घर में 3 दिन पड़ा रहा पिता का शव, बिलखते रहे बच्चे, मदद नहीं मिली तो ठेले पर लेकर भटके मासूम
Maharajganj News: बच्चों की मां की एक साल पहले ही मौत हो चुकी है और तीन दिन पहले पिता की भी मौत हो गई. बच्चे तीन दिन तक पिता के अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगते रहे लेकिन, कोई आगे नहीं आया.

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. यहां के नौतनवा नगर के राजेंद्र नगर वार्ड दो नाबालिग बच्चों के पिता लव कुमार पटवा की मौत हो गई. तीन दिन बाद भी किसी ने उनकी मदद नहीं की. जिसके बाद ये बच्चे ख़ुद ही पिता के शव को ठेले पर लेकर निकल गए.
इन बच्चों की किसी भी पड़ोसी ने मदद नहीं की और न ही किसी को उन पर रहम आया कि वो उनके पिता के अंतिम संस्कार में भी मदद कर दें. तीन दिन बाद दोनों नाबालिग बच्चे किसी तरह पिता के शव को ठेले पर लेकर अंतिम संस्कार करने के लिए निकल पड़े.
इसी दौरान नगर के समाज सेवी राशिद कुरैशी की इन बच्चों पर नजर पड़ गई. जिसके बाद उन्होंने अपने भाई वारिस कुरैशी को बुलाया और दोनों बच्चों के सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया और फिर इन बच्चों के पिता लव कुमार के शव का अंतिम संस्कार कराया.
मासूमों पर नहीं आया किसी को तरस
मृतक लव कुमार पटवा का राजेंद्र नगर वार्ड में रेलवे ढाला के पास घर है, उनके तीन बच्चे राजवीर (14), देवराज (10) और एक पुत्री हैं. बड़े बेटे राजवीर ने बताया कि उनकी मां की पिछले साल ही मौत हो गई थी. जिसके बाद पिता ही उनका एकमात्र सहारा था.
तीन दिन पहले रात को सोते हुए उनकी भी अचानक मृत्यु हो गई. जिसके बाद उनके सिर से पिता का साया भी उठ गया. घर से बच्चों के रोने की आवाज सुन कुछ लोग मौके पर तो पहुंचे लेकिन, फिर अपनी-अपनी दिनचर्या में लौट गए. तीनों बच्चे लगातार दो दिनों तक पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए मदद की आस में लोगों का मुंह निहारते रहे लेकिन, किसी ने भी आगे बढ़कर मदद नहीं की.
इस बीच शव में सड़न होने से बदबू फैलने लगी तो रविवार की देर शाम बच्चों ने कहीं से एक ठेले का इंतजाम किया और काफी मशक्कत से किसी तरह पिता के शव को कपड़े में लपेटकर ठेले पर रखा और नदी में फेंकने के लिए चल दिए.
इसी दौरान छपवा तिराहे पर समाज सेवी राशिद कुरैशी की नजर इन बच्चों पर पड़ गई. जिसके बाद वो उनकी व्यथा सुनकर अवाक रह गए और फिर उन्होंने अपने भाई को बुलाया और दोनों भाइयों ने मानवता का परिचय देते हुए शव को श्मशान घाट तक पहुंचाया और पूरे विधि विधान के साथ शव का अंतिम संस्कार कराया.
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Source: IOCL





















