मुजफ्फरनगर: खामेनेई की शहादत पर सड़कों पर उतरा शिया समुदाय, काले लिबास में निकाला विशाल जुलूस
Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर में अयातुल्ला खामेनेई की शहादत पर शिया समुदाय ने शोक मनाया. हजारों लोगों ने जुलूस निकाला, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.

ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली सैयद खामेनेई की शहादत की खबर के बाद मुजफ्फरनगर जनपद के शिया समुदाय में भारी गम और गुस्सा देखने को मिला.
रविवार (1 मार्च) को खालापार क्षेत्र की सड़कों पर हजारों की संख्या में लोग काले कपड़े पहनकर उतरे. इस शोक जुलूस में महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे भी शामिल थे, जिनकी आंखों में आंसू और जुबां पर जुल्म के खिलाफ कड़ा विरोध था.
'जान दे दी पर जालिम के आगे सर नहीं झुकाया'
कार्यक्रम के आयोजक और वरिष्ठ अधिवक्ता नसीम अहमद जैदी ने प्रदर्शन के दौरान भावुक संबोधन दिया. उन्होंने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई ने पूरी दुनिया में मजलूमों की आवाज बुलंद की थी. जैदी ने कहा, "खामेनेई साहब ने अपनी शहादत से यह साबित कर दिया कि वे इमाम हुसैन के रास्ते पर अडिग थे. उन्होंने अमेरिका और इजरायल द्वारा फिलिस्तीन में मासूम स्कूली बच्चों के कत्लेआम के खिलाफ सीना तानकर टक्कर ली. हमें उनकी शहादत पर फख्र है कि उन्होंने जालिम शक्तियों के सामने घुटने नहीं टेके."
ड्रोन से निगरानी और सुरक्षा का कड़ा पहरा
हजारों की भीड़ और संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा. खालापार से लेकर फक्करशाह चौक तक चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए आसमान से ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी की गई. आला अधिकारियों ने खुद मौके पर मौजूद रहकर सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली, ताकि शांति व्यवस्था भंग न हो.
राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, हस्तक्षेप की मांग
जुलूस के समापन पर प्रदर्शनकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा. एडीएम प्रशासन संजय कुमार ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए बताया कि शिया समुदाय ने पूर्व अनुमति लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना रोष प्रकट किया है.
ज्ञापन की मुख्य मांगें
- मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में निर्दोष नागरिकों की हत्याओं पर तत्काल रोक लगाई जाए.
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बहाली के लिए भारत सरकार प्रभावी हस्तक्षेप करे.
- युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय सहायता सुनिश्चित की जाए.
विरोध का कड़ा संदेश
मुजफ्फरनगर का यह विरोध प्रदर्शन न केवल एक धार्मिक नेता के प्रति अकीदत (श्रद्धा) थी, बल्कि इजरायल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों के खिलाफ एक कड़ा वैश्विक संदेश भी था. फिलहाल पूरे क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां लगातार सोशल मीडिया और जमीनी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं.
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Source: IOCL




























