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यूपी से होकर जाता है दिल्ली का रास्ता, इन बड़े नेताओं पर पर टिकी हैं पूरे देश की निगाहें

भले ही देश यूपी की तरफ निहार रहा हो लेकिन यहां की जनता नेताओं की हर हलचल पर बारीकी से नजर जमाए बैठी है। आइए एक नजर उन नेताओं पर डालते हैं जो दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने के लिए यूपी का रुख कर चुके हैं।

लखनऊ, एबीपी गंगा। 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए सियासी जमीन तैयार हो चुकी है। वोटों की इस लड़ाई में महारथी तैयार हैं। अब जनता का भी टाइम आ चुका है ऐसे में उत्तर प्रदेश पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। भले ही देश यूपी की तरफ निहार रहा हो लेकिन यहां की जनता नेताओं की हर हलचल पर बारीकी से नजर जमाए बैठी है। आइए एक नजर उन नेताओं पर डालते हैं जो दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने के लिए यूपी का रुख कर चुके हैं।

नरेंद्र मोदी

सबसे पहले बाद करते हैं नरेंद्र मोदी की। एक बार फिर नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं। मोदी को घेरने के लिए यूपी की इस लोकसभा सीट पर विपक्ष ने सियासी मोहरे फिट कर दिए हैं। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने नरेंद्र मोदी को वाराणसी से उम्मीदवार बनाया था। भाजपा ने 2014 में ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ का नारा दिया गया था और इसका असर यह था कि देश में उठी मोदी लहर ने विपक्ष को ध्वस्त कर दिया था। अब 2019 में एक बार फिर नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव मैदान में हैं और सपा-बसपा का गठबंधन बड़ी चुनौता बनकर उभरा है।

प्रियंका गांधी वाड्रा

कांग्रेस की स्टार प्रचारक रहीं प्रियंका गांधी वाड्रा का सक्रिय राजनीति में 23 जनवरी को पदार्पण हुआ है। उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाने के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश की 41 लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी भी दी गई है। प्रियंका की सियासत में एंट्री लोकसभा चुनाव को देखते हुए देरी से हुई है। जनता प्रियंका के साथ किस तरह से नजर आती है ये मत पेटियों के खुलने के बाद ही पता चल सकेगा।

राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यूपी को साधने  के लिए इस बार अपनी बहन प्रियंका गांधी को भी मौदान में उतार दिया है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद राहुल गांधी का मनोबल काफी ऊंचा है। राहुल गांधी लगातार पीएम मोदी पर निशाना साध रहे हैं। सोनिया गांधी की जगह पार्टी के अध्यक्ष बनाए गए राहुल के नेतृत्व में यह पहला लोकसभा चुनाव होगा। सपा-बसपा ने गठबंधन से कांग्रेस को बाहर रखा है जिसके बाद यूपी में राहुल गांधी के लिए चुनौती आसान नहीं होगी।

अमित शाह

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 2014 के आम चुनाव में अपनी कुशल रणनीति से विरोधियों को चित कर दिया था। इस बार भी अमित शाह पर बेहतर प्रदर्शन को दोहराने की जिम्मेदारी होगी। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। उनकी अगुआई में उप्र की 80 सीटों में से एनडीए को 73 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। उसी साल जुलाई में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। इस बार अमित शाह विरोधी पार्टियों और नेताओं पर ज्यादा आक्रामक दिख रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ

2017 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक योगी आदित्यनाथ भाजपा में एक बड़े प्रचारक के तौर पर उभरे हैं। एक फायरब्रांड हिंदुत्ववादी नेता की पहचान के साथ वह एक सख्त प्रशासक के तौर पर भी देखे जाते हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बाद यूपी में भाजपा का परचम लहराने की जिम्मेदारी योदी आदित्यनाथ पर ही होगी।

मायावती

यूपी की पूर्व सीएम और बीएसपी चीफ मायावती की पार्टी के प्रदर्शन पर भी सबकी निगाहें होंगी। पिछले लोकसभा चुनाव में बीएसपी की यूपी में खाता भी नहीं खुल पाया था। इस बार पार्टी ने राज्य में भाजपा को रोकने के लिए एसपी के साथ गठबंधन किया है। देखने वाली बात होगी कि मायावती का करिश्मा इस बार कैसा काम करता है। बसपा अध्यक्ष मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं। अनुसूचित जाति से आने वाली मायावती की राजनीति में पैठ भी है और राज्य में अपना वोट बैंक भी। इस बार मुकाबला कड़ा है।

अखिलेश यादव

एसपी चीफ अखिलेश यादव इस बार अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण चुनाव का नेतृत्व कर रहे हैं। 2014 के चुनाव में पार्टी ने यूपी में केवल 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सपा में कलह के बीच अखिलेश यादव ने पार्टी की कमान अपने हाथ में ली है। सपा और बसपा का साथ है और अब देखना ये है कि ये साथ जनता को कितना पसंद आता है।

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