यूपी में खपाई जा रही थीं नकली दवाएं, लखनऊ से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल तेज
Lucknow News In Hindi: खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के प्रदेशव्यापी अभियान में लखनऊ, आगरा, वाराणसी और गोंडा में अब तक करीब 5.43 करोड़ रुपये की अवैध औषधियां जब्त की गई हैं.

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA), उत्तर प्रदेश द्वारा नकली एवं काउंटरफीट औषधियों के भंडारण, क्रय-विक्रय, परिवहन और विनिर्माण के खिलाफ चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी अभियान में लखनऊ, आगरा, वाराणसी और गोंडा में अब तक करीब 5.43 करोड़ रुपये की अवैध औषधियां जब्त की गई हैं. कार्रवाई के दौरान लखनऊ में 41.58 लाख रुपये, वाराणसी में 25 लाख रुपये, गोंडा में 1.13 करोड़ रुपये और आगरा में 3.63 करोड़ रुपये की अवैध औषधियां बरामद की गईं.
इसी अभियान के तहत राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद में नकली और काउंटरफीट दवाओं की सप्लाई चेन चलाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. जांच में सामने आया कि मेसर्स हेल्थ प्लस, मेसर्स एम.के. फार्मा, राम फार्मा और पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस (सहारनपुर) मिलकर फर्जी बिलिंग के जरिए नकली दवाएं बाजार में खपा रही थीं. हेल्थ प्लस को लाइसेंस मई 2025 में मिला, लेकिन फर्म अप्रैल 2025 से ही अवैध क्रय-विक्रय दिखा रही थी.
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निर्माता कंपनी STADMED ने फर्म द्वारा बेची गए Alkasol सीरप को नकली करार दिया. वहीं एम.के. फार्मा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 8.87 करोड़ रुपये की फर्जी खरीद दिखाई और साक्ष्य मिटाने के लिए पुराने डेटा तक को डिलीट कर दिया.
निर्माता कंपनी Wardex ने फर्म की Dexorange Syrup को नकली बताया, जबकि लगभग 39.20 लाख Zoryl M1 टैबलेट के स्रोत का सत्यापन तक नहीं हो सका. चारों फर्मों के विरुद्ध थाना अमीनाबाद में 12 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111, 276, 277, 278, 318, 319, 336 व 338 के तहत FIR दर्ज की गई है.
अंतर्राज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़, नकली दवाओं की फैक्ट्री का पर्दाफाश
लखनऊ में मिली नकली दवाओं के स्रोत की गहन जांच के दौरान एक बड़ा राज खुला. सुराग की कड़ियां जोड़ते हुए FSDA उत्तर प्रदेश, क्राइम ब्रांच गाजियाबाद और औषधि विभाग उत्तराखंड की संयुक्त टीम एक अवैध फैक्ट्री तक जा पहुंची — जहां डा0 रेड्डी, Cipla, Elder, Macro, Intas जैसी नामी कंपनियों के जीवनरक्षक उत्पाद Clavactum 625 और Razo-D कैप्सूल बिना किसी वैध लाइसेंस के खुलेआम नकल तैयार हो रही थी.
छापेमारी में टैबलेट-कैप्सूल बनाने की मशीनें, ब्लिस्टर पैकिंग यूनिट, ओवरप्रिंटिंग मशीन और नामी ब्रांडों की हूबहू नकली फॉइल पैकिंग. यानी यह सिर्फ भंडारण नहीं, असली दवाओं की जीवित नकली फैक्ट्री थी. मौके से ₹2 करोड़ की दवाएं, मशीनें व पैकिंग सामग्री जब्त की गईं और दो आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करी गई.
जुलाई से लखनऊ में लगातार छापेमारी, लाखों की दवाएं जब्त
इससे पहले जुलाई में भी लखनऊ में कई बड़ी कार्रवाई हुई. आलमबाग मेट्रो स्टेशन के पास से 1.6 लाख रुपये, बक्शी का तालाब क्षेत्र से 5 लाख रुपये और अमीनाबाद स्थित एक अवैध गोदाम से 21 लाख रुपये की नकली दवाएं (Telma, Pantop 40 आदि) जब्त की गईं.
