'मेरा बेटा बचने के लिए 2 घंटे तक संघर्ष करता रहा, नहीं मिली मदद', नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही से गई युवराज की जान
Noida News: ग्रेटर नोएडा में कोहरे के कारण सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार नाले में गिरने से मौत हो गई. परिवार ने नोएडा प्राधिकरण पर लापरवाही का आरोप लगाया है, क्योंकि पहले भी उसी जगह हादसा हुआ था.

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक बड़ा हादसा हुआ जब एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की गाड़ी हादसे का शिकार हो गई और नाले में जा गिरी. उसने मदद के लिए कई घंटों तक इंतजार किया, लेकिन समय से मदद न मिलने की वजह से युवराज ने दम तोड़ दिया. युवराज के परिवार वालों ने और अन्य लोगों ने नोएडा विकास प्राधिकरण पर लापरवाही का आरोप लगाया है.
पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहतना, अपने परिवार का इकलौता बेटा था. आरोप है कि नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही ने उसकी जान ले ली. युवराज ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में रहता था. रात में गुरुग्राम स्थित अपने ऑफिस से वह घर की ओर जा रहा था. कोहरा ज्यादा होने की वजह से सड़क के सामने पानी भरे तालाब में उसकी कार नाले की दीवार को तोड़ते हुए गिर गई.
युवराज से पहले भी यहीं पर हुआ था बड़ा हादसा
दर्दनाक हादसे में युवराज की मौत के बाद सोसाइटी में रहने वाले लोगों ने कैंडल मार्च निकाला. गुस्साए लोगों का आरोप है कि सिस्टम की लापरवाही से युवराज की जान चली गई. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है.
बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले भी उसी जगह पर एक ट्रक कोहरे के कारण नाले में जा घुसा था, जिसे निकाल लिया गया था. घटना के बाद से लोगों में है रोष है. और नोएडा प्राधिकरण को इसका जिम्मेदार बताते हुए एक्शन की मांग की जा रही है.
'मेरा बेटा बचाओ-बचाओ चिल्लाता रहा, किसी ने मदद नहीं की'
मृतक युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने एबीपी न्यूज से बातचीत में बताया है कि उन्होंने अफने बेटे से आखिरी समय तक बात की थी. उन्होंने कहा, "मेरे बेटे ने कार की छत पर चढ़कर मोबाइल की टॉर्च जलाकर ऑन की हुई थी, जिससे किसी को दिखाई दे सके. उसने कई बार हेल्प-हेल्प चिल्लाया था."
पिता ने बताया कि उन्होंने 112 को कॉल करके जानकारी दी. दमकल विभाग की गाड़ियां आईं. NDRF की टीम पहुंची, लेकिन उन सभी के पास एक रस्सी थी. उसके अलावा उनके पास युवराज को निकालने के लिए कोई भी साधन नहीं था. अगर उनके पास कोई भी और साधन होता तो बेटे को बचाया जा सकता था."
'तमाशबीन बन मेरे बेटे का वीडियो बनाते रहे लोग'- राजकुमार मेहता
वहीं, न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए राजकुमार मेहता ने कहा, "मेरा बेटा बचाव के लिए संघर्ष कर रहा था. वह फोन पर कह रहा था पापा बचाओ पापा बचाओ. हेल्प हेल्प भी चिल्ला रहा था, ताकि आसपास के लोग उसकी मदद के लिए कुछ कर दें, लेकिन भीड़ में ज्यादातर लोग वहां तमाशा देखने के लिए खड़े थे. कुछ वीडियो बना रहे थे, डांटने पर रुके. मेरे बच्चे की जान खामखा चली गई. सही समय पर संसाधनों का उपयोग नहीं किया गया. उसने दो घंटा संघर्ष किया अपनी जान बचाने के लिए, उसे सपोर्ट नहीं मिला."
पिता ने बताया, "बेटे ने ही फोन किया कि मैं नाले में गिर गया हूं. मैं वहां पहुंचा और प्रत्यक्ष रूप से सब देखा. धुंध थी, विजिबिलिटी नहीं थी. मैंने बेटे से पूछा तुम हो कहां तो उसने पूरी लोकेशन बताई. अपने मोबाइल का टॉर्च ऑन कर के उसने दिखाया. मुझे हल्की रोशनी दिखी, जिससे पता चला कि वह कहां है. वह काफी दूर था. अगर वहां कोई गोताखोर या तैराक जाता, उससे रस्सी के सपोर्ट से ले आता तो उसकी जान बच सकती थी."
ऑपरेशन शुरू होने के एक घंटे बाद युवराज को बाहर निकाला गया
पिता ने बताया कि करीब 6.00 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ. उसकी बॉडी को रिकवर करने में एक घंटा लगा. गाड़ी अभी भी नाले के अंदर है. बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनयर था. गुड़गांव से आता-जाता था. दो-तीन दिन घर से काम करता था, बाकी दिन ऑफिस जाता था.
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Source: IOCL























