क्रोध में आकर इस ऋषि ने रोक दी थी गंगा की धारा, आज भी वापस लौटती हुई नजर आती है नदी
तपस्या में लीन ऋषि दत्तात्रेय के ऊपर भी गंगा नदी बहने लगी. ऋषि की तपस्या भंग हुई तो उन्होंने अपने तपो बल से गंगा नदी को आगे बढ़ने से रोक दिया.

हरिद्वार: हरिद्वार को पवित्र धार्मिक स्थान माना जाता है. 'हरिद्वार' का मतलब हरि यानी ईश्वर का द्वार होता है. इस स्थान को मायापुरी और मोक्षद्वार के नाम से भी जाना जाता हैं. हरिद्वार हरकी पैड़ी के साथ-साथ अनेक तीर्थों से भरा हुआ है. इस पावन भूमि पर हर साल लाखों-करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. दत्तात्रेय की तप स्थली कुशावर्त यहीं मौजूद है. माना जाता है कि ऋषि दत्तात्रेय ने यहीं तपस्या की थी.
सफल हुए भगीरथ भगीरथ शिव की जटाओं से नि:सृत गंगा नदी को हिमालय से लेकर सागर तट स्थित कपिल मुनि के आश्रम को रवाना हुए. कपिल मुनि के श्राप से इक्ष्वाकु वंश के राजा सगर के साठ हजार पुत्र भस्म हो गए थे. राजा सगर की चार पीढ़ी गंगा नदी को लाने में असफल हुई, जबकि भगीरथ सफल हुए.
भंग हो गई ऋषि की तपस्या भगीरथ जब हरकी पैड़ी से होते हुए आगे बढ़े तो रास्ते में दत्तात्रेय ऋषि तपस्या कर रहे थे. शंख बजाते हुए भगीरथ आगे आगे, गंगा नदी पीछे पीछे. गंगा नदी के वेग में ऋषि के दंड कमंडल बह निकले. साथ ही तपस्या में लीन ऋषि दत्तात्रेय के ऊपर भी गंगा नदी बहने लगी. ऋषि की तपस्या भंग हुई तो उन्होंने अपने तपो बल से गंगा नदी को आगे बढ़ने से रोक दिया.
शांत हुआ दत्तात्रेय का क्रोध आगे न बढ़ पाने के कारण गंगा नदी वहीं गोलकार आकार में बहने लगी. यह देखकर भगीरथ और गंगा नदी दोनों ने दत्तात्रेय से क्षमा मांगी, उनके आसान और दंड कमंडल लौटाए. मुनि की आरती उतारी जिसके बाद दत्तात्रेय का क्रोध शांत हुआ.
वापस लौटती हैं गंगा क्रोध शांत होने पर दत्तात्रेय ने गंगा नदी को कालजयी होने का आशीर्वाद दिया. कुशा का आसन बहने के कारण इस स्थल का नाम कुशावर्त पड़ा. आज भी कुशावर्त आकर गंगा नदी वापस लौटती हैं, आवर्तमय बहती हैं. इस कुशावर्त तीर्थ पर हजारों श्रद्धालु अपने पितरों का श्राद्ध तर्पण और पितृ कर्मकांड करने आते हैं.
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