Moradabad News: मुरादाबाद में फर्जी फर्म बनाकर 200 करोड़ रुपये का घोटाला, आगरा से गिरफ्तार हुआ मास्टरमाइंड
Moradabad News In Hindi: पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ पहले से भी मामले दर्ज हैं. अब जीएसटी टीम के साथ ही अन्य विभागों को शामिल कर विस्तृत जांच की जाएगी. फर्जी फर्म बनाकर 200 करोड़ का खेल पकड़ा है.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद में करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी और फर्जी बिलिंग के बड़े खेल का साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है. करीब 200 करोड़ रुपये की फर्जी बिल ट्रेडिंग कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने के आरोप में एक शातिर कारोबारी को आगरा से गिरफ्तार किया गया है. आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, चेकबुक, फर्जी बिल बुक, रबर स्टांप, मुहरें, स्कैनर और लैपटॉप समेत कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं.
पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ पहले से भी मामले दर्ज हैं. अब जीएसटी टीम के साथ ही अन्य विभागों को शामिल कर विस्तृत जांच की जाएगी. जिसमें फर्जीवाड़े के और आंकड़े सामने आ सकें. लेकिन अभी जो रिकॉर्ड मिले हैं उसने पुलिस अधिकारियों को भी हिला दिया है.
क्या है पूरा मामला ?
एसपी क्राइम सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि जीएसटी विभाग की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे के आधार पर साइबर क्राइम थाना और एसआईटी टीम ने कार्रवाई करते हुए पुनीत नामक आरोपी को आगरा से गिरफ्तार किया. जांच में सामने आया कि आरोपी ने विभिन्न नामों से फर्जी फर्में बनाकर कागजों में करोड़ों रुपये का लेन-देन दिखाया और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत लाभ उठाया ऐसे चलता था.
लॉकडाउन के बाद बनाई अपनी फर्म
फर्जीवाड़े का खेल पुलिस जांच के अनुसार आरोपी पहले वर्ष 2019 में दिल्ली में कपड़ों का व्यापार करता था. इसी दौरान उसकी मुलाकात एक व्यक्ति सिद्दीकी से हुई, जिसने पुनीत और उसकी पत्नी के दस्तावेजों के आधार पर एक फर्म तैयार की. शुरुआत में आरोपी को हर माह 20 हजार रुपये दिए जाते थे. लॉकडाउन के बाद भुगतान बंद होने पर पुनीत को अपने नाम से बनी फर्म और जीएसटी यूजर आईडी-पासवर्ड की जानकारी हुई इसके बाद आरोपी ने स्वयं चार नई फर्में विकसित कर फर्जी तरीके से बिल जनरेट करने शुरू कर दिए. बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के केवल कागजी लेन-देन दिखाया जाता था.
लकड़ी के बिल बनाए जाते थे फर्जी
ज्यादातर लकड़ी के फर्जी बिल बनाए जाते थे जबकि माल का कोई वास्तविक आदान-प्रदान नहीं होता था पुलिस के अनुसार आरोपी ने आर.के. इंटरनेशनल मैग्ना एंटरप्राइजेज, क्रिस्टल ट्रेडिंग समेत कई नामों से खाते खुलवाकर करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन दर्शाया.
इनमें एक फर्म के जरिए 88 करोड़, दूसरी के जरिए 57 करोड़ और अन्य खातों में 100 करोड़ से अधिक का फर्जी ट्रांजैक्शन सामने आया है. रकम को आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर वैध दिखाने का प्रयास किया जाता था.
भारी मात्रा में सामान बरामद
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से 11 मोबाइल फोन,12 एटीएम कार्ड,29 चेकबुक, 8 फर्जी बिल बुक,32 रबर स्टांप,5 मुहरें,2 आधार कार्ड, 2 पैन कार्ड,9 दस्तावेजी फाइलें,2 स्कैनर,1 लैपटॉप, 1220 रुपये नकद,बरामद किए हैं. पुलिस को 32 कथित किरायानामे भी मिले हैं, जिनका इस्तेमाल फर्जी फर्में खड़ी करने में किए जाने की आशंका है.
पहले से दर्ज हैं मुकदमे
आरोपी के खिलाफ थाना सिविल लाइन में पहले से ही जीएसटी चोरी और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज है. पुलिस अब आरोपी से गहन पूछताछ कर उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है. सर्विलांस टीम की निगरानी के आधार पर यह गिरफ्तारी संभव हो सकी
एसपी क्राइम सुभाष चंद्र गंगवार ने कहा कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. राजस्व विभाग के साथ समन्वय कर विस्तृत जांच की जा रही है. जो भी अन्य लोग इस फर्जी बिलिंग और कर चोरी के खेल में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिले में फर्जी बिलिंग और जीएसटी चोरी में लिप्त कारोबारियों में हड़कंप मच गया है. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय अपराध और कर चोरी करने वालों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा.
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Source: IOCL


























