UP में बीजेपी की मुश्किल बढ़ाएगा UGC? इस्तीफों से लेकर गांवों में विरोध तक, जानें- क्या-क्या हुआ?
UGC Bill Controversy: मेरठ की ठाकुर चौबीसी के सलावा गांव में सोमवार को युवाओं ने जबरदस्त प्रदर्शन किया. देर शाम एकत्र हुए युवाओं ने गांव में रैली निकाल कर प्रदर्शन किया.

यूजीसी बिल को लेकर देशभर में विरोध पनप रहा है. अधिकारियों को ज्ञापन देने से शुरू हुआ विरोध अब प्रदर्शन तक पहुंच गया है. मेरठ की ठाकुर चौबीसी के सलावा गांव में सोमवार को युवाओं ने जबरदस्त प्रदर्शन किया. देर शाम एकत्र हुए युवाओं ने गांव में रैली निकाल कर प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने बिल को स्वर्ण समाज के लिए काला कानून बताते हुए जमकर नारेबाजी भी की.
वक्ताओं ने अपने संबोधन में इस बिल के विरोध में ग्रामीणों को जागरूक भी किया. बाद में यूजीसी बिल का पुतला दहन कर सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी है कि सरकार अगर इस बिल पर गंभीरता से विचार नहीं करेगी तो स्वर्ण समाज को बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा.
भेदभाव रोकने के लिए सरकार लाई बिल
सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हाल ही में यूजीसी बिल में कई बड़े बदलाव किए हैं. जबकि इन बदलावों को स्वर्ण समाज अपने खिलाफ बनाए गए किसी कानून के रूप में देख रहा है. यही कारण है कि इस बिल का देश में जगह-जगह विरोध शुरू हो गया है. प्रदर्शन करने वालों में गांव के मौजूदा प्रधान बंटी सोम पूर्व प्रधान सुनील कुमार, भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी के जिला अध्यक्ष राजीव राणा और करणी सेना भारत के तहसील अध्यक्ष निश्चय सोम समेत अनेक लोग शामिल रहे.
इसके अलावा भी प्रदेश के अलग-अलग शहरों में इस बिल के विरोध में सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राएं विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. बड़ी संख्या में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अपनी नाराजगी जता रहे हैं.
बरेली में PCS अधिकारी ने दिया था इस्तीफा
इससे पहले सोमवार को UGC बिल के विरोध में बरेली में तैनात सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया था. जिसन पर शासन ने कार्रवाई करते हुए देर रात निलंबित कर जांच बैठा दी है.
लखनऊ यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन
यूजीसी के नए नियमों को लेकर जोरदार हंगामा हो रहा है. जातिगत भेदभाव रोकने का हवाला देकर यूजीसी ने जो नए नियम बनाए हैं उसका यूपी में हर तरफ विरोध होने लगा है. लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने आज यूजीसी के विरोध में हंगामा किया है.
छात्रों का कहना है कि यूजीसी जैसा कानून को संशोधन नहीं बल्कि बर्खास्त कराना है हमने आज एसीपी को ज्ञापन दिया है अगर 5 दिन में कानून वापस नहीं होता तो हम विधानसभा का घेराव करने पर मजबूर होंगे.
आगरा में BJP विधायक ने खून से लिखा पत्र
यूजीसी 2026 के विरोध में बीजेपी नेता ने अपने खून से प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है. सवर्ण छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षक भी यूजीसी बिल 2026 का विरोध कर रहे हैं. आगरा के जगदीश पचौरी, जो नगर निगम में उपसभापति रह चुके हैं, उन्होंने अपने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बिल में सुधार करने के लिए एक पत्र लिखा है.
पत्र में उन्होंने लिखा है कि इस बिल के जरिए सामान्य छात्र-छात्राओं की प्रतिभाओं को दबाने का काम किया जा रहा है. उनका कहना है कि बेहतर होगा कि इस बिल में जो त्रुटियां हैं, उनमें संशोधन किया जाए, ताकि सभी छात्रों को समान अवसर मिल सके.
हापुड़ में भी खून भरा खत
उत्तर प्रदेश के हापुड़ में राष्ट्रीय सैनिक संस्था के पदाधिकारियों ने यूजीसी एक्ट के विरोध में राष्ट्रपति के नाम खून से खत लिखा है. सैनिकों द्वारा लिखे गए खून से खत में सरकार के इस यूजीसी एक्ट को काला कानून बताया गया है और राष्ट्रपति से जल्द से जल्द इस एक्ट में सुधार करने अन्यथा इसे निरस्त करने की मांग की गई है.
राष्ट्रीय सैनिक संस्था के जिला अध्यक्ष ज्ञानेंद्र त्यागी ने बताया कि यूजीसी द्वारा बनाए गए नियम देश के सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों पर समान रूप से लागू किए जाते हैं. ऐसे में वर्तमान सरकार द्वारा यूजीसी एक्ट में किया गया संशोधन समाज में जातीय असमानता को उत्पन्न करेगा. ज्ञानेंद्र त्यागी ने कहा कि इस काले कानून का दुष्प्रभाव हमारे बच्चों के भविष्य में दिखाई देगा. देश के राष्ट्रपति से मांग की जाती है कि वह जल्द से जल्द इस यूजीसी एक्ट को संशोधित करें या फिर इसे निरस्त करें.
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Source: IOCL



