इसी तरह अमीनाबाद की आठ फर्मों और एक सॉफ्टवेयर विक्रेता पर फर्जी बिलिंग व सॉफ्टवेयर हेरफेर के आरोप में FIR दर्ज हुई, तो केसरबाग़ में बिना भौतिक सप्लाई के क्रॉस-बिलिंग सिंडिकेट का खुलासा हुआ. इसमें भी BNS की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया. लखनऊ और रायबरेली की कई फर्मों पर भी इसी तरह के आरोप लगे.
विभाग के अनुसार लखनऊ में अब तक करीब 41.58 लाख रुपये की अवैध दवाएं जब्त कर 32 लोगों के विरुद्ध 7 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें 2 गिरफ्तारियां हुई हैं.
वाराणसी में बिना लाइसेंस भंडारण, दुकान संचालक गिरफ्तार
वाराणसी के मडुवाडीह क्षेत्र में एक सर्जिकल दुकान से करीब 25 लाख रुपये की अवैध एलोपैथिक दवाएं जब्त की गईं. दुकान संचालक को मौके पर गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 277, 278 एवं 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया.
गोंडा और मेरठ में नशे में प्रयुक्त दवाओं व नकली कैप्सूल रैकेट का खुलासा
गोंडा के बड़गांव में एक फार्मास्युटिकल फर्म के ठिकानों से नशे में प्रयुक्त होने वाली दवाओं, इंजेक्शनों और सीरप का करीब 1.13 करोड़ रुपये का जखीरा जब्त हुआ. मामले में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम तथा एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जबकि सह-आरोपी फरार है.
वहीं मेरठ, बागपत और उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में संयुक्त छापेमारी में नकली 'Evion 400mg' कैप्सूल बनाने वाला अंतरराज्यीय रैकेट पकड़ा गया, जहां FSSAI लाइसेंस की आड़ में 6 लाख नकली कैप्सूल बरामद हुए.
आगरा में सबसे बड़ी बरामदगी, री-लेबलिंग व फर्जी बिलिंग का जाल
आगरा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने कई ठिकानों पर छापेमारी कर नकली दवाओं की बिक्री, फर्जी लेबलिंग व फर्जी बिलिंग के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया, जिसमें विभोर मेडिकल, वरदान मेडिकल, हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल व पाल ब्रदर्स के यहां Torrent Pharma की नकली Chymoral Forte, Aciloc व सरकारी कोटे की Zostum-O की कालाबाजारी मिली.
युग फार्मा, शारदा फार्मा व RMD फार्मा में इंसुलिन पर फर्जी लेबल व मनमानी MRP से बिक्री के सबूत मिले, जबकि वी.ए. मेडिकोज, रुद्रा व भगवती मेडिकल सिंडिकेट में Telma-H से जुड़ी अनियमितताओं संग करीब ₹1.88 करोड़ की फर्जी बिलिंग सामने आई.
यूपीएफएसडीए आयुक्त डॉ रोशन जैकब के अनुसार, ज्योति ड्रग हाउस से इंसुलिन, रेबीज़ वैक्सीन व फिजिशियन सैंपल दवाएं (₹2.5 करोड़) बरामद हुईं. श्री मेडिकल एजेंसीज से नकली OXALGIN-DP टैबलेट्स ₹50 लाख जब्त हुईं. ब्राइट फार्मा-फाउन्टेन में री-लेबलिंग (₹5.20 लाख) और सी.एफ. इंटरप्राइजेज व अन्य गोदामों से (₹67 लाख) की दवाएं जब्त हुईं. आगरा में कार्यवाई के दौरान ₹3.63 करोड़ की अवैध औषधियां जब्त, साथ ही 9 FIR दर्ज की गयी और 2 अभियुक्त गिरफ्तार हुए.
दवा सुरक्षा (Drug Safety) यूपीएफएसडीए में सर्वोच्च चिंता का विषय है. इसका सीधा और गहरा संबंध जनस्वास्थ्य से है. बीमार व्यक्ति के पास दवाओं पर भरोसा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता. ऐसी स्थिति में व्यवस्था उसे किसी भी स्तर पर निराश नहीं कर सकती और न ही करना चाहिए. इसलिए इस खतरे को हमारे प्रदेश से पूरी तरह समाप्त करने तक दवा माफिया के खिलाफ हमारा अभियान जारी रहेगा और पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहेगा.
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