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Joshimath Sinking: एक-एक मिनट अहम, लोग घर छोड़ने को तैयार नहीं, पूछा- 'अपने घर जैसा सुकून कहां?'

Joshimath Sinking News: आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, चमोली के अनुसार जोशीमठ में सोमवार को 68 और घरों में दरार देखी गयी जिसके बाद जमीन धंसने से प्रभावित मकानों की संख्या 678 हो गयी है.

Joshimath Sinking News: जोशीमठ में बड़ी संख्या में लोग जमीन धंसने के कारण असुरक्षित घोषित किये गये अपने घरों को छोड़कर जाने के इच्छुक नहीं हैं, वहीं उत्तराखंड के मुख्य सचिव एस एस संधू ने सोमवार को कहा कि एक-एक मिनट अहम है. संधू ने लोगों को प्रभावित क्षेत्र से तत्काल निकाले जाने का निर्देश दिया.

जिला प्रशासन ने असुरक्षित 200 से अधिक घरों पर लाल निशान लगा दिया है. उसने इन घरों में रहने वाले लोगों को या तो अस्थायी राहत केंद्रों में जाने या किराये के घर में स्थानांतरित होने को कहा है. इसके लिए प्रत्येक परिवार को अगले छह महीने तक राज्य सरकार से 4000 रुपये मासिक सहायता मिलेगी.

Joshimath Sinking News: जोशीमठ के 75 घरों पर लगाए गए लाल निशान, 27 और परिवारों को किया शिफ्ट, आज से शुरू होगा ध्वस्तीकरण

27 और परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, चमोली के एक बुलेटिन के अनुसार जोशीमठ में सोमवार को 68 और घरों में दरार देखी गयी जिसके बाद जमीन धंसने से प्रभावित मकानों की संख्या 678 हो गयी है, वहीं 27 और परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है.

इसमें कहा गया कि अब तक 82 परिवारों को कस्बे में सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल के कर्मियों को राहत तथा बचाव प्रयासों के लिए तैनात किया गया है.

संधू ने जोशीमठ में हालात की समीक्षा के लिए राज्य सचिवालय के अधिकारियों के साथ बैठक की और उनसे लोगों को घरों से निकालने के काम में तेजी लाने को कहा ताकि वे सुरक्षित रहें.

सीवर लाइन की भी तत्काल मरम्मत 
उन्होंने कहा कि जिन जर्जर मकानों में दरारें आई हैं, उन्हें फौरन ढहाया जाना चाहिए ताकि और अधिक नुकसान नहीं हो. अधिकारी ने कहा कि टूट गयीं पेयजल पाइपलाइन तथा सीवर लाइन की भी तत्काल मरम्मत की जानी चाहिए क्योंकि इनसे प्रभावित क्षेत्र में चीजें और जटिल हो सकती हैं.

प्रभावित इलाके में रहने वाले अनेक परिवार अपने घरों से भावनात्मक मोह तोड़ नहीं पा रहे और उन्हें छोड़कर नहीं जाना चाह रहे. जो लोग अस्थायी आश्रयस्थलों में पहुंच गये हैं, वे भी खतरे में पड़े अपने खाली घरों को देखने पहुंच रहे हैं.

कस्बे में सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में शामिल मारवाड़ी वार्ड की बुजुर्ग नागरिक परमेश्वरी देवी ने कहा कि उन्होंने खुद का घर बनाने के लिए अपनी पूरी जमापूंजी लगा दी और अब उनसे इसे छोड़कर एक राहत शिविर में जाने को कहा जा रहा है.

अपने घर जैसा सुकून मुझे और कहां?
उन्होंने एक निजी समाचार चैनल से कहा, ‘‘मैं कहीं और जाने के बजाय उसी घर में मर जाना पसंद करुंगी जो मेरा है. अपने घर जैसा सुकून मुझे और कहां मिलेगा.’’

मनोहरबाग निवासी सूरज कापरवान की कहानी भी कुछ ऐसी है. उनका परिवार अब भी घर छोड़ने का फैसला नहीं ले पाया है.

सिंगधार की रहने वाली रिषी देवी का घर धीरे-धीरे धंसता जा रहा है. उन्हें अपने परिवार के साथ एक सुरक्षित जगह पर जाना पड़ा, लेकिन वह रोजाना अपने घर लौटती हैं जबकि उनके परिवार वाले उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं.

देवी अब वहां बैठकर अपने घर की दरार पड़ी दीवारों को निहारती रहती हैं. रमा देवी के परिवार को कमरों में दरार पड़ने के बाद घर के वरांडा में सोने को मजबूर होना पड़ा और अंतत: उन्होंने दहशत में आकर घर छोड़ दिया. एक प्राथमिक स्कूल के भवन में शरण लेने वाली लक्ष्मी ने कहा कि वह स्थायी पुनर्वास चाहती हैं. उन्होंने कहा, ‘‘हम कब तक इस अस्थायी राहत शिविर में रहेंगे.’’

 इस बीच जोशीमठ में जमीन धंसने की वजह से उत्पन्न संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिए हस्तक्षेप का अनुरोध कर रहे एक याचिकाकर्ता से उच्चतम न्यायालय ने, उसकी अपील को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के उद्देश्य से मंगलवार को इसका उल्लेख करने को कहा है.

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