, लाल बकेया और महानंदा शामिल हैं. इनमें पहले ही मानसून की बारिश के कारण पानी का स्तर बढ़ा हुआ है और कई तो खतरे के निशान से उपर बह रही हैं. अब नेपाल में आई बाढ़ बिहार में स्थिति को बिगाड़ सकती है. इनमें भी सबसे प्रमुख गंडक और कोसी नदी है, जो बाहर में बाढ़ की स्थिति ला सकती है.
नेपाल में आये बाढ़ के बाद गंडक में पानी का स्तर बढ़ गया है. नेपाल से अचानक भारी मात्रा में पानी आने की संभावना को देखते हुए बिहार सरकार ने एहतियाती कदम के तौर पर वाल्मीकि नगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए हैं और गंडक नदी बेसिन में भी चेतावनी जारी की है. रिपोर्टस के मुताबिक, जल संसाधन विभाग ने सभी संबंधित कर्मचारियों, इंजीनियरिंग स्टाफ और तटबंध की निगरानी करने वाली टीमों की छुट्टियां कैंसल कर दी हैं. अहम तटबंधों पर 24 घंटे गश्त किया जा रहा है.
गंडक बैराज से छोड़ा गया 1.5 लाख क्यूसेक पानी
इसके अलावा 26 अगस्त की दोपहर सबसे पहले वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से करीब 86,000 क्यूसेक पानी छोड़ा और रात करीब 11–12 बजे डिस्चार्ज बढ़कर 1,50,200 क्यूसेक हो गया. अधिकारियों ने बताया कि अब नदी का जलस्तर और प्रवाह धीरे-धीरे कम हो रहा है. इससे पहले बाढ़ के खतरे की संभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार (27 अगस्त) को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर संबंधित जिलों में विशेष सतर्कता बरतने और सभी आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा सीतामढ़ी और शिवहर जैसे संवेदनशील जिलों की भी निगरानी को बढ़ा दिया गया है.
गंडक नदी से जुड़े इलाकों की बढ़ी निगरानी
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, मुख्यमंत्री ने गंडक नदी से जुड़े पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली सहित अन्य संवेदनशील जिलों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही नेपाल से आने वाले पानी की स्थिति पर लगातार नजर रखने और संभावित प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए. इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है.
लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्देश दिया है NDRF और SDRF के साथ जिला प्रशासन समन्वय कर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करे. इसके साथ ही निचले और नदी किनारे के इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित इलाकों में जाने की सलाह दी गई है. पश्चिम चंपारण के बगहा इलाके और वैशाली में रह रहे लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है. राज्य सरकार ने बाढ़ की स्थिति में आवश्यक संसाधनों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं ताकि इवैक्यूएशन में समय न लगे.
यूपी भी बाढ़ की संभावना को लेकर सतर्क
वहीं, उत्तर प्रदेश भी अलर्ट मोड पर है क्योंकि नेपाल में आई अचानक बाढ़ का पानी भोटे कोशी-त्रिशूली-नारायणी नदी प्रणाली से नीचे होते हुए गंडक से जुड़ता है. गंडक नदी यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर ज़िलों के पूर्वी किनारे से होते हुए बिहार में प्रवेश करती है. नेपाल में आई बाढ़ को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को महराजगंज और कुशीनगर के जिला प्रशासन को किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. यूपी सरकार ने स्थानीय प्रशासन को नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं.
एक तरफ स्थानीय स्तर पर भारी बारिश और दूसरी तरफ नेपाल से नदियों में आने वाले पानी के तेज बहाव का मिला-जुला असर यूपी में स्थिति को बिगाड़ सकता है. इसलिए प्रदेश सरकार ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर खतरे वाले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है.
SDRF और अन्य टीमें अलर्ट
सरकार ने संबंधित विभागों को गंडक नदी और उसके आसपास के इलाकों की चौबीसों घंटे निगरानी करने के आदेश दिए हैं. अधिकारियों को आशंका है कि बाढ़ के कारण नदी का प्रवाह बढ़ने से निचले इलाकों पर असर पड़ सकता है. महराजगंज जिले के जिलाधिकारी (DM) गौरव सिंह सोगरवाल ने महराजगंज में पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट मोड पर रहने के लिए कहा है. इसके अलावा राजस्व विभाग, पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और अन्य एजेंसियों को सतर्क रहने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर संवेदनशील निचले इलाकों और नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं.
कुशीनगर में बढ़ाई गई निगरानी
कुशीनगर जिला प्रशासन के मुताबिक, नेपाल में आई बाढ़ के कारण अगले दो घंटों में कुशीनगर में नारायणी नदी का जलस्तर और बढ़ने की संभावना है. जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि नेपाल में भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है. प्रशासन ने खासकर खड्डा तहसील के दियारा क्षेत्र के शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, मरचहवा और बसंतपुर गांवों में निगरानी को बढ़ा दिया है और नदी के पास रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा है. यही नहीं गांवों में लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को लगातार चेतावनी जारी की जा रही है. इसके साथ ही कंट्रोल रूम को भी एक्टीव कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति की सूचना पर तुरंत एक्शन लिया जा सके.
उत्तराखंड भी सतर्क
नेपाल में 26 अगस्त को जिस तरह आइस-रॉक कोलैप्स से अचानक बाढ़ का पानी और मलबा नीचे आया था उससे हिमालयी राज्यों के लिए भी अचानक आपदा आने की चिंताओं ने घेर लिया है. ऐसे में उत्तराखंड ने भी अपने सीमावर्ती जिले चंपावत में सतर्कता बढ़ा दी है क्योंकि पहले ही यहां भारी बारिश का मौसम चल रहा है. IMD ने भी 1 सितंबर तक भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है, जिसे देखते हुए उत्तराखंड सरकार भी एतिहातन कदम उठा रही है.
संवेदनशीन इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी और गश्त
अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल में आई आपदा को देखते हुए SDRF के सेनानायक (कमांडेंट) अर्पण यदुवंशी के निर्देश पर चंपावत जिले की टनकपुर चौकी को हाई अलर्ट पर रखा गया है. SDRF की टनकपुर टीम शारदा नदी के संवेदनशील तटीय क्षेत्रों, शारदा घाट, शारदा बैराज और आसपास के इलाकों में लगातार निगरानी एवं गश्त कर रही है. टीम नदी के जलस्तर और संभावित खतरे पर लगातार नजर रख रही है तथा स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाए हुए है.
लोगों को किया जा रहा सतर्क
SDRF द्वारा यहां के स्थानीय निवासियों, यात्रियों और मछुआरों को नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि के प्रति जागरूक किया जा रहा है. लोगों से अपील की जा रही है कि वो किसी भी स्थिति में अनावश्यक रूप से नदी के तटीय क्षेत्रों के पास न जाएं और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें. अधिकारियों ने बताया कि SDRF की टीम आवश्यक जीवनरक्षक और बचाव उपकरणों के साथ 24 घंटे पूरी तरह मुस्तैद है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके.
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