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UGC के नियम इन संस्थाओं पर भी होंगे लागू! नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की चिट्ठी से मची हलचल, अब क्या होगा?

UP News: चंद्रशेखर आजाद ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चिट्ठी लिखकर आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी, आईआईएम, एम्स, मेडिकल कॉलेज में भी लागू करने की मांग की.

देशभर में यूजीसी के नए नियमों को लेकर मचे बवाल के बीच आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मुखिया और यूपी की नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने देश के उच्च शिक्षण संस्थानों आईआईटी, आईआईएम और एम्स में भी इन नियमों को लागू करने की मांग की है. उन्होंने इस संबंध में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चिट्ठी लिखी है.   

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लिखा पत्र

नगीना सांसद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स यूजीसी के नए नियमों को लेकर धर्मेंद्र प्रधान को लिखे पत्र को शेयर किया है. उन्होंने लिखा- 'उच्च शिक्षा संस्थानों में व्याप्त जाति, वर्ग एवं सामाजिक आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करने के उद्देश्य से लाए गए UGC विनियम, 2026 का विरोध विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों के अधिकारों के संदर्भ में सामाजिक न्याय के विरुद्ध एक भ्रामक एवं संगठित प्रयास है, जो अत्यंत चिंताजनक है.

यह निर्विवाद है कि UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 का मूल उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान अथवा दिव्यांगता के आधार पर—विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा दिव्यांगजनों या इनमें से किसी भी वर्ग के सदस्यों के विरुद्ध होने वाले भेदभाव का उन्मूलन करना तथा सभी हितधारकों के मध्य पूर्ण समानता एवं समावेशन को सुनिश्चित करना है.

इन्हीं उद्देश्यों के तहत लाए गए उक्त विनियमों का भीम आर्मी- आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) समर्थन करती है. यह विनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 एवं 21 की मूल भावना के अनुरूप हैं और उच्च शिक्षा को समानता, गरिमा एवं न्याय का वास्तविक माध्यम बनाने की दिशा में एक आवश्यक एवं सकारात्मक पहल है.

हालाँकि, यह अत्यंत चिंताजनक तथ्य है कि वर्तमान में यह भेदभाव-निरोधक व्यवस्था केवल UGC से मान्यता प्राप्त संस्थानों तक सीमित है, जबकि आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी, आईआईएम, एम्स, मेडिकल कॉलेज तथा इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे अनेक प्रमुख केंद्रीय एवं स्वायत्त उच्च शिक्षा संस्थान UGC के अधिकार क्षेत्र में न होने के कारण इन प्रावधानों से बाहर हैं.

यह सर्वविदित है कि संस्थागत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न की सर्वाधिक शिकायतें इन्हीं संस्थानों से सामने आती रही हैं, जहाँ देश का भविष्य प्रशासनिक, तकनीकी एवं नीतिगत नेतृत्व तैयार होता है.

अतः यह आवश्यक है कि जब तक इस प्रकार के भेदभाव-निरोधक एवं समानता-संबंधी प्रावधान उपर्युक्त सभी केंद्रीय एवं स्वायत्त उच्च शिक्षा संस्थानों में समान रूप से लागू नहीं किए जाते, तब तक वंचित समाज के छात्रों के साथ होने वाला शोषण, अन्याय एवं अवसरों की असमानता समाप्त नहीं हो सकेगी.

अतः आपसे विनम्र आग्रह है कि UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 को पूर्ण रूप से प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तथा आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी, आईआईएम, एम्स सहित सभी केंद्रीय एवं स्वायत्त उच्च शिक्षा संस्थानों में भी समान प्रकृति का कानूनी, बाध्यकारी एवं निगरानी-समर्थ भेदभाव-निरोधक ढांचा तत्काल लागू किए जाने हेतु आवश्यक नीतिगत एवं विधिक पहल की जाए. ताकि उच्च शिक्षा वास्तव में सामाजिक न्याय, समानता एवं संवैधानिक मूल्यों का सशक्त आधार बन सके.'  

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